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अवलोकन

सारांश

कक्षा 3 गणित एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (गणित मेला) का अध्याय 4, "नानी माँ के साथ", चिराग और नंदिनी की नानी माँ से मिलने की कहानी के ज़रिए कंचे छुपाना, बालूशाही बाँटना, डाक-टिकट जमा करना, मूली-सेब तोड़ना जैसी रोज़मर्रा की परिस्थितियों से 200 तक की संख्याओं का जोड़-घटाव सिखाता है — संख्या-रेखा, गिनलड़ी, बंडलों-लकड़ियों, बॉक्स-आरेख और 1–100 संख्या-जाल से — तथा अनुमान, 5, 6, 9 और 10 से क्रमानुसार गिनती और जादुई-वर्ग पहेलियाँ भी सिखाता है।

  • जोड़-घटाव के अनेक तरीकेबच्चे एक ही सवाल को कम-से-कम चार तरीकों से हल करते हैं: संख्या-रेखा पर कूद, बंडलों-लकड़ियों (स्थानमान प्रतिरूप), गिनलड़ी और बॉक्स-आरेख। जैसे 25 + 36, 85 + 67 और 52 – 37 — एक ही सवाल को कई ढंग से सुलझाने की आदत बनती है।
  • संख्या-रेखा और क्रमानुसार गिनतीसंख्या-रेखा पर 10-10 और 1-1 की छलाँग लगाकर जोड़-घटाव किया जाता है। क्रमानुसार गिनती की गतिविधियों में मेंढक और टिड्डा 5, 6, 9 और 10 की छलाँग लगाते हैं और बच्चे 1–100 जाल में प्रतिरूप खोजते हैं।
  • अनुमानहर सवाल हल करने से पहले बच्चे अनुमान लगाते हैं — जैसे 25 + 36 मूलियाँ जोड़ने से पहले, या यह तय करने से पहले कि उत्तर 100 से अधिक होगा या कम। इससे परिणाम के साथ-साथ संख्या-बोध भी विकसित होता है।
  • जादुई वर्ग और संख्या-पहेलियाँनानी माँ 1 से 9 की संख्याओं वाले जादुई वर्ग की पहेलियाँ दिखाती हैं जिनमें हर पंक्ति, स्तंभ और विकर्ण का योग बराबर होता है। बच्चे खाली स्थान भरकर यह प्रतिरूप खोजते हैं, जिससे जोड़ का अभ्यास खेल जैसा लगता है।
मुख्य बातें

मुख्य बिंदु और सूत्र

  1. 01जोड़-घटाव का अभ्यास 200 तक की संख्याओं के साथ असली कहानियों में होता है — बालूशाही मिठाई, डाक-टिकट, मूलियाँ और सेब।
  2. 02बच्चे चार तरीकों का उपयोग करते हैं: संख्या-रेखा, गिनलड़ी, बंडलों-लकड़ियाँ और बॉक्स-आरेख।
  3. 03छुपे कंचों का जादू-खेल 'कुल ज्ञात हो तो अज्ञात भाग कैसे पता करें' — यही घटाव का मूल विचार है — सिखाता है।
  4. 04मेंढक और टिड्डा 1–100 के जाल पर 5, 6, 9 और 10 की छलाँग लगाते हैं — क्रमानुसार गिनती का अभ्यास होता है।
  5. 05हर सवाल से पहले अनुमान लगाना अनिवार्य है — पहले अनुमान, फिर सही हिसाब।
  6. 061–9 की संख्याओं का जादुई वर्ग दिखाता है कि पंक्ति, स्तंभ या विकर्ण — हर दिशा का योग एक समान होता है।
  7. 07रोज़मर्रा की कहानियों पर आधारित शब्द-सवाल — किताबें बिकना, क्रिकेट में रन, बगीचे के पौधे — बच्चों को स्वयं जोड़ या घटाव चुनने और अपने सवाल बनाने के लिए प्रेरित करते हैं।
प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

01

कक्षा 3 गणित मेला अध्याय 4 'नानी माँ के साथ' किस बारे में है?

यह अध्याय चिराग और नंदिनी की नानी माँ से मिलने की कहानी पर आधारित है। बीज छुपाना, मिठाई बाँटना, डाक-टिकट जमा करना, मूलियाँ और सेब तोड़ना — इन गतिविधियों के ज़रिए 200 तक का जोड़-घटाव सिखाया जाता है।

02

यह अध्याय जोड़-घटाव सिखाने के लिए कौन-कौन से साधन उपयोग करता है?

