गणित • कक्षा 7

गणित (गणित प्रकाश)

NCERT पाठ्यपुस्तक8 अध्याय

अध्याय नोट्स

गणित (गणित प्रकाश) में आप क्या सीखेंगे

गणित (गणित प्रकाश) का त्वरित रिवीज़न मैप — हर अध्याय का मूल विचार और पाँच मुख्य बातें। पूरा NCERT PDF और विस्तृत नोट्स पढ़ने के लिए किसी भी अध्याय पर टैप करें।

01

हमारे आस-पास की बड़ी संख्याएँ

कक्षा 7 गणित एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (गणित प्रकाश) का अध्याय 1, "हमारे आस-पास की बड़ी संख्याएँ", लाख, करोड़, अरब जैसी बड़ी संख्याओं को पढ़ना, लिखना, तुलना करना, गोलाई करना और उनके साथ गणना करना — भारतीय तथा अमेरिकी दोनों पद्धतियों में — वास्तविक जीवन के संदर्भों और गुणन के प्रतिरूपों के माध्यम से सिखाता है।

  • 11 लाख = 1,00,000 (पाँच शून्य); भारतीय पद्धति में अल्पविराम का प्रतिरूप दाएँ से बाएँ 3-2-2... है।
  • 21 करोड़ = 1,00,00,000 (सात शून्य) = 100 लाख; 1 अरब = 100 करोड़ = 1,000,000,000 (अमेरिकी पद्धति में 1 बिलियन)।
  • 3लाख और करोड़ शब्दों का उपयोग भूटान, नेपाल, श्रीलंका, पाकिस्तान, बांग्लादेश, मालदीव, अफगानिस्तान और म्यांमार में भी होता है।
  • 4अमेरिकी/अंतर्राष्ट्रीय पद्धति में अल्पविराम 3-3-3-3 प्रतिरूप में लगते हैं — हजार, मिलियन, बिलियन।
  • 55 से गुणा = 2 से भाग × 10; 25 से गुणा = 4 से भाग × 100 — ये शॉर्टकट कठिन गुणन को सरल बनाते हैं।
02

अंकगणितीय व्यंजक

कक्षा 7 गणित एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (गणित प्रकाश) का अध्याय 2, "अंकगणितीय व्यंजक", संख्याओं और चार गणितीय संक्रियाओं से बने गणितीय वाक्यांशों को पढ़ना, लिखना, तुलना करना और मान निकालना — कोष्ठक, पदों की धारणा, तथा क्रमविनिमय, साहचर्य एवं वितरण गुणधर्मों के माध्यम से — सिखाता है।

  • 1अंकगणितीय व्यंजक: +, –, ×, ÷ संक्रियाओं और संख्याओं से बना गणितीय वाक्यांश; इसका मान '=' से लिखते हैं (जैसे 13 + 2 = 15)।
  • 2व्यंजकों की तुलना मानों के आधार पर =, < या > से होती है; प्रायः पूरी गणना किए बिना तर्क से तुलना संभव है।
  • 3कोष्ठक: कोष्ठक के अंदर की संक्रिया पहले करें (जैसे 30 + (5×4) = 50, न कि 140)।
  • 4पद: व्यंजक के वे भाग जो '+' चिह्न से अलग होते हैं; सभी घटाव को ऋणात्मक संख्याओं के योग में बदलकर पद पहचाने जाते हैं।
  • 5क्रमविनिमय गुणधर्म: पद1 + पद2 = पद2 + पद1 — यह ऋणात्मक संख्याओं पर भी लागू होता है।
03

बिंदु से परे एक दृष्टि

कक्षा 7 गणित एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (गणित प्रकाश) का अध्याय 3, "बिंदु से परे एक दृष्टि", भारतीय स्थानीय मान प्रणाली को दशमलव की ओर विस्तारित करके दशांश, शतांश और सहस्त्रांश का परिचय देता है — इन्हें पढ़ना, लिखना, तुलना करना, संख्या रेखा पर रखना और जोड़-घटाव करना सिखाता है।

