भौतिक विज्ञान • कक्षा 11

भौतिकी

NCERT पाठ्यपुस्तक14 अध्याय

अध्याय नोट्स

भौतिकी में आप क्या सीखेंगे

भौतिकी का त्वरित रिवीज़न मैप — हर अध्याय का मूल विचार और पाँच मुख्य बातें। पूरा NCERT PDF और विस्तृत नोट्स पढ़ने के लिए किसी भी अध्याय पर टैप करें।

01

मात्रक एवं मापन

कक्षा 11 भौतिकी एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक का अध्याय 1, "मात्रक एवं मापन", SI पद्धति के सात मूल आधार राशियों — लंबाई, द्रव्यमान, समय, विद्युत धारा, ताप, पदार्थ की मात्रा और ज्योति तीव्रता — तथा उनके मानक मात्रकों का परिचय देता है, साथ ही मापन की परिशुद्धता व्यक्त करने के लिए सार्थक अंकों और भौतिक समीकरणों को सत्यापित करने हेतु विमीय विश्लेषण की अवधारणाएँ प्रस्तुत करता है।

  • 1SI पद्धति में सात मूल मात्रक हैं (मीटर, किलोग्राम, सेकंड, एम्पियर, केल्विन, मोल, कैंडेला); अन्य सभी मात्रक इन्हीं के व्युत्पन्न संयोजन हैं।
  • 2सार्थक अंक मापन की परिशुद्धता दर्शाते हैं; जोड़/घटाव में दशमलव स्थान मिलाने तथा गुणन/भाग में न्यूनतम परिशुद्ध मान के सार्थक अंकों की संख्या मिलाने के नियम लागू होते हैं।
  • 3विमाएँ वर्गाकार कोष्ठक [L], [M], [T] आदि का उपयोग करके भौतिक राशियों की प्रकृति को परिमाण से स्वतंत्र रूप से व्यक्त करती हैं।
  • 4विमीय सूत्र यह बताते हैं कि आधार राशियाँ मिलकर व्युत्पन्न राशि कैसे बनाती हैं; विमीय समीकरणें सूत्रों की संगतता जाँचती हैं।
  • 5विमीय विश्लेषण भौतिक राशियों के बीच संबंध निकालने और समीकरणों को सत्यापित करने में सहायक है, किंतु यह विमाहीन नियतांक जैसे T = 2π√(l/g) में 2π का निर्धारण नहीं कर सकता।
02

सरल रेखा में गति

कक्षा 11 भौतिकी एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक का अध्याय 2, "सरल रेखा में गति", एकविमीय गति की गतिकी को समाहित करता है, जिसमें वेग, त्वरण और एकसमान त्वरित गति के गतिकीय समीकरण शामिल हैं तथा मुक्त पतन और रुकने की दूरी जैसे वास्तविक जीवन के अनुप्रयोग प्रस्तुत किए गए हैं।

  • 1तात्कालिक वेग, अवकल dx/dt है — किसी क्षण स्थिति-समय वक्र की ढाल
  • 2तात्कालिक त्वरण, अवकल dv/dt है — किसी क्षण वेग-समय वक्र की ढाल
  • 3वेग-समय वक्र के नीचे का क्षेत्रफल उस समय अंतराल में विस्थापन को दर्शाता है
  • 4स्थिर त्वरण के लिए तीन गतिकीय समीकरण पाँच राशियों को जोड़ते हैं: v = v₀ + at, x = v₀t + ½at² और v² = v₀² + 2ax
  • 5मुक्त पतन एकसमान त्वरित गति है जिसमें a = −g = −9.8 m/s² (स्थिर, प्रारंभिक वेग से स्वतंत्र)
03

समतल में गति

कक्षा 11 भौतिकी एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक का अध्याय 3, "समतल में गति", सदिश बीजगणित का उपयोग करके द्विविमीय गति को समाहित करता है, जिसमें प्रक्षेप्य गति और एकसमान वृत्तीय गति प्रमुख हैं।

