अध्याय 2: अम्लीय, क्षारीय एवं उदासीन
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कक्षा 7 विज्ञान एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (जिज्ञासा) का अध्याय 2, "अम्लीय, क्षारीय एवं उदासीन", विद्यार्थियों को यह सिखाता है कि लिटमस, लाल गुलाब का अर्क, हल्दी और प्याज जैसे प्राकृतिक सूचकों का उपयोग करके पदार्थों की अम्लीय, क्षारीय या उदासीन प्रकृति की पहचान कैसे की जाए।
- तीन प्रकार के पदार्थ — अध्याय हमारे आस-पास के सभी पदार्थों को अम्लीय, क्षारीय और उदासीन — तीन वर्गों में बाँटता है। अम्लीय पदार्थ स्वाद में खट्टे होते हैं, क्षारीय पदार्थ छूने में चिकने और स्वाद में कड़वे होते हैं, जबकि उदासीन पदार्थ किसी भी सूचक को प्रभावित नहीं करते।
- सूचक — अदृश्य को दृश्य बनाने का साधन — सूचक वे पदार्थ हैं जो अम्लीय और क्षारीय विलयन में भिन्न-भिन्न रंग दर्शाते हैं। लिटमस लाइकेन से प्राप्त होता है; लाल गुलाब का अर्क अम्लीय में लाल और क्षारीय में हरा होता है; हल्दी-पत्र केवल क्षार की उपस्थिति में लाल होता है; प्याज एक घ्राणेन्द्रिय सूचक है जिसकी गंध बदल जाती है।
- उदासीनीकरण अभिक्रिया — जब अम्ल और क्षार उचित मात्रा में मिलते हैं तो उदासीनीकरण होता है: अम्ल + क्षार → लवण + जल + ऊष्मा। इसी कारण चींटी के काटने पर बेकिंग सोडा लगाने से दर्द कम होता है।
- दैनिक जीवन में अम्ल-क्षार — ये अवधारणाएँ जीवन से जुड़ी हैं — चींटी का डंक (फॉर्मिक अम्ल) बेकिंग सोडे से उदासीन करना, अम्लीय मृदा को चूने से और क्षारीय मृदा को जैव खाद से सुधारना, तथा औद्योगिक अपशिष्ट को नदियों में छोड़ने से पहले उदासीन करना।
मुख्य बिंदु और सूत्र
- 01अम्लीय पदार्थ नीले लिटमस पत्र को लाल कर देते हैं; क्षारीय पदार्थ लाल लिटमस पत्र को नीला कर देते हैं; उदासीन पदार्थ दोनों ही प्रकार के लिटमस को प्रभावित नहीं करते।
- 02लिटमस लाइकेन से प्राप्त एक प्राकृतिक पदार्थ है; यह नीले और लाल — दो रूपों में मिलता है तथा अम्ल-क्षार सूचक कहलाता है।
- 03अम्लीय पदार्थ (नींबू का रस, आँवले का रस, इमली का पानी, सिरका) स्वाद में खट्टे होते हैं; क्षारीय पदार्थ (बेकिंग सोडा, चूने का पानी) छूने पर चिकने होते हैं।
- 04लाल गुलाब का अर्क एक प्राकृतिक सूचक है — अम्लीय विलयन में लाल और क्षारीय विलयन में हरा होता है।
- 05हल्दी-पत्र क्षारीय विलयन में लाल हो जाता है, परंतु अम्लीय या उदासीन विलयन में रंग नहीं बदलता — इसलिए यह अम्लीय और उदासीन पदार्थों में अंतर नहीं कर सकता।
- 06घ्राणेन्द्रिय सूचक वे पदार्थ हैं जिनकी गंध अम्लीय या क्षारीय माध्यम में बदल जाती है; प्याज इसका उदाहरण है।
- 07उदासीनीकरण अभिक्रिया: अम्ल + क्षार → लवण + जल + ऊष्मा।
- 08चींटी के काटने पर त्वचा में फॉर्मिक अम्ल (एक अम्लीय द्रव) आ जाता है; नम बेकिंग सोडा लगाने से अम्ल उदासीन होकर दर्द कम होता है।
- 09अम्लीय मृदा को चूने (एक क्षार) से सुधारा जा सकता है; क्षारीय मृदा को जैव खाद और पत्तियों की खाद (जो अम्ल मुक्त करती है) से उदासीन किया जा सकता है।
- 10नींबू में सिट्रिक अम्ल; दही में लैक्टिक अम्ल; इमली में टार्टरिक अम्ल; सिरके में ऐसीटिक अम्ल होता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
01कक्षा 7 विज्ञान का अध्याय 2 किस बारे में है?
