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अवलोकन

सारांश

कक्षा 7 विज्ञान एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (जिज्ञासा) का अध्याय 8, "समय एवं गति का मापन", प्राचीन समय-मापन यंत्रों (धूप-घड़ी, जल-घड़ी, रेत-घड़ी) से लोलक-घड़ी और परमाणु घड़ियों तक की यात्रा करता है, तथा चाल, औसत चाल और एकसमान एवं असमान रैखिक गति की अवधारणाएँ प्रस्तुत करता है।

  • समय मापने की कहानीमनुष्य ने समय मापने के लिए धूप-घड़ी, जल-घड़ी जैसे यंत्र बनाए; भारत की घटिका-यंत्र 24 मिनट में भरकर डूब जाती थी जो 'घटी' की समय-इकाई देती थी। फिर गैलीलियो और क्रिश्चियन हाइगेन्स के अवदान से लोलक घड़ी (1656-57) आई और अंततः क्वार्ट्ज तथा परमाणु घड़ियाँ।
  • सरल लोलकधागे पर लटकता गोलक (bob) एक दोलन पूरा करने में जो समय लेता है उसे दोलनकाल कहते हैं। दोलनकाल लोलक की लंबाई पर निर्भर करता है, गोलक के द्रव्यमान पर नहीं — यह गैलीलियो और हाइगेन्स की वह खोज थी जिसने यांत्रिक घड़ियाँ संभव कीं।
  • चाल और उसकी परिभाषागति को चाल द्वारा मापा जाता है — कुल दूरी को कुल समय से भाग देने पर चाल मिलती है। SI मात्रक m/s है; km/h में भी व्यक्त किया जाता है। कुल दूरी और कुल समय से प्राप्त चाल औसत चाल कहलाती है।
  • एकसमान और असमान रैखिक गतिएकसमान रैखिक गति में कोई वस्तु सीधी रेखा में समान चाल से चलती है; असमान रैखिक गति में चाल बदलती रहती है। वास्तविक जीवन में अधिकांश गतियाँ असमान होती हैं और औसत चाल ही व्यावहारिक होती है।
मुख्य बातें

मुख्य बिंदु और सूत्र

  1. 01प्राचीन समय-मापन यंत्रों में धूप-घड़ी (परछाई की स्थिति), जल-घड़ी (जल प्रवाह), रेत-घड़ी (एक बल्ब से दूसरे में रेत का प्रवाह) और मोमबत्ती-घड़ी (अंशांकित मोमबत्ती) शामिल थे।
  2. 02भारत का घटिका-यंत्र एक डूबने वाले कटोरे प्रकार की जल-घड़ी थी जिसका उल्लेख आर्यभट्ट ने पहली बार किया था। 24 मिनट में भरकर डूबती थी और एक दिन 60 घटियों में बाँटा जाता था।
  3. 03विश्व की सबसे बड़ी पत्थर की धूप-घड़ी 'सम्राट यंत्र' जयपुर के जंतर-मंतर (यूनेस्को विश्व धरोहर) में है; इसकी 27 मीटर ऊँचाई से इसकी छाया प्रत्येक सेकंड में लगभग 1 मिलीमीटर सरकती है और 2 सेकंड तक की अल्पावधि माप सकती है।
  4. 04सरल लोलक में एक धात्विक गोलक धागे पर लटका होता है; इसका दोलनकाल (एक पूर्ण दोलन का समय) लोलक की लंबाई पर निर्भर करता है, गोलक के द्रव्यमान पर नहीं।
  5. 05लोलक घड़ी का आविष्कार 1656 में हुआ और 1657 में क्रिश्चियन हाइगेन्स (1629-1695) ने इसे पेटेंट किया; गैलीलियो के लोलक प्रयोगों से प्रेरित होकर।
  6. 06आधुनिक परमाणु घड़ियाँ लाखों वर्षों में केवल एक सेकंड खोती हैं, जबकि प्रारंभिक लोलक घड़ियाँ प्रतिदिन 10 सेकंड तक आगे-पीछे हो जाती थीं।
  7. 07समय का SI मात्रक सेकंड है; प्रतीक 's' (न कि 'sec')। 60 s = 1 min और 60 min = 1 h। घंटे का सही प्रतीक 'h' है, 'hrs' नहीं।
  8. 08चाल = कुल तय दूरी ÷ कुल लिया गया समय; SI मात्रक m/s है; km/h में भी व्यक्त किया जा सकता है।
  9. 09कुल दूरी और कुल समय से प्राप्त चाल औसत चाल कहलाती है क्योंकि यात्रा के विभिन्न क्षणों में वस्तु अलग-अलग चाल से चल सकती है।
  10. 10एकसमान रैखिक गति में वस्तु सीधी रेखा में समान चाल से चलती है (समान समय में समान दूरी); असमान रैखिक गति में चाल बदलती रहती है।
प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

01

कक्षा 7 विज्ञान जिज्ञासा का अध्याय 8 किस बारे में है?

अध्याय 8 समय और गति के मापन के बारे में है। इसमें प्राचीन समय-मापन यंत्र (धूप-घड़ी, जल-घड़ी, रेत-घड़ी, मोमबत्ती-घड़ी), सरल लोलक और उसका दोलनकाल, समय का SI मात्रक, तथा चाल, औसत चाल और एकसमान एवं असमान रैखिक गति की अवधारणाएँ शामिल हैं।

02

घड़ियाँ आने से पहले समय मापने के लिए कौन-से प्राचीन यंत्र उपयोग किए जाते थे?