  • 1सदिशों में परिमाण और दिशा दोनों होते हैं; अदिशों में केवल परिमाण। सदिश योग त्रिभुज या समांतर चतुर्भुज नियम का अनुसरण करता है, क्रमविनिमेय (A+B=B+A) और साहचर्य है।
  • 2किसी भी सदिश को मात्रक सदिशों î और ĵ का उपयोग करके लंबवत अक्षों के अनुदिश घटकों में वियोजित किया जा सकता है। घटक परिमाण और दिशाकोण से संबंधित होते हैं: Ax = A cos θ, Ay = A sin θ।
  • 3समतल में गति को दो स्वतंत्र एकविमीय गतियों के रूप में माना जाता है। x और y दिशाओं में अलग-अलग r = r₀ + v₀t + ½at² का उपयोग द्विविमीय गतिकी को सरल बनाता है।
  • 4प्रक्षेप्य गति का पथ परवलयाकार है: y = (tan θ₀)x − gx²/(2v₀² cos² θ₀)। अधिकतम ऊँचाई hm = (v₀ sin θ₀)²/(2g), समय tm = v₀ sin θ₀/g पर प्राप्त होती है।
  • 5प्रक्षेप्य की क्षैतिज परास R = v₀² sin 2θ₀/g है, θ₀ = 45° पर अधिकतम। उड़ान काल Tf = 2v₀ sin θ₀/g।
04

गति के नियम

कक्षा 11 भौतिकी एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक का अध्याय 4, "गति के नियम", न्यूटन के तीन मूलभूत नियमों को प्रस्तुत करता है जो यह बताते हैं कि बल पिंडों की गति को कैसे प्रभावित करते हैं — जड़त्व का नियम, बल और त्वरण के बीच संबंध, तथा यह सिद्धांत कि बल सदैव समान और विपरीत युग्मों के रूप में उत्पन्न होते हैं।

  • 1न्यूटन का प्रथम नियम: कोई पिंड विराम में या एकसमान गति में तब तक रहता है जब तक उस पर कोई नेट बाह्य बल न लगे; यह जड़त्व है, बलों की अनुपस्थिति नहीं
  • 2न्यूटन का द्वितीय नियम: F = dp/dt = ma व्यक्त करता है कि बल, संवेग के परिवर्तन की दर के समानुपाती है और त्वरण की दिशा में कार्य करता है
  • 3न्यूटन का तृतीय नियम: बल सदैव दो पिंडों के बीच युग्मों के रूप में उत्पन्न होते हैं; क्रिया और प्रतिक्रिया एक साथ होते हैं, समान-विपरीत होते हैं, किंतु भिन्न पिंडों पर कार्य करते हैं
  • 4संवेग p = mv द्रव्यमान और वेग का गुणनफल है; आवेग = बल × समय अंतराल = संवेग-परिवर्तन
  • 5स्थैतिक घर्षण आसन्न गति का विरोध करता है (fs ≤ μsN); गतिज घर्षण वास्तविक आपेक्षिक गति का विरोध करता है (fk = μkN), जहाँ μk < μs
05

कार्य, ऊर्जा और शक्ति

कक्षा 11 भौतिकी एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक का अध्याय 5, "कार्य, ऊर्जा और शक्ति", इन मूलभूत राशियों का परिचय देता है — कार्य बल का विस्थापन पर प्रयोग है, गतिज ऊर्जा गति की ऊर्जा है, और शक्ति कार्य करने की दर है — ये सभी कार्य-ऊर्जा प्रमेय से जुड़े हैं जो कहता है कि किया गया कार्य गतिज ऊर्जा के परिवर्तन के बराबर होता है।

