विज्ञान • कक्षा 8

विज्ञान (जिज्ञासा)

NCERT पाठ्यपुस्तक13 अध्याय

अध्याय नोट्स

विज्ञान (जिज्ञासा) में आप क्या सीखेंगे

विज्ञान (जिज्ञासा) का त्वरित रिवीज़न मैप — हर अध्याय का मूल विचार और पाँच मुख्य बातें। पूरा NCERT PDF और विस्तृत नोट्स पढ़ने के लिए किसी भी अध्याय पर टैप करें।

01

विज्ञान के अन्वेषी संसार की खोज यात्रा

कक्षा 8 विज्ञान एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (जिज्ञासा) का अध्याय 1, "विज्ञान के अन्वेषी संसार की खोज यात्रा", विज्ञान को महज़ तथ्य याद करने की बजाय एक क्रमबद्ध अन्वेषण-प्रक्रिया के रूप में प्रस्तुत करता है — जिसमें प्रश्न पूछना, प्रयोग बनाना, ध्यानपूर्वक अवलोकन करना और साक्ष्य के आधार पर निष्कर्ष निकालना शामिल है।

  • 1कक्षा 8 में विज्ञान 'अन्वेषी संसार' पर केंद्रित है — केवल नए तथ्य जानना नहीं, बल्कि उन्हें खोजना भी सीखना।
  • 2वैज्ञानिक अन्वेषण में केंद्रित प्रश्न पूछना, सरल प्रयोग बनाना, ध्यानपूर्वक अवलोकन करना और निष्कर्ष निकालना शामिल है।
  • 3व्यवस्थित अन्वेषण का मूल सिद्धांत: एक समय में केवल एक चर बदलें, बाकी सब स्थिर रखें।
  • 4नियंत्रणीय चर वे हैं जिन्हें हम जानबूझकर बदलते हैं (जैसे आटे की मोटाई, तेल का तापमान); अवलोकनीय चर वे हैं जिन्हें देखते या मापते हैं (जैसे पूड़ी फूली या नहीं, कितने सेकंड में)।
  • 5अवलोकन गुणात्मक (हाँ/नहीं) या मात्रात्मक (सेकंड जैसी मापने योग्य संख्या) हो सकते हैं।
02

अदृश्य जीव-जगत — हमारी आँखों की क्षमता से परे

कक्षा 8 विज्ञान एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (जिज्ञासा) का अध्याय 2, "अदृश्य जीव-जगत — हमारी आँखों की क्षमता से परे", कोशिका को जीवन की मूल इकाई के रूप में परिचित कराता है और उन सूक्ष्मजीवों (जीवाणु, कवक, प्रोटोज़ोआ, शैवाल, विषाणु) का अन्वेषण करता है जो नग्न आँखों से नहीं दिखते, साथ ही भोजन, अपघटन और पर्यावरण में उनकी भूमिका को समझाता है।

  • 1कोशिका जीवन की मूल इकाई है; सभी सजीव कोशिकाओं से बने हैं।
  • 2रॉबर्ट हुक ने 1665 में माइक्रोग्राफिया में कॉर्क का अवलोकन करते हुए 'कोशिका' शब्द दिया; उनका सूक्ष्मदर्शी 200 से 300 गुना आवर्धन करता था। एंटोनी वॉन ल्यूवेनहॉक, जिन्हें सूक्ष्मजैविकी का जनक कहा जाता है, ने सर्वप्रथम जीवाणु और रक्त कोशिकाएँ स्पष्ट रूप से देखीं।
  • 3एक सामान्य कोशिका के तीन मुख्य भाग हैं: कोशिका झिल्ली (छिद्रयुक्त, पदार्थों के आवागमन को नियंत्रित करती है), कोशिकाद्रव्य (कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा और खनिज लवण युक्त; अधिकांश जीवन-प्रक्रियाओं का स्थल) और केंद्रक (समस्त कोशिका-क्रियाओं और वृद्धि का नियंत्रक)।
  • 4पादप कोशिकाओं में अतिरिक्त कोशिका भित्ति (दृढ़ता प्रदान करती है), हरितलवक (प्रकाश-संश्लेषण के लिए) और एक बड़ी रिक्तिका होती है; जीवाणुओं में सुपरिभाषित केंद्रक की जगह केंद्रकाभ होता है।
  • 5जैविक संगठन के स्तर: कोशिका → ऊतक → अंग → अंग तंत्र → जीव।
03

