अध्याय 11: प्रकाश: छाया एवं परावर्तन
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कक्षा 7 विज्ञान एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (जिज्ञासा) का अध्याय 11, "प्रकाश: छाया एवं परावर्तन", यह समझाता है कि प्रकाश सरल रेखा में गमन करता है, पारदर्शी-अपारदर्शी पदार्थ छाया कैसे बनाते हैं, और समतल दर्पण में परावर्तन, पार्श्व-प्रतिलोमन तथा सुरंगदर्शी (पेरिस्कोप) एवं बहुरूपदर्शी (कैलाइडोस्कोप) जैसे प्रकाशीय उपकरण कैसे काम करते हैं।
- प्रकाश के स्रोत और सरल रेखा में गमन — सूर्य, तारे, अग्नि और जुगनू जैसे दीप्त पिंड स्वयं प्रकाश उत्सर्जित करते हैं; चंद्रमा जैसे अदीप्त पिंड केवल परावर्तित प्रकाश से चमकते हैं। माचिस-छिद्र और मुड़े पाइप के क्रियाकलापों से सिद्ध होता है कि प्रकाश सरल रेखा में गमन करता है।
- पारदर्शिता और छाया निर्माण — पारदर्शी पदार्थ से प्रकाश पूरी तरह, पारभासी से आंशिक रूप से और अपारदर्शी से बिल्कुल नहीं गुजरता। छाया बनने के लिए तीन चीजें चाहिए: प्रकाश-स्रोत, अपारदर्शी वस्तु और पर्दा। वस्तु का रंग बदलने से छाया का रंग नहीं बदलता।
- समतल दर्पण में परावर्तन — समतल दर्पण में बना प्रतिबिंब वस्तु के समान आकार का, सीधा और पार्श्व-प्रतिलोमित (बायाँ-दाहिना उलटा) होता है तथा पर्दे पर नहीं मिलता। पार्श्व-प्रतिलोमन के कारण ही एम्बुलेंस पर 'AMBULANCE' दर्पण-लिपि में लिखा होता है।
- दर्पण-आधारित प्रकाशीय उपकरण — छिद्र-कैमरा (पिनहोल कैमरा) वस्तु का उलटा प्रतिबिंब बनाता है। सुरंगदर्शी (पेरिस्कोप) में Z-आकार में दो समतल दर्पण लगे होते हैं जो अवरोध के पार देखने में सहायता करते हैं। बहुरूपदर्शी (कैलाइडोस्कोप) में तीन दर्पण त्रिभुजाकार व्यवस्था में होते हैं जो बहुआयामी सुंदर प्रतिरूप बनाते हैं।
मुख्य बिंदु और सूत्र
- 01दीप्त पिंड स्वयं प्रकाश उत्सर्जित करते हैं (जैसे सूर्य, तारे, बिजली, जुगनू); अदीप्त पिंड जैसे चंद्रमा केवल परावर्तित प्रकाश से चमकते हैं।
- 02प्रकाश सरल रेखा में गमन करता है — माचिस-डिब्बी छिद्र क्रियाकलाप और मुड़े पाइप क्रियाकलाप से सिद्ध।
- 03पारदर्शी पदार्थ से प्रकाश लगभग पूरी तरह, पारभासी से आंशिक रूप से और अपारदर्शी से बिल्कुल नहीं गुजरता।
- 04छाया निर्माण के लिए तीन चीजें अनिवार्य हैं: प्रकाश-स्रोत, अपारदर्शी वस्तु और पर्दा।
- 05अपारदर्शी वस्तु गहरी छाया, पारभासी वस्तु हल्की छाया बनाती है; अपारदर्शी वस्तु का रंग बदलने से छाया का रंग नहीं बदलता।
- 06जब प्रकाश दर्पण पर पड़ता है तो उसकी दिशा में परिवर्तन को प्रकाश का परावर्तन कहते हैं।
- 07समतल दर्पण में प्रतिबिंब के गुण: वस्तु के समान आकार, सीधा, पार्श्व-प्रतिलोमित, और पर्दे पर नहीं मिलता; प्रतिबिंब दर्पण के उतनी ही दूरी पर पीछे दिखता है जितनी वस्तु आगे होती है।
- 08पार्श्व-प्रतिलोमन — दर्पण में बायाँ दाहिना और दाहिना बायाँ दिखता है; इसीलिए एम्बुलेंस पर 'AMBULANCE' दर्पण-लिपि में लिखा जाता है ताकि पीछे के वाहन-चालक अपने दर्पण में इसे सही पढ़ सकें।
- 09छिद्र-कैमरा (पिनहोल कैमरा) — एक सूक्ष्म छिद्र से गुजरा प्रकाश पर्दे पर वस्तु का उलटा प्रतिबिंब बनाता है; प्रतिबिंब वस्तु के रंग दर्शाता है।
- 10सुरंगदर्शी (पेरिस्कोप) — Z-आकार के डिब्बे में दो समतल दर्पण लगे होते हैं; पनडुब्बियों, टैंकों और सैनिकों द्वारा अवरोध के पार देखने के लिए उपयोग।
- 11बहुरूपदर्शी (कैलाइडोस्कोप) — तीन आयताकार समतल दर्पण त्रिभुजाकार व्यवस्था में; बहु-परावर्तन से विभिन्न सुंदर प्रतिरूप बनते हैं; डिजाइनर और कलाकार इससे प्रेरणा लेते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
01अध्याय 11 'प्रकाश: छाया एवं परावर्तन' किस विषय पर है?