  • 1एक इकाई को 10 बराबर दशांश भागों में बाँटा जा सकता है; प्रत्येक दशांश को 10 शतांश भागों में — अर्थात एक इकाई में 100 शतांश होते हैं।
  • 2दशमलव प्रणाली 10 पर आधारित है ('decem' = लैटिन में दस, संस्कृत 'दशा' का समकक्ष) — प्रत्येक स्थान अपने बाएँ वाले से 10 गुना छोटा है।
  • 3दशमलव बिंदु (.) पूर्णांक भाग और भिन्नात्मक भाग को अलग करता है; बिंदु के दाईं ओर क्रमशः दशांश, शतांश, सहस्त्रांश होते हैं।
  • 4दशमलव के दाईं ओर शून्य जोड़ने से मान नहीं बदलता: 0.2 = 0.20 = 0.200। किंतु 0.2, 0.02 और 0.002 भिन्न-भिन्न मान हैं।
  • 5दशमलव संख्याओं की तुलना सबसे बड़े स्थान से शुरू करके अंक-दर-अंक होती है।
04

अक्षर-संख्याओं के उपयोगी व्यंजक

कक्षा 7 गणित एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (गणित प्रकाश) का अध्याय 4, "अक्षर-संख्याओं के उपयोगी व्यंजक", बीजगणितीय व्यंजकों का परिचय देता है — जिसमें अक्षर-संख्याएँ (letters as numbers) अज्ञात या परिवर्तनशील मात्राओं का प्रतिनिधित्व करती हैं और सामान्य संबंधों व प्रतिरूपों को संक्षिप्त सूत्रों के रूप में व्यक्त किया जाता है।

  • 1अक्षर-संख्याएँ: अज्ञात या परिवर्तनशील संख्याओं को दर्शाने वाले अक्षर (जैसे a, n, x); इनयुक्त व्यंजक बीजगणितीय व्यंजक कहलाते हैं।
  • 2गुणन चिह्न हटाना: 4 × n को 4n लिखा जाता है — संख्या पहले, फिर अक्षर।
  • 3मान निकालना: अक्षर को संख्या से प्रतिस्थापित करने पर व्यंजक का मान मिलता है (जैसे a+3 में a=23 रखने पर मान 26)।
  • 4सूत्र: बीजगणितीय व्यंजकों से व्यक्त गणितीय संबंध सूत्र कहलाते हैं (जैसे q भुजा वाले वर्ग का परिमाप 4q)।
  • 5सजातीय पद: एक ही अक्षर-संख्याओं वाले पद (जैसे 5c, 3c, 10c); वितरण गुणधर्म से जोड़े जाते हैं: 5c+3c+10c = 18c।
05

समांतर और प्रतिच्छेदी रेखाएँ

कक्षा 7 गणित एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (गणित प्रकाश) का अध्याय 5, "समांतर और प्रतिच्छेदी रेखाएँ", समतल सतह पर रेखाओं के बीच संबंध — शीर्षाभिमुख कोण, रैखिक युग्म, लम्ब रेखाएँ, समांतर रेखाएँ और तिर्यक रेखा द्वारा बनने वाले संगत, एकांतर तथा अंतःकोणों — का अन्वेषण करता है।

  • 1जब दो रेखाएँ प्रतिच्छेद करती हैं तो शीर्षाभिमुख कोण समान होते हैं; यह तर्क-आधारित निष्कर्ष गणित में उपपत्ति कहलाता है।
  • 2रैखिक युग्म के दो आसन्न कोणों का योग सदैव 180° होता है।
  • 3जब दो प्रतिच्छेदी रेखाएँ सभी चारों 90° के कोण बनाती हैं तो वे परस्पर लम्ब कहलाती हैं; आरेखों में समकोण को छोटे वर्ग से चिह्नित किया जाता है।
  • 4समतल पर दो रेखाएँ जो कभी प्रतिच्छेद नहीं करतीं, समांतर रेखाएँ हैं; आरेखों में एक सेट को एकल तीर (>) और दूसरे सेट को दो तीरों से दर्शाते हैं।
  • 5तिर्यक रेखा दो अन्य रेखाओं को काटती है और प्रत्येक प्रतिच्छेद बिंदु पर 4 कोण बनाती है — कुल 8 कोण।
06