  • 1कार्य केवल तभी होता है जब बल की दिशा में विस्थापन हो; W = (F cos θ)d = F·d
  • 2गतिज ऊर्जा K = (1/2)mv² सदैव धनात्मक होती है और गति के कारण ऊर्जा को दर्शाती है
  • 3संरक्षी बल (गुरुत्व, स्प्रिंग बल) केवल प्रारंभिक और अंतिम स्थितियों पर निर्भर करते हैं; असंरक्षी बल (घर्षण) पथ पर निर्भर करते हैं
  • 4संरक्षी बलों के लिए यांत्रिक ऊर्जा संरक्षित रहती है: E = K + V(x) = स्थिरांक, जहाँ V स्थितिज ऊर्जा है
  • 5शक्ति, कार्य करने की समय-दर है: P = dW/dt = F·v, वाट में मापी जाती है (1 W = 1 J/s)
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कणों के निकाय तथा घूर्णी गति

कक्षा 11 भौतिकी एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक का अध्याय 6, "कणों के निकाय तथा घूर्णी गति", कण-निकायों, घूर्णी गति, द्रव्यमान-केंद्र, बल-आघूर्ण, कोणीय संवेग और जड़त्व-आघूर्ण को समाहित करता है।

  • 1द्रव्यमान-केंद्र R = Σ(m_i r_i)/M द्वारा परिभाषित है; सममित पिंडों के लिए यह ज्यामितीय केंद्र से संपाती होता है।
  • 2रेखीय वेग और कोणीय वेग v = ω × r से संबंधित हैं, जहाँ ω घूर्णन अक्ष के अनुदिश कोणीय वेग सदिश है।
  • 3जड़त्व-आघूर्ण I = Σ(m_i r_i²) द्रव्यमान का घूर्णी समतुल्य है; घूर्णन की गतिज ऊर्जा K = (1/2)Iω² है।
  • 4बल-आघूर्ण τ = r × F और कोणीय संवेग L = r × p न्यूटन के द्वितीय नियम के घूर्णी समतुल्य का पालन करते हैं: τ = Iα और dL/dt = τ_ext।
  • 5यांत्रिक साम्यावस्था में दृढ़ पिंड को संतुष्ट करना होगा: (1) ΣF = 0 (स्थानांतरण) और (2) Στ = 0 (घूर्णन)।
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गुरुत्वाकर्षण

कक्षा 11 भौतिकी एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक का अध्याय 7, "गुरुत्वाकर्षण", सभी भौतिक पिंडों के बीच आकर्षण बल की व्याख्या करता है, जो उनके बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है। न्यूटन के सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण के नियम से पार्थिव और खगोलीय दोनों घटनाओं को नियंत्रित किया जाता है, जिसमें गुरुत्वीय नियतांक G = 6.67×10⁻¹¹ N m²/kg² है।

  • 1सभी ग्रह दीर्घवृत्तीय कक्षाओं में सूर्य को एक नाभि पर रखकर घूमते हैं; सूर्य को ग्रह से जोड़ने वाली रेखा समान समय में समान क्षेत्रफल घेरती है; कक्षीय आवर्तकाल का वर्ग अर्ध-दीर्घ अक्ष के घन के समानुपाती है (केप्लर के नियम)
  • 2गुरुत्वीय बल: F = Gm₁m₂/r² जहाँ G = 6.67×10⁻¹¹ N m²/kg²; बीच में उपस्थित पदार्थ और पिंडों की प्रकृति से स्वतंत्र
  • 3ऊँचाई के साथ गुरुत्वीय त्वरण घटता है: g(h) ≈ g(1 − 2h/Rₑ) जब h << Rₑ, और गहराई के साथ भी घटता है: g(d) = g(1 − d/Rₑ)
  • 4पृथ्वी के केंद्र से r दूरी पर गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा: W(r) = −GMₑm/r; परिक्रमा करते उपग्रहों की कुल यांत्रिक ऊर्जा ऋणात्मक होती है
  • 5पृथ्वी की सतह से पलायन वेग: vₑ = √(2GMₑ/Rₑ) = √(2gRₑ) ≈ 11.2 km/s; प्रक्षेप्य के द्रव्यमान या दिशा से स्वतंत्र
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ठोसों के यांत्रिक गुण

