गणित पर वापस
अवलोकन

सारांश

कक्षा 12 गणित एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक का अध्याय 13, "प्रायिकता", सप्रतिबंध प्रायिकता, गुणन नियम, स्वतंत्र घटनाएँ, बेज़ प्रमेय और पूर्ण प्रायिकता प्रमेय को सम्मिलित करता है — A.N. कोल्मोगोरव (1903–1987) द्वारा प्रस्तुत स्वयंसिद्धात्मक दृष्टिकोण के आधार पर।

  • दी गई सूचना के आधार पर प्रायिकताअध्याय का आरंभिक बिंदु सप्रतिबंध प्रायिकता है — किसी घटना की संभावना तब कैसे बदलती है जब यह ज्ञात हो कि कोई अन्य घटना घटित हो चुकी है — जो प्रभावी रूप से प्रतिदर्श समष्टि को संकुचित करती है और स्वाभाविक रूप से संयुक्त घटनाओं के गुणन नियम की ओर ले जाती है।
  • घटनाओं की स्वतंत्रताअध्याय घटनाओं को स्वतंत्र परिभाषित करता है जब एक के घटित होने से दूसरे के बारे में कोई जानकारी नहीं मिलती, और एक सूक्ष्म निष्कर्ष निकालता है: अशून्य प्रायिकता वाली स्वतंत्र घटनाएँ कभी परस्पर अपवर्जी नहीं हो सकतीं — इससे विद्यार्थियों की घटनाओं के अंतःक्रिया की समझ और गहरी होती है।
  • पूर्ण प्रायिकता और बेज़ प्रमेयप्रतिदर्श समष्टि को विभाजित करके पूर्ण प्रायिकता प्रमेय किसी घटना की प्रायिकता उसके भागों से संयोजित करता है, और बेज़ प्रमेय तर्क को उलटकर पूर्व-प्रायिकता (prior) को उत्तर-प्रायिकता (posterior) में अद्यतन करता है — कलश समस्याओं, चिकित्सा परीक्षण और दोष-पहचान में अनुप्रयुक्त।
मुख्य बातें

मुख्य बिंदु और सूत्र

  1. 01सप्रतिबंध प्रायिकता P(E|F) = P(E∩F)/P(F) परिभाषित है जब P(F) ≠ 0; यह प्रभावी प्रतिदर्श समष्टि को F के अनुकूल परिणामों तक सीमित कर देती है।
  2. 02गुणन नियम P(E∩F) = P(E)·P(F|E) = P(F)·P(E|F) कहता है; यह तीन या अधिक घटनाओं तक विस्तृत होता है।
  3. 03दो घटनाएँ E और F स्वतंत्र हैं यदि P(E∩F) = P(E)·P(F); अशून्य प्रायिकता वाली स्वतंत्र घटनाएँ परस्पर अपवर्जी नहीं हो सकतीं।
  4. 04पूर्ण प्रायिकता प्रमेय कहता है कि प्रतिदर्श समष्टि S के विभाजन {E1, E2, …, En} के लिए P(A) = Σ P(Ej)·P(A|Ej)।
  5. 05बेज़ प्रमेय P(Ei|A) = P(Ei)·P(A|Ei) / Σ P(Ej)·P(A|Ej) देता है, जो पूर्व-प्रायिकता और संभावना से व्युत्क्रम (उत्तर) प्रायिकताओं का परिकलन करता है।
  6. 06प्रमुख ऐतिहासिक योगदान: पास्कल और फर्मा (1654 पत्र-व्यवहार — प्रायिकता सिद्धांत की नींव), जैकब बर्नूली (द्विपद बंटन), और A.N. कोल्मोगोरव (स्वयंसिद्धात्मक सिद्धांत, 1933)।
प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

01

सप्रतिबंध प्रायिकता क्या है और कक्षा 12 गणित अध्याय 13 में इसकी गणना कैसे की जाती है?

सप्रतिबंध प्रायिकता P(E|F) वह प्रायिकता है कि घटना E घटित हो, यह जानते हुए कि घटना F पहले ही घटित हो चुकी है। इसकी गणना P(E|F) = P(E∩F)/P(F) से होती है, बशर्ते P(F) ≠ 0। उदाहरण के लिए, यदि P(E∩F) = 4/13 और P(F) = 9/13 हो, तो P(E|F) = 4/9।

02

अध्याय 13 में स्वतंत्र घटनाओं और परस्पर अपवर्जी घटनाओं में क्या अंतर है?

स्वतंत्र घटनाएँ प्रायिकता के पदों में परिभाषित हैं: E और F स्वतंत्र हैं यदि P(E∩F) = P(E)·P(F)। परस्पर अपवर्जी घटनाओं का कोई उभयनिष्ठ परिणाम नहीं होता, अतः P(E∩F) = 0। महत्त्वपूर्ण बात यह है कि अशून्य प्रायिकता वाली दो घटनाएँ एक साथ स्वतंत्र और परस्पर अपवर्जी नहीं हो सकतीं।

03

बेज़ प्रमेय कैसे काम करता है और इसका उपयोग किस लिए होता है?

बेज़ प्रमेय उत्तर-प्रायिकता P(Ei|A) = P(Ei)·P(A|Ei) / Σ P(Ej)·P(A|Ej) परिकलित करता है। यह सप्रतिबंध प्रायिकता की दिशा को उलट देता है — किसी परिणाम A के घटित होने पर यह ज्ञात करता है कि वह किसी विशेष कारण Ei से आने की प्रायिकता क्या है। अध्याय में इसे दोषपूर्ण बोल्ट किस मशीन ने बनाया यह ज्ञात करने और HIV-पॉजिटिव परीक्षण की वास्तविक प्रायिकता अनुमान लगाने जैसी समस्याओं पर प्रयुक्त किया गया है।

04

क्या एनसीईआरटी कक्षा 12 गणित अध्याय 13 की PDF निःशुल्क डाउनलोड की जा सकती है?

हाँ, एनसीईआरटी कक्षा 12 गणित भाग II अध्याय 13 की PDF ncerthindi.com पर पूरी तरह निःशुल्क डाउनलोड की जा सकती है।

Keep learning

More chapters in गणित

गणित कक्षा 12 गणित की NCERT पाठ्यपुस्तक (2026-27 संस्करण) — का अध्याय 13 ऑनलाइन मुफ़्त पढ़ें: NCERT द्वारा प्रकाशित पूरा अध्याय, हर चित्र, हल किए गए उदाहरण और अभ्यास के साथ, चरण-दर-चरण समाधान, उत्तर और रिवीजन नोट्स के साथ। ऊपर दी गई NCERT PDF खोलें, या सभी NCERT कक्षा 12 पाठ्यपुस्तकें देखें।