स्वास्थ्य — एक अमूल्य निधि

कक्षा 8 विज्ञान एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (जिज्ञासा) का अध्याय 3, "स्वास्थ्य — एक अमूल्य निधि", स्वास्थ्य का वास्तविक अर्थ समझाता है — विश्व स्वास्थ्य संगठन की परिभाषा के अनुसार पूर्ण शारीरिक, मानसिक और सामाजिक स्वास्थ्य — और यह पड़ताल करता है कि रोग कैसे उत्पन्न, वर्गीकृत, फैलते, रोके और उपचारित होते हैं।

  • 1विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार स्वास्थ्य 'पूर्ण शारीरिक, मानसिक और सामाजिक स्वास्थ्य की स्थिति है — न कि मात्र रोगों का न होना'।
  • 2लक्षण (symptom) वह है जो व्यक्ति महसूस करता है (जैसे दर्द, थकान); संकेत (sign) वह है जो देखा या मापा जा सकता है (जैसे बुखार, चकत्ते, सूजन)।
  • 3रोग दो मुख्य प्रकार के होते हैं: संचरणीय (रोगजनकों द्वारा होने वाले और फैलने वाले) और असंचरणीय (रोगजनकों से नहीं; जीवनशैली, आहार और पर्यावरण से जुड़े)।
  • 4रोगजनक (रोगाणु) वे जीव हैं जो संचरणीय रोग उत्पन्न करते हैं — इनमें जीवाणु, विषाणु, कवक, कृमि और प्रोटोज़ोआ (एककोशिकीय जीव) शामिल हैं।
  • 5संचरणीय रोग वायु (खाँसने/छींकने), प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संपर्क, दूषित भोजन या जल और मच्छर जैसे कीट-वाहकों (vectors) के माध्यम से फैलते हैं।
04

विद्युत — चुंबकीय एवं तापीय प्रभाव

कक्षा 8 विज्ञान एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (जिज्ञासा) का अध्याय 4, "विद्युत — चुंबकीय एवं तापीय प्रभाव", यह समझाता है कि धारावाही तार के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र कैसे उत्पन्न होता है, विद्युत चुंबक कैसे कार्य करते हैं, प्रतिरोध से विद्युत ऊष्मा कैसे उत्पन्न होती है और सेल व बैटरी रासायनिक अभिक्रियाओं से विद्युत कैसे उत्पन्न करती हैं।

  • 1जब विद्युत धारा किसी चालक में प्रवाहित होती है तो उसके चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है — इसे विद्युत धारा का चुंबकीय प्रभाव कहते हैं; धारा रुकते ही क्षेत्र समाप्त हो जाता है।
  • 2हैन्स क्रिश्चियन ओर्स्टेड (1777–1851) ने 1820 में खोजा कि विद्युत और चुंबकत्व परस्पर संबद्ध हैं — परिपथ चालू/बंद करने पर समीपस्थ चुंबकीय दिक्सूचक सुई विक्षेपित होती है।
  • 3धारावाही कुंडली जो चुंबक की भाँति कार्य करे, विद्युत चुंबक कहलाती है; लौह-क्रोड डालने से यह काफी शक्तिशाली बनती है।
  • 4विद्युत चुंबक की शक्ति धारा बढ़ाने या कुंडली के फेरे बढ़ाने से बढ़ती है; धारा की दिशा बदलने से ध्रुव बदल जाते हैं।
  • 5उत्थापक विद्युत चुंबक कारखानों और स्क्रैप यार्डों में धारा चालू/बंद करके भारी धातु वस्तुएँ उठाने, ले जाने और छाँटने के लिए उपयोगी हैं।
05

