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अवलोकन

सारांश

कक्षा 11 जीव विज्ञान एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक का अध्याय 4, "प्राणि जगत", इस विषय की व्याख्या करता है। प्राणि जगत का वर्गीकरण दस लाख से अधिक जंतु प्रजातियों को शारीरिक संगठन स्तर, सममिति, प्रगुहा की उपस्थिति और खंडीभवन जैसी मूलभूत विशेषताओं के आधार पर संगठित करता है; इसमें 11 प्रमुख संघ (Phyla) हैं जो साधारण स्पंजों से लेकर पृष्ठरज्जु (notochord) युक्त जटिल रज्जुकियों (Chordates) तक फैले हैं।

  • दिखावट से परे साझी विशेषताएँअध्याय यह सिखाता है कि जंतुओं को उनके रूप-रंग से नहीं, बल्कि गहरी शारीरिक संरचनाओं — संगठन स्तर, सममिति, प्रगुहा, खंडीभवन और पृष्ठरज्जु — के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है, ताकि नई प्रजातियों को भी क्रमबद्ध रूप से रखा जा सके।
  • जटिलता की एक सोपान-शृंखला11 संघ कोशिकीय-स्तरीय स्पंजों से, द्विस्तरीय और त्रिज्या-सममित नाइडेरियों से होते हुए, त्रिस्तरीय, द्विपार्श्व-सममित और प्रगुहायुक्त जंतुओं तक क्रमशः जटिलता की एक श्रेणी बनाते हैं, जो अंततः पृष्ठरज्जु और तंत्रिका रज्जु वाले रज्जुकियों पर समाप्त होती है।
  • पृष्ठरज्जु से कशेरुक दंड तकअध्याय यह स्पष्ट करता है कि रज्जुकी लक्षण कशेरुकियों (Vertebrates) में कैसे परिणत होते हैं, जहाँ भ्रूणीय विकास में पृष्ठरज्जु का स्थान कशेरुक दंड ले लेता है, और यह वंश जबड़ा-रहित मछलियों से लेकर स्तनधारियों तक सात वर्गों में विभाजित होता है।
मुख्य बातें

मुख्य बिंदु और सूत्र

  1. 01पोरीफेरा (स्पंज) बहुकोशिकीय होते हैं जिनमें कोशिकीय-स्तरीय संगठन और भोजन ग्रहण तथा अपशिष्ट निष्कासन हेतु जल नाल तंत्र होता है।
  2. 02सीलेंटेरेटा (नाइडेरिया) ऊतक-स्तरीय संगठन प्रदर्शित करते हैं, द्विस्तरीय और त्रिज्या-सममित होते हैं तथा शिकार पकड़ने के लिए नाइडोब्लास्ट (दंश कैप्सूल) रखते हैं।
  3. 03प्लैटीहेल्मिंथीज (चपटे कृमि) द्विपार्श्व-सममित, त्रिस्तरीय और अप्रगुही जंतु हैं जिनमें अपूर्ण पाचन तंत्र होता है।
  4. 04ऐनेलिडा (खंडीय कृमि) और आर्थ्रोपोडा (कीट एवं संबंधित जंतु) में द्विपार्श्व खंडीभवन होता है और ये प्रगुही जंतु हैं जिनमें पूर्ण पाचन तंत्र होता है।
  5. 05कॉर्डेटा में पृष्ठरज्जु (notochord), पृष्ठीय खोखला तंत्रिका रज्जु और ग्रसनीय गिल-दरारें होती हैं; कशेरुकियों में वयस्क अवस्था में पृष्ठरज्जु का स्थान कशेरुक दंड ले लेता है।
  6. 06कशेरुकी (Vertebrata) सात वर्गों में विभाजित होते हैं: साइक्लोस्टोमेटा (जबड़ा-रहित), कॉन्ड्रिक्थीज (उपास्थिल मछलियाँ), ओस्टिक्थीज (अस्थिल मछलियाँ), एंफिबिया, रेप्टिलिया, एवीज और मैमेलिया।
प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

01

जंतु वर्गीकरण का मुख्य आधार क्या है?

जंतुओं को मूलभूत विशेषताओं के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है: संगठन स्तर (कोशिकीय, ऊतक, अंग, अंग-तंत्र), शारीरिक सममिति (त्रिज्या या द्विपार्श्व), द्विस्तरीय या त्रिस्तरीय संगठन, प्रगुहा की उपस्थिति या अनुपस्थिति, खंडीभवन, और पृष्ठरज्जु की उपस्थिति या अनुपस्थिति।

02

रज्जुकी (Chordates) और अरज्जुकी (Non-chordates) में क्या अंतर है?

रज्जुकियों में पृष्ठरज्जु, पृष्ठीय खोखला तंत्रिका रज्जु, युग्मित ग्रसनीय गिल-दरारें, पश्च-गुदा पूँछ और अधर हृदय होते हैं। अरज्जुकियों में ये लक्षण नहीं होते; उनमें (यदि हो तो) अधर तंत्रिका रज्जु, पृष्ठीय हृदय और गिल-दरारें अनुपस्थित होती हैं।

03

कशेरुकियों को अन्य रज्जुकियों से क्या अलग करता है?

कशेरुकियों में वयस्क अवस्था में भ्रूणीय पृष्ठरज्जु का स्थान कशेरुक दंड ले लेता है। इनमें दो से चार कक्षों वाला अधर पेशीय हृदय, उत्सर्जन हेतु वृक्क और युग्मित उपांग (पंख या अंग) होते हैं। सभी रज्जुकी कशेरुकी नहीं होते, किंतु सभी कशेरुकी रज्जुकी अवश्य होते हैं।

04

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