अध्याय 2 'अम्लीय, क्षारीय एवं उदासीन' पदार्थों की पहचान करना सिखाता है। इसमें लिटमस, लाल गुलाब का अर्क और हल्दी जैसे प्राकृतिक सूचकों का उपयोग और अम्ल-क्षार के मिलने पर होने वाली उदासीनीकरण अभिक्रिया समझाई गई है।
02अम्ल-क्षार सूचक क्या होता है?
अम्ल-क्षार सूचक वह पदार्थ है जो अम्लीय और क्षारीय विलयनों में भिन्न-भिन्न रंग दर्शाता है। लिटमस, लाल गुलाब का अर्क, लाल हिबिस्कस, बैंगनी पत्तागोभी, हल्दी और चुकंदर इसके प्राकृतिक उदाहरण हैं।
03लिटमस कहाँ से आता है और इसका उपयोग कैसे होता है?
लिटमस लाइकेन से प्राप्त एक प्राकृतिक पदार्थ है — लाइकेन एक कवक और शैवाल की सहजीविता से बनता है। यह विलयन और कागज-पट्टियों दोनों रूपों में मिलता है। नीला लिटमस अम्लीय पदार्थ में लाल और लाल लिटमस क्षारीय पदार्थ में नीला हो जाता है।
04लाल गुलाब का अर्क अम्लीय और क्षारीय विलयन में कौन-सा रंग दर्शाता है?
लाल गुलाब का अर्क अम्लीय विलयन में लाल और क्षारीय विलयन में हरे रंग में बदल जाता है। जो पदार्थ इसका रंग नहीं बदलते, वे उदासीन होते हैं।
05हल्दी-पत्र अम्लीय और उदासीन पदार्थों में अंतर क्यों नहीं कर सकता?
हल्दी-पत्र केवल क्षारीय विलयन में लाल होता है; अम्लीय और उदासीन — दोनों ही में इसका रंग नहीं बदलता। इसलिए यह अम्लीय और उदासीन में अंतर नहीं बता सकता, केवल क्षार की उपस्थिति पहचान सकता है।
06उदासीनीकरण अभिक्रिया क्या होती है?
जब अम्ल और क्षार पर्याप्त मात्रा में मिलते हैं तो उदासीनीकरण अभिक्रिया होती है — परिणामी विलयन न अम्लीय रहता है, न क्षारीय। उत्पाद हैं: लवण, जल और ऊष्मा। अम्ल + क्षार → लवण + जल + ऊष्मा।
07चींटी के काटने पर बेकिंग सोडा क्यों लगाया जाता है?
चींटी के काटने पर त्वचा में फॉर्मिक अम्ल (एक अम्लीय द्रव) आ जाता है। बेकिंग सोडा एक क्षार है। नम बेकिंग सोडा लगाने से यह फॉर्मिक अम्ल को उदासीन कर देता है और दर्द कम होता है।
08अम्लीय या क्षारीय मृदा को कैसे सुधारा जा सकता है?
यदि मृदा अधिक अम्लीय है तो उसे चूने (एक क्षार) से उदासीन किया जा सकता है। यदि मृदा क्षारीय है तो जैव खाद और पत्तियों की खाद मिलाई जाती है जो अम्ल मुक्त करती हैं और मृदा की क्षारीय प्रकृति को उदासीन करती हैं।
09घ्राणेन्द्रिय सूचक क्या होते हैं?
घ्राणेन्द्रिय सूचक वे पदार्थ हैं जिनकी गंध अम्लीय या क्षारीय माध्यम के संपर्क में आने पर बदल जाती है। प्याज इसका उदाहरण है — इससे भीगी कपड़े की पट्टियाँ बनाकर अम्लीय और क्षारीय नमूनों पर परखी जाती हैं।
10लाल गुलाब की पंखुड़ियों से प्राकृतिक सूचक कैसे बनाएँ?
गिरी हुई लाल गुलाब की पंखुड़ियाँ धोकर कूटें, काँच के पात्र में रखें और गरम पानी डालकर 5-10 मिनट ढककर रखें, फिर छान लें। यह रंगीन छनित (अर्क) अम्ल-क्षार सूचक के रूप में उपयोग किया जा सकता है।
11क्या कक्षा 7 विज्ञान अध्याय 2 का PDF निःशुल्क उपलब्ध है?
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