बलों को जानें

कक्षा 8 विज्ञान एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (जिज्ञासा) का अध्याय 5, "बलों को जानें", बल को दो वस्तुओं की परस्पर क्रिया से उत्पन्न अपकर्षण या अभिकर्षण के रूप में परिचित कराता है और बलों को स्पर्श बल (पेशीय बल, घर्षण) और अस्पर्श बल (चुंबकीय, स्थिर-वैद्युत और गुरुत्व बल) में वर्गीकृत करता है।

  • 1बल किसी वस्तु पर लगाया गया अपकर्षण या अभिकर्षण है जो उसकी दूसरी वस्तु के साथ परस्पर क्रिया से उत्पन्न होता है; बल के लिए कम से कम दो वस्तुओं का होना ज़रूरी है। बल का SI मात्रक न्यूटन (N) है।
  • 2बल किसी स्थिर वस्तु को गतिमान कर सकता है, किसी गतिमान वस्तु की चाल बदल सकता है, गति की दिशा बदल सकता है या वस्तु का आकार बदल सकता है।
  • 3स्पर्श बल तभी कार्य करते हैं जब वस्तुओं के बीच भौतिक संपर्क हो। उदाहरण: पेशीय बल (चलने, उठाने, धकेलने में पेशियों की क्रिया से उत्पन्न) और घर्षण।
  • 4घर्षण वह बल है जो किसी वस्तु के दूसरी सतह पर गतिमान होने या गति का प्रयास करने पर उत्पन्न होता है; यह सदा गति की विपरीत दिशा में कार्य करता है और खुरदरी सतहों पर अधिक होता है।
  • 5अस्पर्श बल बिना भौतिक संपर्क के भी कार्य करते हैं। चुंबकीय बल (दूसरे चुंबक या चुंबकीय पदार्थ पर) आकर्षण या प्रतिकर्षण हो सकता है; सजातीय ध्रुव प्रतिकर्षण और विजातीय ध्रुव आकर्षण करते हैं।
06

दाब, पवन, झंझावात एवं चक्रवात

कक्षा 8 विज्ञान एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (जिज्ञासा) का अध्याय 6, "दाब, पवन, झंझावात एवं चक्रवात", यह समझाता है कि प्रति एकांक क्षेत्रफल बल (दाब) ठोस, द्रव और वायु में कैसे कार्य करता है और वायु-दाब में अंतर किस प्रकार पवन, तड़ित-झंझावात, वज्रपात और चक्रवात को जन्म देता है।

  • 1दाब = बल ÷ क्षेत्रफल; SI मात्रक न्यूटन/मीटर² (N/m²), जिसे पास्कल (Pa) भी कहते हैं।
  • 2समान बल के लिए संपर्क-क्षेत्रफल कम करने पर दाब अधिक होता है — इसीलिए कील नुकीली नोक से ठोकते हैं और चाकू की धार पतली होती है।
  • 3द्रव पात्र के तले पर ही नहीं, दीवारों पर और सभी दिशाओं में दाब डालते हैं; द्रव स्तंभ की ऊँचाई के साथ दाब बढ़ता है।
  • 4वायुमंडल सभी वस्तुओं पर दाब डालता है। 15 cm × 15 cm क्षेत्रफल पर वायुमंडलीय दाब 225 kg के भार-बल के बराबर है; शरीर का आंतरिक दाब इसे संतुलित करता है इसलिए हम कुचले नहीं जाते।
  • 5वायु उच्च वायु-दाब से निम्न वायु-दाब की ओर बहती है और यह दाब-अंतर ही पवन का कारण है।
07

द्रव्य की कणीय प्रकृति

कक्षा 8 विज्ञान एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (जिज्ञासा) का अध्याय 7, "द्रव्य की कणीय प्रकृति", यह समझाता है कि समस्त द्रव्य अत्यंत सूक्ष्म घटक कणों से बना है जो अंतर-कण आकर्षण बल से जुड़े हैं और इन बलों की तीव्रता यह निर्धारित करती है कि कोई पदार्थ ठोस, द्रव या गैस के रूप में विद्यमान है।