कक्षा 11 भौतिकी एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक का अध्याय 8, "ठोसों के यांत्रिक गुण", प्रतिबल, विकृति, प्रत्यास्थता और हुक के नियम को समाहित करता है — यह बताता है कि बल लगने पर पदार्थ कैसे विरूपित होते हैं और बल हटने पर अपना मूल आकार वापस पा लेते हैं। भवनों, पुलों और संरचनात्मक अभियांत्रिकी अभिकल्पन के लिए ये गुण अनिवार्य हैं।

  • 1प्रत्यास्थता वह गुण है जिससे पिंड बाहरी बल हटने पर अपना मूल आकार व आमाप पुनः प्राप्त कर लेते हैं; प्लास्टिकता में स्थायी विरूपण होता है
  • 2प्रतिबल = F/A (प्रति इकाई क्षेत्रफल बल, SI मात्रक Pa); विकृति = ΔL/L (विमा-परिवर्तन का विमाहीन अनुपात)
  • 3हुक का नियम: प्रतिबल = k × विकृति (प्रत्यास्थता सीमा के भीतर लघु विरूपणों के लिए); तीन प्रकार — अनुदैर्ध्य, अपरूपण, जलीय
  • 4यंग गुणांक Y = (F/A)/(ΔL/L); धातुओं का Y अधिक होता है (इस्पात > तांबा > एल्युमीनियम); अपरूपण गुणांक G ≈ Y/3
  • 5आयतन गुणांक B दाब और आयतन-परिवर्तन को संबंधित करता है; ठोस सबसे कम संपीड्य होते हैं, गैसें ~10 लाख गुना अधिक संपीड्य
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तरलों के यांत्रिक गुण

कक्षा 11 भौतिकी एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक का अध्याय 9, "तरलों के यांत्रिक गुण", दाब, धारारेखीय प्रवाह, बर्नूली का सिद्धांत, श्यानता और पृष्ठ तनाव को समाहित करता है।

  • 1दाब एक अदिश राशि है जो प्रति इकाई क्षेत्रफल अभिलंब बल के रूप में परिभाषित है (P = F/A), पास्कल (Pa) में मापा जाता है; 1 atm = 1.01 × 10⁵ Pa
  • 2पास्कल का नियम: स्थिर तरल में समान ऊँचाई पर दाब एकसमान है और बंद तरल में सभी दिशाओं में बिना क्षरण के संचारित होता है
  • 3तरल में दाब गहराई के साथ बढ़ता है: P = Pa + ρgh, जहाँ ρ घनत्व, g गुरुत्व त्वरण और h सतह से गहराई है
  • 4सांतत्य समीकरण (Av = नियतांक) असंपीड्य तरल प्रवाह में द्रव्यमान संरक्षण बताता है; अनुप्रस्थ काट घटने पर वेग बढ़ता है
  • 5बर्नूली का समीकरण (P + ½ρv² + ρgh = नियतांक) धारारेखीय प्रवाहों पर लागू होता है और दाब को वेग व ऊँचाई से संबंधित करता है
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द्रव्य के तापीय गुण

कक्षा 11 भौतिकी एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक का अध्याय 10, "द्रव्य के तापीय गुण", ऊष्मा, ताप, तापीय प्रसार, विशिष्ट ऊष्मा धारिता, उष्मामिति, अवस्था-परिवर्तन और ऊष्मा स्थानांतरण को समाहित करता है और चालन, संवहन व विकिरण द्वारा ऊष्मा प्रवाह तथा न्यूटन के शीतलन नियम की व्याख्या करता है।

  • 1ऊष्मा ताप-अंतर के कारण तंत्रों के बीच स्थानांतरित ऊर्जा है; जूल (J) में मापी जाती है; ताप केल्विन (K) में
  • 2परम ताप पैमाना: T = tc + 273.15; परम शून्य 0 K पर आण्विक गति रुक जाती है
  • 3तापीय प्रसार: रेखीय (∆l/l = αl∆T) और आयतन (∆V/V = αv∆T); एकसमान प्रसार के लिए αv = 3αl
  • 4विशिष्ट ऊष्मा धारिता s = (1/m)(∆Q/∆T) ऊष्मा अवशोषण पर ताप-परिवर्तन निर्धारित करती है; जल की विशिष्ट ऊष्मा सामान्य पदार्थों में सर्वाधिक है
  • 5गुप्त ऊष्मा (L = Q/m) अवस्था-परिवर्तन की ऊर्जा — जल के लिए संलयन Lf = 3.33×10⁵ J/kg और वाष्पीकरण Lv = 22.6×10⁵ J/kg
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ऊष्मागतिकी