प्राचीन यंत्रों में धूप-घड़ी (किसी वस्तु की परछाई की बदलती स्थिति से समय), जल-घड़ी (पात्र से जल का बाहर या भीतर प्रवाह), रेत-घड़ी (एक बल्ब से दूसरे में रेत का प्रवाह) और मोमबत्ती-घड़ी (अंशांकित मोमबत्तियाँ जो जलने पर समय बताती थीं) शामिल थे।

03

घटिका-यंत्र क्या था और इसका उल्लेख पहली बार किसने किया?

घटिका-यंत्र भारत में प्रयोग की जाने वाली डूबने वाले कटोरे प्रकार की जल-घड़ी थी जिसका उल्लेख सर्वप्रथम आर्यभट्ट ने किया था। कटोरे में इस प्रकार छिद्र किया जाता था कि वह 24 मिनट में भरकर डूब जाता था — यह समय-इकाई 'घटी' कहलाती थी। एक दिन 60 समान घटियों में बाँटा जाता था।

04

सम्राट यंत्र क्या है और यह कहाँ स्थित है?

सम्राट यंत्र विश्व की सबसे बड़ी पत्थर की धूप-घड़ी है। इसे लगभग 300 वर्ष पहले राजस्थान के जयपुर में स्थित जंतर-मंतर (यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल) में बनाया गया था। इसकी 27 मीटर की प्रभावी ऊँचाई के कारण इसकी छाया प्रत्येक सेकंड में लगभग 1 मिलीमीटर सरकती है और 2 सेकंड तक की अल्पावधि माप सकती है।

05

लोलक घड़ी का आविष्कार किसने और कब किया?

लोलक घड़ी का आविष्कार 1656 में हुआ और इसे 1657 में क्रिश्चियन हाइगेन्स (1629-1695) ने पेटेंट किया। वे गैलीलियो गैलीली के लोलक अन्वेषणों से प्रेरित थे। गैलीलियो ने एक चर्च में झूलते हुए लैंप का अवलोकन करते हुए पाया कि प्रत्येक दोलन में समान समय लगता है।

06

सरल लोलक का दोलनकाल क्या होता है?

सरल लोलक का दोलनकाल वह समय है जो गोलक को एक पूर्ण दोलन पूरा करने में लगता है — माध्य स्थिति से एक चरम स्थिति तक, फिर दूसरी चरम स्थिति तक और वापस माध्य स्थिति पर। दोलनकाल लोलक की लंबाई पर निर्भर करता है, गोलक के द्रव्यमान पर नहीं।

07

क्या लोलक के गोलक का द्रव्यमान उसके दोलनकाल को प्रभावित करता है?

नहीं। सरल लोलक का दोलनकाल उसकी लंबाई पर निर्भर करता है, गोलक के द्रव्यमान पर नहीं। समान लंबाई पर अलग-अलग द्रव्यमान का गोलक लगाने से दोलनकाल नहीं बदलता।

08

समय का SI मात्रक क्या है और सही प्रतीक कौन-से हैं?

समय का SI मात्रक सेकंड है जिसका प्रतीक 's' है। बड़े मात्रक मिनट (प्रतीक 'min') और घंटा (प्रतीक 'h') हैं। 'sec' या 'hrs' लिखना अशुद्ध है। सभी मात्रक नाम और प्रतीक लोअरकेस में लिखे जाते हैं।

09

चाल की गणना कैसे की जाती है और इसका SI मात्रक क्या है?

चाल = कुल तय दूरी ÷ कुल लिया गया समय। चाल का SI मात्रक मीटर प्रति सेकंड (m/s) है। इसे किलोमीटर प्रति घंटा (km/h) में भी व्यक्त किया जा सकता है। इस प्रकार प्राप्त चाल औसत चाल होती है।

10

एकसमान और असमान रैखिक गति में क्या अंतर है?

एकसमान रैखिक गति में कोई वस्तु सीधी रेखा पर समान (अपरिवर्तित) चाल से चलती है और समान समयांतरालों में समान दूरी तय करती है। असमान रैखिक गति में चाल बदलती रहती है और सीधी रेखा पर समान समयांतरालों में असमान दूरियाँ तय होती हैं। वास्तविक जीवन में अधिकांश गतियाँ असमान होती हैं।

11

आधुनिक परमाणु घड़ियाँ प्रारंभिक लोलक घड़ियों से कितनी अधिक सटीक हैं?

प्रारंभिक लोलक घड़ियाँ (जैसे हाइगेन्स की पहली घड़ियाँ) प्रतिदिन 10 सेकंड तक आगे-पीछे हो जाती थीं। आधुनिक परमाणु घड़ियाँ इतनी सटीक हैं कि वे लाखों वर्षों में केवल एक सेकंड खोती हैं। क्वार्ट्ज घड़ियाँ क्वार्ट्ज क्रिस्टल के तीव्र कंपनों का उपयोग करती हैं जबकि परमाणु घड़ियाँ विशिष्ट परमाणुओं के कंपनों का।

12

क्या एनसीईआरटी कक्षा 7 विज्ञान अध्याय 8 की पीडीएफ निःशुल्क डाउनलोड के लिए उपलब्ध है?

हाँ, पीडीएफ ncerthindi.com पर निःशुल्क पढ़ी और डाउनलोड की जा सकती है। कोई पंजीकरण या खाता आवश्यक नहीं है।

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