  • 1द्रव्य बड़ी संख्या में अत्यंत सूक्ष्म घटक कणों से बना है — ये इतने छोटे हैं कि साधारण सूक्ष्मदर्शी से भी नहीं देखे जा सकते।
  • 2घटक कण अंतर-कण आकर्षण बलों से जुड़े हैं; कणों के बीच दूरी थोड़ी बढ़ने पर ये बल तेज़ी से घट जाते हैं।
  • 3ठोस में अंतर-कण आकर्षण अधिकतम और दूरी न्यूनतम होती है; कण निश्चित स्थानों पर केवल कंपन करते हैं, इसलिए ठोस का आकार और आयतन निश्चित होते हैं।
  • 4द्रव में अंतर-कण आकर्षण ठोस से थोड़ा कम होता है; कण सीमित स्थान में गति कर सकते हैं, इसलिए द्रव का आयतन निश्चित पर आकार नहीं होता।
  • 5गैस में अंतर-कण आकर्षण नगण्य और दूरी अधिकतम होती है; कण सभी दिशाओं में स्वतंत्र रूप से गति करते हैं, इसलिए गैस का न आकार निश्चित है, न आयतन — यह किसी भी पात्र में भर जाती है।
08

द्रव्य की प्रकृति — तत्व, यौगिक और मिश्रण

कक्षा 8 विज्ञान एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (जिज्ञासा) का अध्याय 8, "द्रव्य की प्रकृति — तत्व, यौगिक और मिश्रण", यह समझाता है कि हमारे आस-पास की हर वस्तु को तत्व, यौगिक या मिश्रण के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है और इन तीनों श्रेणियों में किस प्रकार अंतर किया जाता है।

  • 1मिश्रण तब बनता है जब दो या दो से अधिक पदार्थ मिलाए जाते हैं और प्रत्येक पदार्थ अपने गुण बनाए रखता है; घटक आपस में रासायनिक अभिक्रिया नहीं करते।
  • 2समरूप मिश्रण में घटक समान रूप से वितरित और अभेद्य होते हैं (जैसे वायु, चीनी का विलयन); विषमरूप मिश्रण में घटक नग्न आँखों से दिखाई देते हैं (जैसे अंकुरित सलाद)।
  • 3मिश्रधातुएँ समरूप ठोस-ठोस मिश्रण हैं; उदाहरण: स्टेनलेस स्टील (लोहा, निकेल, क्रोमियम और अल्प मात्रा में कार्बन), पीतल (ताँबा और जस्ता), काँसा (ताँबा और टिन)।
  • 4शुद्ध पदार्थ में केवल एक प्रकार के कण होते हैं और इसे किसी भौतिक प्रक्रिया द्वारा अन्य पदार्थों में अलग नहीं किया जा सकता; यह या तो तत्व होता है या यौगिक।
  • 5तत्व सरलतम शुद्ध पदार्थ हैं जिन्हें और सरल पदार्थों में नहीं तोड़ा जा सकता; ये सभी द्रव्य के निर्माण खंड हैं। कुल 118 ज्ञात तत्व हैं।
09

विलेयों, विलायकों और विलयनों का अद्भुत संसार

कक्षा 8 विज्ञान एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (जिज्ञासा) का अध्याय 9, "विलेयों, विलायकों और विलयनों का अद्भुत संसार", विलयन क्या होते हैं, विलायक कितनी मात्रा में विलेय घोल सकता है (विलेयता), तापमान का विलेयता पर प्रभाव, और घनत्व की अवधारणा — इसकी माप एवं वस्तुओं के तैरने या डूबने का कारण — समझाता है।

  • 1विलयन एक समरूप मिश्रण है; घुलने वाला पदार्थ विलेय और घोलने वाला पदार्थ विलायक कहलाता है। दो द्रवों के विलयन में कम मात्रा वाला पदार्थ विलेय होता है।
  • 2असंतृप्त विलयन दिए गए तापमान पर और अधिक विलेय घोल सकता है; संतृप्त विलयन नहीं — अतिरिक्त विलेय तल पर बैठ जाता है।
  • 3विलेयता वह अधिकतम मात्रा है जो 100 mL विलायक या विलयन में एक निश्चित तापमान पर घुल सकती है।
  • 4अधिकांश ठोसों की विलेयता तापमान बढ़ने के साथ बढ़ती है; एक तापमान पर संतृप्त विलयन तापमान बढ़ाने पर असंतृप्त हो जाता है।
  • 5गैसों की द्रवों में विलेयता तापमान बढ़ने के साथ घटती है — ठंडे जल में गर्म जल की अपेक्षा अधिक ऑक्सीजन घुली होती है, इससे जलीय जीव जीवित रहते हैं।
10