चार मुख्य साधन हैं: संख्या-रेखा (छलाँग लगाकर), गिनलड़ी (मनके आधारित गिनती साधन), बंडलों-लकड़ियाँ (दहाई-इकाई प्रतिरूप) और बॉक्स-आरेख (दोनों संख्याएँ साथ-साथ दिखाना)। बच्चों को एक ही सवाल एक से अधिक तरीके से हल करने के लिए कहा जाता है।

03

छुपे कंचों का जादू-खेल क्या सिखाता है?

नानी माँ रूमाल से कुछ कंचे छुपाती हैं और बच्चों से पूछती हैं कि जब कुल संख्या पता हो तो छुपे कंचे कितने हैं। यह घटाव का मज़ेदार परिचय है — जब कुल और एक भाग पता हो तो अज्ञात भाग ढूँढना।

04

इस अध्याय में बच्चे कौन-सी संख्याएँ जोड़ते-घटाते हैं?

अध्याय छोटी संख्याओं जैसे 7 + 5 (बालूशाही) से शुरू होकर 25 + 36 (मूलियाँ), 22 + 30 (डाक-टिकट), 85 + 67 (सेब) और 100 को पार करने वाले सवाल जैसे 150 – 49 तक पहुँचता है।

05

संख्या-जाल का खेल कैसे काम करता है?

दो खिलाड़ी दो पासे फेंककर दो अंकों की संख्या बनाते हैं और 1–100 के जाल में अपना मोहरा उतना आगे या पीछे करते हैं। 91 से 100 के बीच पहले पहुँचने वाला जीतता है — इससे जोड़-घटाव एक बोर्ड-खेल जैसा लगता है।

06

क्रमानुसार गिनती क्या है और इस अध्याय में इसका अभ्यास कैसे होता है?

क्रमानुसार गिनती यानी किसी संख्या से एक ही मात्रा में बार-बार आगे बढ़ना। इस अध्याय में मेंढक और टिड्डा संख्या-रेखा पर 10-10 की छलाँग लगाते हैं और बच्चे 5, 6 या 9 की छलाँग वाली तालिकाएँ भरते हैं।

07

जादुई वर्ग की पहेलियाँ क्या हैं?

जादुई वर्ग 3×3 की जाली है जिसमें 1 से 9 की संख्याएँ इस तरह भरी जाती हैं कि हर पंक्ति, स्तंभ और विकर्ण का योग एक समान हो। नानी माँ ये पहेलियाँ अखबार में ढूँढती हैं और बच्चे खाली स्थान भरकर वर्ग पूरा करते हैं।

08

अनुमान से पहले सवाल हल क्यों नहीं करते?

अनुमान से संख्या-बोध बनता है — उत्तर कितना बड़ा होना चाहिए, इसका अहसास पहले होना चाहिए। जैसे 85 और 67 जोड़ने से पहले नानी माँ बताती हैं कि 80 + 20 = 100 है, इसलिए उत्तर 100 से अधिक होगा — इससे बच्चे अपनी गलतियाँ स्वयं पकड़ सकते हैं।

09

इस अध्याय में कौन-से शब्द-सवाल आते हैं?

शब्द-सवाल रोज़मर्रा की ज़िंदगी से हैं: दो दिन किताबें बेचने वाला दुकानदार, दोपहर से पहले और बाद में क्रिकेट के रन, कैंटीन में वड़े गिनना और बाग में पौधे नष्ट होना। बच्चों को खुद तय करना होता है कि जोड़ना है या घटाना।

10

गिनलड़ी जोड़-घटाव में कैसे मदद करती है?

गिनलड़ी मनकों का एक साधन है जिसमें मनके समूहों में खिसकाकर जोड़-घटाव किया जाता है। जैसे 34 + 6 या 42 – 15 के लिए बच्चे सुविधाजनक टुकड़ों में (+10, फिर –1) मनके खिसकाते हैं — इससे मानसिक गणित की रणनीतियाँ बनती हैं।

11

अध्याय 4 में कौन-कौन से खेल हैं?

तीन खेल हैं: पत्ता-खेल में खिलाड़ी तीन ऐसे पत्ते इकट्ठे करते हैं जो एक जोड़-घटाव वाक्य बनाएँ; संख्या-जाल खेल में पासे और 1–100 जाल का उपयोग होता है; और '100 की दौड़' में दोनों खिलाड़ी बारी-बारी 1 से 10 के बीच संख्याएँ जोड़ते हैं — जो पहले 100 पर पहुँचे वह जीता।

12

इस अध्याय में चिराग और नंदिनी कौन हैं?

चिराग और नंदिनी दो बच्चे हैं जो अपनी नानी माँ से बहुत प्यार करते हैं। पूरा अध्याय उनकी नानी माँ के साथ छुट्टियों पर आधारित है — डाक-टिकट जमा करना, सेब तोड़ना और अखबार की पहेलियाँ सुलझाना — यही गणित के सवालों का आधार बनता है।

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