कक्षा 11 भौतिकी एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक का अध्याय 11, "ऊष्मागतिकी", ऊष्मा, ताप और ऊर्जा रूपांतरण से संबंधित है। यह उन नियमों का अध्ययन करता है जो ऊष्मीय ऊर्जा को ऊष्मा और कार्य के बीच परिवर्तित करते हैं — जैसे घर्षण से ऊष्मा उत्पन्न होना या भाप-इंजन में ऊष्मा का कार्य में रूपांतरण।

  • 1शून्यतम नियम: यदि दो तंत्र अलग-अलग किसी तीसरे तंत्र के साथ ऊष्मीय साम्य में हों तो वे परस्पर भी ऊष्मीय साम्य में हैं; यह ताप की संकल्पना स्थापित करता है
  • 2ऊष्मा (ताप-अंतर द्वारा ऊर्जा स्थानांतरण) और कार्य (अन्य माध्यमों से ऊर्जा स्थानांतरण) आंतरिक ऊर्जा बदलने के दो भिन्न तरीके हैं
  • 3प्रथम नियम: ∆Q = ∆U + ∆W — दी गई ऊष्मा = आंतरिक ऊर्जा में परिवर्तन + तंत्र द्वारा किया गया कार्य
  • 4आंतरिक ऊर्जा एक अवस्था चर है जो केवल तंत्र की अवस्था (दाब, आयतन, ताप) पर निर्भर है, पथ पर नहीं
  • 5द्वितीय नियम: कोई ऊष्मा इंजन 100% दक्षता प्राप्त नहीं कर सकता; कार्नो इंजन की अधिकतम सैद्धांतिक दक्षता η = 1 − T₂/T₁ (T₁ = गर्म, T₂ = ठंडा ऊष्मागार)
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अणुगति सिद्धांत

कक्षा 11 भौतिकी एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक का अध्याय 12, "अणुगति सिद्धांत", गैसों के व्यवहार की व्याख्या करता है — इसके अनुसार गैसें तेज़ी से गतिमान परमाणुओं या अणुओं का संग्रह हैं जो अनवरत यादृच्छिक गति में हैं और प्रत्यास्थ टकराव से दाब, ताप तथा अन्य स्थूल गुण आणविक प्राचलों से निर्धारित होते हैं।

  • 1अणुगति सिद्धांत प्रत्यास्थ आणविक टकरावों से दाब व्युत्पन्न करता है: P = ⅓nmv², जो आणविक द्रव्यमान m, संख्या-घनत्व n और माध्य-वर्ग चाल v² से सीधे जुड़ा है
  • 2ताप प्रति अणु औसत स्थानांतरीय गतिज ऊर्जा है: ½m⟨v²⟩ = (3/2)kBT; यह गैस के प्रकार या दाब पर नहीं, केवल परम ताप T पर निर्भर करता है
  • 3आदर्श गैस समीकरण PV = µRT (या PV = kBNT) अणुगति सिद्धांत से निकलता है; कम दाब और उच्च ताप पर वास्तविक गैसें इसका पालन करती हैं
  • 4ऊर्जा-समविभाजन का नियम: प्रत्येक स्थानांतरीय और घूर्णी स्वतंत्रता कोटि ½kBT योगदान देती है; प्रत्येक कंपनीय विधा kBT (गतिज और स्थितिज दोनों) योगदान देती है
  • 5वर्ग-माध्य-मूल चाल vrms = √(3kBT/m); समान ताप पर हल्के अणु तेज़ गति करते हैं; यह विसरण दरों को नियंत्रित करता है
13