प्रकाश — दर्पण एवं लेंस

कक्षा 8 विज्ञान एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (जिज्ञासा) का अध्याय 10, "प्रकाश — दर्पण एवं लेंस", गोलीय दर्पणों (अवतल और उत्तल) और लेंसों (उत्तल और अवतल) द्वारा प्रतिबिंब बनाने, परावर्तन के दो नियमों तथा वक्र दर्पणों व लेंसों के वास्तविक जीवन में उपयोग को समझाता है।

  • 1गोलीय दर्पण काँच के खोखले गोले के एक भाग के आकार के वक्र दर्पण हैं; अवतल दर्पण का परावर्तक पृष्ठ भीतर की ओर और उत्तल दर्पण का बाहर की ओर वक्र होता है।
  • 2अवतल दर्पण पास रखी वस्तु का सीधा और आवर्धित प्रतिबिंब बनाता है, परंतु दूर ले जाने पर पहले आवर्धित और फिर छोटा उलटा प्रतिबिंब बनाता है।
  • 3उत्तल दर्पण सदैव सीधा और छोटा प्रतिबिंब बनाता है, चाहे वस्तु कितनी भी दूर हो; इसीलिए यह वाहनों के पार्श्व-दर्पण और सड़क-सुरक्षा दर्पण के रूप में उपयोगी है।
  • 4परावर्तन के दो नियम: (1) आपतन कोण परावर्तन कोण के बराबर होता है; (2) आपतित किरण, अभिलंब और परावर्तित किरण एक ही तल में होती हैं।
  • 5ये परावर्तन के नियम समतल, अवतल और उत्तल — सभी प्रकार के दर्पणों पर लागू होते हैं।
11

आकाशीय परिघटनाएँ और काल-निर्धारण

कक्षा 8 विज्ञान एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (जिज्ञासा) का अध्याय 11, "आकाशीय परिघटनाएँ और काल-निर्धारण", चंद्रमा की कलाओं (शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष), प्राकृतिक आकाशीय चक्रों से चंद्र, सौर और लूनी-सौर पंचांगों के विकास तथा पृथ्वी की कक्षा में कृत्रिम उपग्रहों को प्रक्षेपित करने की आवश्यकता को समझाता है।

  • 1चंद्रमा का अपना प्रकाश नहीं होता; यह सूर्य के प्रकाश को परावर्तित करके चमकता है और केवल सूर्य की ओर वाला आधा भाग प्रकाशित रहता है।
  • 2चंद्रमा की कलाएँ पृथ्वी की छाया के कारण नहीं, बल्कि चंद्रमा के पृथ्वी के चारों ओर परिक्रमा करते समय उसके प्रकाशित आधे भाग का दिखाई देने वाला अंश बदलने के कारण होती हैं।
  • 3कृष्ण पक्ष वह दो सप्ताह की अवधि है जब चंद्रमा का चमकीला भाग पूर्णिमा से अमावस्या तक घटता है; शुक्ल पक्ष वह अवधि है जब यह फिर से बढ़ता है।
  • 4चंद्रमा की कलाओं का पूरा चक्र लगभग 29.5 दिन (एक माह) में पूरा होता है।
  • 5एक मध्य सौर दिवस 24 घंटे होता है — सूर्य के आकाश में उच्चतम बिंदु पर एक दिन से अगले दिन पहुँचने का औसत समय; ऊर्ध्वाधर छड़ी की छाया सबसे छोटी होने पर सूर्य अपनी उच्चतम स्थिति पर होता है।
12

