गणित • कक्षा 8

गणित (गणित प्रकाश)

NCERT पाठ्यपुस्तक7 अध्याय

अध्याय नोट्स

गणित (गणित प्रकाश) में आप क्या सीखेंगे

गणित (गणित प्रकाश) का त्वरित रिवीज़न मैप — हर अध्याय का मूल विचार और पाँच मुख्य बातें। पूरा NCERT PDF और विस्तृत नोट्स पढ़ने के लिए किसी भी अध्याय पर टैप करें।

01

वर्ग और घन

कक्षा 8 गणित एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (गणित प्रकाश) का अध्याय 1, "वर्ग और घन", पूर्ण वर्ग और पूर्ण घन संख्याओं की परिभाषा, गुणधर्म, प्रतिरूप और अभाज्य गुणनखंड विधि से वर्गमूल एवं घनमूल ज्ञात करने की विधियाँ सिखाता है।

  • 1पूर्ण वर्ग संख्याएँ — 1, 4, 9, 16, 25 — किसी संख्या को स्वयं से गुणा (n²) करने पर प्राप्त होती हैं
  • 2सभी पूर्ण वर्ग 0, 1, 4, 5, 6 या 9 पर समाप्त होते हैं; कोई वर्ग 2, 3, 7 या 8 पर नहीं समाप्त होता
  • 3जिन संख्याओं के गुणनखंडों की संख्या विषम होती है, वे ही पूर्ण वर्ग होती हैं (जैसे 1, 4, 9, 16, 25)
  • 4पूर्ण घन संख्याएँ — 1, 8, 27, 64, 125 — किसी संख्या को तीन बार गुणा (n³) करने पर प्राप्त होती हैं
  • 5प्रथम n विषम संख्याओं का योग n² के बराबर होता है (उदाहरण: 1+3+5+7+9 = 25 = 5²)
02

घातों का खेल

कक्षा 8 गणित एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (गणित प्रकाश) का अध्याय 2, "घातों का खेल", घातांक अंकन (exponential notation), घातांक के नियम, ऋणात्मक घातांक, वैज्ञानिक अंकन (scientific notation) तथा चरघातांकी वृद्धि (exponential growth) की अवधारणाएँ प्रस्तुत करता है।

  • 1घातांक अंकन: n^a का अर्थ है n को a बार स्वयं से गुणा करना (उदाहरण: 2³ = 8)
  • 2घातांक के नियम: n^a × n^b = n^(a+b); (n^a)^b = n^(a×b); n^a ÷ n^b = n^(a−b); n⁰ = 1 (n ≠ 0)
  • 3चरघातांकी वृद्धि गुणात्मक होती है (प्रत्येक चरण में दोगुना); रैखिक वृद्धि में प्रत्येक चरण में एक निश्चित राशि जुड़ती है — कागज को 46 बार मोड़ने पर मोटाई 7,00,000 किलोमीटर से अधिक हो जाती है
  • 4ऋणात्मक घातांक: n^(−a) = 1/nᵃ (उदाहरण: 2^(−3) = 1/8)
  • 5वैज्ञानिक अंकन: संख्या को x × 10ʸ रूप में लिखें जहाँ 1 ≤ x < 10 (उदाहरण: 5,900 = 5.9 × 10³)
03

संख्याओं की कहानी

कक्षा 8 गणित एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (गणित प्रकाश) का अध्याय 3, "संख्याओं की कहानी", मानव इतिहास में संख्या-पद्धतियों के विकास को मेसोपोटामिया, मिस्र, माया, चीनी और भारतीय सभ्यताओं से आधुनिक हिंदू-अरबी दशमलव पद्धति तक का सफर दिखाता है।

  • 1एक-से-एक सम्बन्ध (one-to-one mapping) गिनती का आधारभूत सिद्धांत है — प्रत्येक वस्तु को एक अद्वितीय प्रतीक या छड़ी से जोड़ना
  • 2मील-पत्थर संख्याएँ (landmark numbers) संख्या-पद्धतियों में संदर्भ-बिंदु हैं — मिस्र में 1, 10, 100, 1000; रोमन में I, V, X, L, C, D, M
  • 3आधार-n पद्धति में मील-पत्थर संख्याएँ n की घातें होती हैं (मिस्र = आधार-10; मेसोपोटामिया = आधार-60)
  • 4स्थानीय मान (positional notation) में अंक का स्थान यह बताता है कि वह आधार की कितनी घात है — कम प्रतीकों से असीमित संख्याएँ लिखना संभव
  • 5शून्य (0) का आविष्कार प्राचीन भारत में लगभग 200 सामान्य संवत् पूर्व हुआ; बख्शाली पांडुलिपि में इसका प्रथम ज्ञात प्रयोग मिलता है; आर्यभट्ट (499 ई.) ने दशमलव पद्धति को पूरी तरह स्पष्ट किया
04

चतुर्भुज

कक्षा 8 गणित एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (गणित प्रकाश) का अध्याय 4, "चतुर्भुज", चार भुजाओं वाली आकृतियों — आयत, वर्ग, समांतर चतुर्भुज, समचतुर्भुज, पतंग और समलंब — के गुणधर्मों को ज्यामितीय तर्कण, सर्वांगसमता और विकर्ण-गुणों के आधार पर समझाता है।