संख्याओं का खेल

कक्षा 7 गणित एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (गणित प्रकाश) का अध्याय 6, "संख्याओं का खेल", संख्याओं की समानता (सम-विषम), जादुई वर्ग, विरहांक-फिबोनाची अनुक्रम तथा क्रिप्टारिथमेटिक पहेलियों के माध्यम से गणितीय तर्क-क्षमता को पहेलियों और गतिविधियों से विकसित करता है।

  • 1सम संख्या को युग्मों में व्यवस्थित किया जा सकता है; विषम संख्या युग्मों के संग्रह से एक अधिक होती है।
  • 2किसी भी कितनी भी सम संख्याओं का योग सदैव सम होता है।
  • 3दो विषम संख्याओं का योग सदैव सम होता है; विषम गिनती की विषम संख्याओं का योग विषम होता है।
  • 4किन्हीं 5 विषम संख्याओं का योग कभी भी 30 (सम संख्या) नहीं हो सकता — यह समानता तर्क का व्यावहारिक उदाहरण है।
  • 5nवीं सम संख्या का सूत्र 2n है; nवीं विषम संख्या का सूत्र 2n − 1 है।
07

तीन प्रतिच्छेदी रेखाओं की एक कथा

कक्षा 7 गणित एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (गणित प्रकाश) का अध्याय 7, "तीन प्रतिच्छेदी रेखाओं की एक कथा", परकार और मापक से त्रिभुजों की रचना, त्रिभुज असमिका, त्रिभुज के कोणों का योग (सदैव 180°) तथा भुजाओं और कोणों के आधार पर त्रिभुजों का वर्गीकरण सिखाता है।

  • 1समबाहु त्रिभुज में तीनों भुजाएँ समान होती हैं; परकार से दोनों सिरों से समान त्रिज्या के चाप खींचकर तीसरा शीर्ष C पाया जाता है।
  • 2किन्हीं तीन दी हुई भुजाओं वाले त्रिभुज की रचना: एक भुजा आधार मानें, दोनों सिरों से शेष दो त्रिज्याओं के चाप खींचें — प्रतिच्छेद बिंदु तीसरा शीर्ष है।
  • 3त्रिभुज असमिका: प्रत्येक भुजा अन्य दो के योग से कम होनी चाहिए; 10, 15, 30 इस परीक्षण में असफल होते हैं (30 > 10+15)।
  • 4दीर्घतम भुजा को आधार मानकर दोनों सिरों से छोटी-छोटी दो त्रिज्याओं के वृत्त खींचने पर — यदि असमिका पूरी होती है — वृत्त आंतरिक रूप से दो बिंदुओं पर मिलते हैं।
  • 5SAS (दो भुजाएँ और अंतर्गत कोण): एक भुजा आधार बनाएँ, एक सिरे पर दिया हुआ कोण बनाएँ, उस भुजा पर दूसरी भुजा की लंबाई अंकित करें, दोनों सिरे जोड़ें।
08

भिन्नों के साथ कार्य करना

कक्षा 7 गणित एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (गणित प्रकाश) का अध्याय 8, "भिन्नों के साथ कार्य करना", भिन्नों का गुणन (भिन्न × पूर्ण संख्या, भिन्न × भिन्न) और विभाजन व्युत्क्रम के माध्यम से करना, तथा गुणनफल और भागफल का मूल संख्याओं से आकार-तुलना सिखाता है।

  • 1भिन्न × पूर्ण संख्या: अंश को पूर्ण संख्या से गुणा करें, हर अपरिवर्तित रहे — जैसे 3 × (1/4) = 3/4।
  • 2पूर्ण संख्या × भिन्न: पहले पूर्ण संख्या को भाजक (हर) से विभाजित करें, फिर परिणाम को अंश से गुणा करें।
  • 3ब्रह्मगुप्त का सूत्र (628 ईसवी): (a/b) × (c/d) = (a×c)/(b×d) — अंश × अंश, हर × हर।
  • 4भिन्नात्मक भुजाओं वाले आयत का क्षेत्रफल उन भिन्नात्मक भुजाओं के गुणनफल के बराबर है।
  • 5गुणा से पहले उभयनिष्ठ गुणनखंड काटना (अपवर्तन): अंश और हर को उभयनिष्ठ गुणनखंड से विभाजित करें — उमास्वाति ने 150 ईसा पूर्व इसका उल्लेख किया था।