प्रकृति कैसे सामंजस्य में कार्य करती है

कक्षा 8 विज्ञान एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (जिज्ञासा) का अध्याय 12, "प्रकृति कैसे सामंजस्य में कार्य करती है", पारिस्थितिकी तंत्र की जाँच करता है — जीवित जीव (जैविक घटक) और निर्जीव वस्तुएँ (अजैविक घटक) आहार शृंखलाओं, आहार जालों और सहजीविता एवं अपघटन जैसे संबंधों के माध्यम से कैसे परस्पर क्रिया करके प्रकृति में संतुलन बनाए रखते हैं।

  • 1पर्यावास वह स्थान है जो किसी जीव के लिए उचित परिस्थितियाँ उपलब्ध कराता है; इसमें जैविक घटक (जीवित जीव) और अजैविक घटक (वायु, जल, मृदा, सूर्य का प्रकाश, तापमान) होते हैं।
  • 2एक ही प्रकार के जीवों का एक पर्यावास में समूह जनसंख्या कहलाता है; एक ही पर्यावास में रहने वाली विभिन्न जनसंख्याएँ मिलकर समुदाय बनाती हैं।
  • 3किसी क्षेत्र में जैविक और अजैविक घटकों की परस्पर क्रिया से पारिस्थितिकी तंत्र बनता है; पारिस्थितिकी तंत्र स्थलीय (वन, घासभूमि) या जलीय (तालाब, झील, नदी) हो सकते हैं।
  • 4उत्पादक (स्वपोषी) प्रकाश संश्लेषण द्वारा अपना भोजन बनाते हैं; उपभोक्ता (परपोषी) दूसरे जीवों पर निर्भर करते हैं; अपघटक (कवक, जीवाणु) मृत पदार्थ को तोड़कर पोषक तत्व मुक्त करते हैं।
  • 5आहार शृंखला 'कौन किसे खाता है' का क्रम दर्शाती है; जीव पोषण स्तरों पर होते हैं — उत्पादक प्रथम, शाकाहारी द्वितीय, छोटे मांसाहारी तृतीय और बड़े मांसाहारी उच्चतर स्तर पर।
13

हमारा आवास — पृथ्वी एक अद्वितीय जीवनदायी ग्रह

कक्षा 8 विज्ञान एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (जिज्ञासा) का अध्याय 13, "हमारा आवास — पृथ्वी एक अद्वितीय जीवनदायी ग्रह", यह जाँचता है कि पृथ्वी ही एकमात्र ज्ञात ग्रह क्यों है जो जीवन को बनाए रखती है — इसकी वासयोग्य क्षेत्र में स्थिति, वायुमंडल, चुम्बकीय क्षेत्र, जनन की भूमिका और जलवायु परिवर्तन, जैव-विविधता हानि तथा प्रदूषण की त्रि-ग्रहीय संकट को समझाता है।

  • 1पृथ्वी ही एकमात्र ज्ञात ग्रह है जहाँ जीवन विद्यमान है और पनप रहा है; समस्त जीवन पतली भू-पर्पटी पर सीमित है — यदि पृथ्वी सेब के आकार की होती तो भू-पर्पटी उसके छिलके जितनी पतली होती।
  • 2पृथ्वी की सूर्य से दूरी उसे वासयोग्य क्षेत्र (गोल्डीलॉक्स ज़ोन) में रखती है — वह दूरी जहाँ जल तरल अवस्था में रहता है, जो जीवन के लिए आवश्यक है।
  • 3शुक्र सूर्य के सबसे निकट न होने पर भी सबसे गर्म ग्रह है क्योंकि उसका वायुमंडल लगभग पूर्णतः कार्बन डाइऑक्साइड से बना है, जो एक अत्यंत तीव्र हरित गृह प्रभाव उत्पन्न करता है।
  • 4पृथ्वी का आकार उसे इतना गुरुत्वाकर्षण देता है कि वह अपना वायुमंडल (जिसमें हानिकारक UV किरणों को रोकने वाली ओज़ोन परत शामिल है) बनाए रख सके परंतु इतना नहीं कि जीव कुचल जाएँ।
  • 5पृथ्वी का चुम्बकीय क्षेत्र, जो संभवतः उसके कोर में पिघले लोहे की गति से उत्पन्न होता है, हानिकारक ब्रह्मांडीय किरणों और सौर पवन को हटाकर वायुमंडल और जीवन की रक्षा करता है।