  • 1किसी भी चतुर्भुज के सभी कोणों का योग सदैव 360° होता है
  • 2आयत वह चतुर्भुज है जिसमें सभी कोण समकोण (90°) हों; इसके विकर्ण समान लंबाई के होते हैं और परस्पर द्विभाजक होते हैं
  • 3वर्ग वह विशेष आयत है जिसमें सभी भुजाएँ समान हों; विकर्ण एक-दूसरे को 90° पर द्विभाजित करते हैं
  • 4समांतर चतुर्भुज में सम्मुख भुजाएँ समानांतर और समान होती हैं, सम्मुख कोण बराबर होते हैं, और विकर्ण परस्पर द्विभाजक होते हैं
  • 5समचतुर्भुज में चारों भुजाएँ समान होती हैं; विकर्ण परस्पर 90° पर द्विभाजित करते हैं और कोणों को भी द्विभाजित करते हैं
05

संख्याओं का खेल

कक्षा 8 गणित एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (गणित प्रकाश) का अध्याय 5, "संख्याओं का खेल", संख्याओं के प्रतिरूप और गुणधर्मों की खोज कराता है — सम-विषम संख्याओं की समता, 2, 3, 4, 5, 9, 10 और 11 की विभाज्यता के नियम, अंकीय मूल (digital root), बीजगणितीय प्रमाण और संख्या-पहेलियाँ।

  • 1समता के नियम: विषम ± विषम = सम; सम ± सम = सम; विषम ± सम = विषम; '+' और '–' के मध्य परिवर्तन सदैव सम राशि जोड़ता या घटाता है
  • 22, 5, 10 से विभाज्यता इकाई अंक से निर्धारित होती है (0 → 10 से; 0 या 5 → 5 से; सम अंक → 2 से)
  • 39 से विभाज्यता: यदि अंकों का योग 9 से विभाज्य हो; अंकीय मूल (बार-बार अंकों का योग) 9 से भाग पर शेषफल के बराबर होता है
  • 43 से विभाज्यता: यदि अंकों का योग 3 से विभाज्य हो
  • 511 से विभाज्यता: विषम स्थानों के अंकों का योग − सम स्थानों के अंकों का योग; यदि अंतर 0 या 11 का गुणज हो तो संख्या 11 से विभाज्य
06

जितना बाँटेंगे उतना बढ़ेगा

कक्षा 8 गणित एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (गणित प्रकाश) का अध्याय 6, "जितना बाँटेंगे उतना बढ़ेगा", गुणन का वितरण गुणधर्म, बीजगणितीय सर्वसमिकाएँ — (a+b)², (a−b)² और (a+b)(a−b) — तथा इनके उपयोग से मानसिक गणना के शीघ्र तरीके सिखाता है।

  • 1वितरण गुणधर्म: a(b + c) = ab + ac; विस्तार: (a + m)(b + n) = ab + mb + an + mn
  • 2जब गुणनफल ab में b में 1 की वृद्धि हो तो गुणनफल में a की वृद्धि होती है; दोनों में 1 की वृद्धि पर गुणनफल में a + b + 1 की वृद्धि
  • 3वर्ग-योग सर्वसमिका: (a + b)² = a² + 2ab + b²
  • 4वर्ग-अंतर सर्वसमिका: (a − b)² = a² − 2ab + b²
  • 5योग-गुणा-अंतर सर्वसमिका: (a + b)(a − b) = a² − b²
07

समानुपातिक तर्कण-1

कक्षा 8 गणित एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (गणित प्रकाश) का अध्याय 7, "समानुपातिक तर्कण-1", यह पहचानना सिखाता है कि कब दो राशियाँ समान गुणक से बदलती हैं, अनुपातों को सरलतम रूप में व्यक्त करना, त्रैराशिक नियम (Trairasika) से अज्ञात मान ज्ञात करना और किसी राशि को दिए गए अनुपात में बाँटना।

  • 1अनुपात a : b का अर्थ: पहली राशि की प्रत्येक 'a' इकाई के लिए दूसरी राशि की 'b' इकाई होती है; a और b अनुपात के पद हैं
  • 2दो अनुपात समानुपातिक (a : b :: c : d) हैं जब उनके पद एक समान गुणक से बदलें — सरलतम रूप में तुलना या गुणनखंड-परीक्षण (ad = bc) से जाँचें
  • 3अनुपात को सरलतम रूप में लाने के लिए दोनों पदों को उनके महत्तम समापवर्तक (म.स.प.) से विभाजित करें
  • 4त्रैराशिक नियम (Trairasika): यदि a : b :: c : d हो तो d = (b × c) / a; उदाहरण — 6 गिलास नींबू पानी में 10 चम्मच चीनी, तो 18 गिलास के लिए d = (10 × 18) / 6 = 30 चम्मच
  • 5किसी राशि x को m : n में बाँटने पर भाग हैं: m × x/(m+n) और n × x/(m+n)