दोलन

कक्षा 11 भौतिकी एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक का अध्याय 13, "दोलन", उस आवर्त गति को समाहित करता है जिसमें वस्तुएँ किसी साम्यावस्था के इर्द-गिर्द आगे-पीछे चलती हैं और विस्थापन को सरल आवर्त गति में x(t) = A cos(ωt + φ) जैसे ज्यावक्रीय फलनों द्वारा व्यक्त किया जाता है।

  • 1आवर्त गति नियमित अंतराल पर दोहराती है; दोलनी गति साम्य-स्थिति (जहाँ कोई नेट बल नहीं) के इर्द-गिर्द आगे-पीछे होती है
  • 2सरल आवर्त गति का विस्थापन x(t) = A cos(ωt + φ), जहाँ आयाम A अधिकतम विस्थापन है, कोणीय आवृत्ति ω = 2π/T और कला-नियतांक φ प्रारंभिक दशाएँ निर्धारित करता है
  • 3वेग v(t) = –ωA sin(ωt + φ) और त्वरण a(t) = –ω²x(t); दोनों आवर्त हैं — वेग T/2 और विस्थापन T आवर्तकाल के
  • 4सरल आवर्त गति में बल प्रत्यानयन है: F = –kx = –mω²x, सदा साम्य की ओर; k = mω² स्प्रिंग नियतांक को द्रव्यमान और कोणीय आवृत्ति से जोड़ता है
  • 5सरल आवर्त गति में कुल यांत्रिक ऊर्जा संरक्षित: E = ½kA² = K + U; साम्य पर गतिज ऊर्जा अधिकतम, अधिकतम विस्थापन पर स्थितिज ऊर्जा अधिकतम
14

तरंगें

कक्षा 11 भौतिकी एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक का अध्याय 14, "तरंगें", उन विक्षोभ के प्रतिरूपों की व्याख्या करता है जो माध्यम में द्रव्य के भौतिक स्थानांतरण के बिना ऊर्जा और सूचना का परिवहन करते हैं। यांत्रिक तरंगों में अनुप्रस्थ तरंगें (कंपन प्रसार के लंबवत) और अनुदैर्ध्य तरंगें (कंपन प्रसार के समानांतर) शामिल हैं; उनकी चाल माध्यम के प्रत्यास्थ और जड़त्वीय गुणों पर निर्भर करती है।

  • 1यांत्रिक तरंगें प्रत्यास्थ माध्यमों में द्रव्य स्थानांतरित किए बिना विक्षोभ का प्रसार करती हैं; ऊर्जा वहन करती हैं और माध्यम के गुणों पर निर्भर करती हैं (डोरी के लिए तनाव/रेखीय घनत्व, तरलों के लिए आयतन गुणांक/घनत्व)।
  • 2अनुप्रस्थ तरंगें (कंपन ⊥ प्रसार) ठोसों में होती हैं; अनुदैर्ध्य तरंगें (कंपन ∥ प्रसार) सभी प्रत्यास्थ माध्यमों में; अप्रकीर्णनशील माध्यमों में तरंग-चाल आवृत्ति से स्वतंत्र है।
  • 3ज्यावक्रीय तरंग समीकरण y(x,t) = a sin(kx − ωt + φ) — आयाम a, कोणीय तरंग-संख्या k = 2π/λ, कोणीय आवृत्ति ω = 2πν और प्रारंभिक कला φ।
  • 4डोरी में तरंग-चाल: v = √(T/μ) जहाँ T तनाव और μ रेखीय द्रव्यमान घनत्व; माध्यम में ध्वनि: v = √(B/ρ) (आयतन गुणांक/घनत्व) या आदर्श गैसों के लिए v = √(γP/ρ) (लाप्लास संशोधन)।
  • 5अध्यारोपण का सिद्धांत: नेट विस्थापन = प्रत्येक तरंग के विस्थापनों का बीजगणितीय योग; व्यतिकरण (समकला → दुगना आयाम; π विकला → निरसन), अप्रगामी तरंगें और विस्पंद (आवृत्ति = |ν₁ − ν₂|) उत्पन्न होते हैं।