यह अध्याय प्रकाश के स्रोत, सरल रेखा में गमन, अपारदर्शी वस्तुओं द्वारा छाया निर्माण और समतल दर्पण में परावर्तन के नियम समझाता है। साथ ही छिद्र-कैमरा, सुरंगदर्शी और बहुरूपदर्शी जैसे प्रकाशीय उपकरण बनाना भी सिखाता है।
02दीप्त और अदीप्त पिंडों में क्या अंतर है?
जो पिंड स्वयं अपना प्रकाश उत्सर्जित करते हैं वे दीप्त पिंड कहलाते हैं — जैसे सूर्य, तारे, बिजली, अग्नि और जुगनू। जो पिंड स्वयं प्रकाश उत्सर्जित नहीं करते वे अदीप्त पिंड कहलाते हैं। चंद्रमा एक अदीप्त पिंड है; यह सूर्य के प्रकाश को परावर्तित करके चमकता है।
03हम कैसे जानते हैं कि प्रकाश सरल रेखा में गमन करता है?
दो क्रियाकलाप इसे सिद्ध करते हैं। माचिस-डिब्बी छिद्र क्रियाकलाप में तीन डिब्बियों के छिद्र एक सीधी रेखा में होने पर ही पर्दे पर चमकीला बिंदु मिलता है; एक डिब्बी खिसकाने पर बिंदु गायब हो जाता है। मुड़े पाइप क्रियाकलाप में सीधे पाइप से मोमबत्ती की लौ दिखती है पर मुड़े पाइप से नहीं — क्योंकि प्रकाश सरल रेखा में गमन करता है।
04पारदर्शी, पारभासी और अपारदर्शी पदार्थों में क्या अंतर है?
पारदर्शी पदार्थों से प्रकाश लगभग पूरी तरह गुजर जाता है। पारभासी पदार्थों से प्रकाश आंशिक रूप से गुजरता है। अपारदर्शी पदार्थों से प्रकाश बिल्कुल नहीं गुजरता। इन्हीं अंतरों से तय होता है कि कोई वस्तु छाया बनाएगी या नहीं।
05छाया बनने के लिए क्या-क्या आवश्यक है?
छाया देखने के लिए तीन चीजें अनिवार्य हैं: प्रकाश-स्रोत, अपारदर्शी वस्तु और पर्दा। जब अपारदर्शी वस्तु प्रकाश को रोकती है तो पर्दे पर अंधेरा क्षेत्र बनता है — यही छाया है। दैनिक जीवन में दीवार, फर्श या कोई भी सतह पर्दे का काम करती है।
06क्या अपारदर्शी वस्तु का रंग बदलने से छाया का रंग बदलता है?
नहीं। अपारदर्शी वस्तु का रंग बदलने से छाया का रंग नहीं बदलता। छाया केवल वह अंधेरा क्षेत्र है जहाँ प्रकाश नहीं पहुँचता, इसलिए वस्तु के रंग से निरपेक्ष होकर छाया सदा गहरे रंग की होती है।
07समतल दर्पण में बने प्रतिबिंब के क्या गुण हैं?
समतल दर्पण में प्रतिबिंब वस्तु के समान आकार का, सीधा, पार्श्व-प्रतिलोमित (बायाँ-दाहिना उलटा) होता है और पर्दे पर नहीं मिलता। प्रतिबिंब दर्पण के उतनी ही दूरी पर पीछे दिखता है जितनी वस्तु दर्पण के सामने होती है।
08पार्श्व-प्रतिलोमन क्या है और एम्बुलेंस पर 'AMBULANCE' दर्पण-लिपि में क्यों लिखते हैं?
पार्श्व-प्रतिलोमन समतल दर्पण में बने प्रतिबिंब में बायाँ-दाहिना उलटना है — आपका बायाँ हाथ दर्पण में दाहिना और दाहिना बायाँ दिखता है। 'AMBULANCE' को एम्बुलेंस के सामने दर्पण-लिपि में इसलिए लिखा जाता है ताकि आगे के वाहन-चालक अपने पीछे के दर्पण में इसे सही पढ़ सकें और आपात वाहन को पहचान सकें।
09छिद्र-कैमरा कैसे काम करता है और यह कैसा प्रतिबिंब बनाता है?
छिद्र-कैमरा में वस्तु से आने वाली प्रकाश-किरणें एक सूक्ष्म छिद्र से गुजरकर पर्दे पर प्रतिबिंब बनाती हैं। यह प्रतिबिंब उलटा (ऊपर-नीचे) होता है। प्रतिबिंब वस्तु के रंग दर्शाता है। यह समतल दर्पण से अलग है जिसमें प्रतिबिंब सीधा पर पार्श्व-प्रतिलोमित होता है।
10सुरंगदर्शी (पेरिस्कोप) क्या है और यह कैसे काम करता है?
सुरंगदर्शी Z-आकार के डिब्बे में लगे दो समतल दर्पणों द्वारा बना होता है। दोनों दर्पणों पर परावर्तन के कारण वह व्यक्ति उन वस्तुओं को देख सकता है जो सीधे दिखाई नहीं देतीं। पनडुब्बियों, टैंकों और सैनिकों द्वारा अवरोध के पार देखने के लिए इसका उपयोग होता है।
11बहुरूपदर्शी (कैलाइडोस्कोप) में प्रतिरूप कैसे बनते हैं?
बहुरूपदर्शी में तीन आयताकार समतल दर्पण त्रिभुजाकार व्यवस्था में जोड़े जाते हैं। तीन दर्पणों के कारण प्रकाश का बहु-परावर्तन (परावर्तन का परावर्तन) होता है जिससे एक सिरे पर रखे रंगीन काँच-टुकड़ों के कई सुंदर प्रतिरूप दिखते हैं। बहुरूपदर्शी घुमाने पर प्रतिरूप बदलता रहता है; डिजाइनर और कलाकार इससे नए प्रतिरूपों की प्रेरणा लेते हैं।
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