सारांश
कक्षा 11 जीव विज्ञान एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक का अध्याय 2, "जीव जगत का वर्गीकरण", कोशिका संरचना, शरीर संगठन, पोषण की विधि और विकासवादी संबंधों के आधार पर जीवों को जगतों, संघों तथा अन्य समूहों में व्यवस्थित करने की वैज्ञानिक प्रणाली को स्पष्ट करता है — R.H. ह्विटेकर की पाँच-जगत प्रणाली जो समस्त जीव-जगत को मोनेरा, प्रोटिस्टा, कवक, पादप और जंतु में विभाजित करती है।
- वर्गीकरण प्रणालियों का विकास — अध्याय बताता है कि कैसे वर्गीकरण अरस्तू की आकारिकी-आधारित समूहबद्धता से लिनियस की दो-जगत योजना होते हुए ह्विटेकर की पाँच जगतों तक परिपक्व हुआ, क्योंकि पूर्व की प्रणालियाँ कोशिका प्रकार, पोषण और विकासवादी संबंधों को एक साथ समाहित नहीं कर पाती थीं।
- पाँच जगतों का तर्क — केवल समूहों को नाम देने के बजाय अध्याय दिखाता है कि कुछ साझी कसौटियाँ — प्रोकैरियोटिक बनाम यूकैरियोटिक कोशिकाएँ, एककोशिकीय बनाम बहुकोशिकीय शरीर, और पोषण की विधि — समस्त जीव-जगत को मोनेरा, प्रोटिस्टा, कवक, पादप और जंतु में वर्गीकृत करती हैं।
- जगतों से परे के जीव — अध्याय सिखाता है कि कुछ सत्ताएँ इस ढाँचे को चुनौती देती हैं: विषाणु (viruses), विरोइड (viroids) और प्रिऑन (prions) अकोशिकीय कारक हैं, जबकि लाइकेन एक सहयोगी साझेदारी है — यह दर्शाता है कि वर्गीकरण की सीमाएँ धुंधली हैं जहाँ 'सजीव' को परिभाषित करना भी कठिन है।
मुख्य बिंदु और सूत्र
- 01ह्विटेकर की पाँच-जगत प्रणाली जीवों को कोशिका प्रकार, शरीर संगठन, पोषण की विधि और विकासवादी संबंधों के आधार पर वर्गीकृत करती है
- 02जगत मोनेरा में जीवाणु (प्रोकैरियोटिक जीव) सम्मिलित हैं, जिनमें चरम आवासों में पाए जाने वाले आर्कीबैक्टीरिया और विविध उपापचयी क्षमताओं वाले यूबैक्टीरिया शामिल हैं
- 03जगत प्रोटिस्टा में एककोशिकीय यूकैरियोट्स सम्मिलित हैं, जैसे डायटम, डाइनोफ्लैजिलेट, युग्लीनॉइड, श्लेष्म कवक और प्रोटोज़ोआ, जो मुख्यतः जलीय वातावरण में निवास करते हैं
- 04जगत कवक में काइटिनी कोशिका भित्ति वाले विषमपोषी जीव सम्मिलित हैं, जिन्हें बीजाणु निर्माण और फलनकाय के आधार पर फाइकोमाइसीट्स, एस्कोमाइसीट्स, बेसिडिओमाइसीट्स और ड्यूटेरोमाइसीट्स में वर्गीकृत किया गया है
- 05जगत पादप में क्लोरोफिल युक्त यूकैरियोटिक जीव सम्मिलित हैं, जिनमें शैवाल, ब्रायोफाइट, टेरिडोफाइट, अनावृतबीजी और आवृतबीजी शामिल हैं, और इनमें युग्मकोद्भिद् व बीजाणुद्भिद् पीढ़ियों का एकांतरण होता है
- 06विषाणु (viruses) अकोशिकीय अनिवार्य परजीवी हैं जिनमें RNA अथवा DNA (दोनों नहीं) प्रोटीन कैप्सिड से घिरा होता है; विरोइड प्रोटीन आवरण रहित स्वतंत्र RNA हैं; और लाइकेन शैवाल तथा कवक का सहजीवी संघ है
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
01पाँच-जगत वर्गीकरण प्रणाली में कौन-से मुख्य मानदंड उपयोग किए जाते हैं?
पाँच-जगत वर्गीकरण प्रणाली में कोशिका संरचना (प्रोकैरियोटिक बनाम यूकैरियोटिक), शरीर संगठन (एककोशिकीय बनाम बहुकोशिकीय), पोषण की विधि (स्वपोषी बनाम विषमपोषी), जनन विधियाँ और वंशानुगत (विकासवादी) संबंध मुख्य वर्गीकरण मानदंड हैं।
02जगत मोनेरा और जगत प्रोटिस्टा में क्या अंतर है?
जगत मोनेरा में प्रोकैरियोटिक जीव (झिल्ली-आबद्ध केंद्रक रहित जीवाणु) सम्मिलित हैं, जबकि जगत प्रोटिस्टा में यूकैरियोटिक जीव (झिल्ली-आबद्ध केंद्रक और कोशिकांगों सहित) सम्मिलित हैं। दोनों मुख्यतः एककोशिकीय हैं, किंतु प्रोटिस्ट अपनी यूकैरियोटिक प्रकृति के कारण संरचनात्मक रूप से अधिक जटिल होते हैं।
03कवक अपना भोजन कैसे प्राप्त करते हैं और जनन कैसे करते हैं?
अधिकांश कवक मृतजीवी (saprophytes) होते हैं जो मृत पदार्थों से घुलनशील कार्बनिक पदार्थ अवशोषित करते हैं। ये अलैंगिक जनन बीजाणुओं (कोनिडिया, स्पोरेंजियोस्पोर या जूस्पोर) द्वारा और लैंगिक जनन एक प्रक्रिया के माध्यम से करते हैं जिसमें प्लाज्मोगैमी (जीवद्रव्य का संलयन), कैरियोगैमी (केंद्रकों का संलयन) और अर्धसूत्री विभाजन द्वारा अगुणित बीजाणु बनते हैं।
04क्या कक्षा 11 जीव विज्ञान अध्याय 2 की एनसीईआरटी पीडीएफ मुफ्त में डाउनलोड होती है?
हाँ, कक्षा 11 जीव विज्ञान अध्याय 2 की एनसीईआरटी पीडीएफ मुफ्त में डाउनलोड होती है। एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तकें राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद द्वारा सभी छात्रों के लिए मुक्त शैक्षिक संसाधन के रूप में प्रकाशित की जाती हैं।
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