सारांश
कक्षा 7 गणित एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (गणित प्रकाश) का अध्याय 6, "संख्याओं का खेल", संख्याओं की समानता (सम-विषम), जादुई वर्ग, विरहांक-फिबोनाची अनुक्रम तथा क्रिप्टारिथमेटिक पहेलियों के माध्यम से गणितीय तर्क-क्षमता को पहेलियों और गतिविधियों से विकसित करता है।
- सम-विषम समानता — एक तर्क-उपकरण — अध्याय सम और विषम संख्याओं के योगफल के नियमों को तर्क के औजार के रूप में विकसित करता है: किसी भी कितनी भी सम संख्याओं का योग सदैव सम होता है; विषम गिनती की विषम संख्याओं का योग विषम होता है। इससे बिना गणना किए यह तय किया जा सकता है कि कोई पहेली हल हो सकती है या नहीं।
- जादुई वर्ग और संरचित ग्रिड — 3×3 जादुई वर्ग में 1–9 संख्याएँ रखी जाती हैं जिनका जादुई योग 15 होता है (क्योंकि 1+2+...+9=45, 3 पंक्तियों में बराबर बँटते हैं)। केंद्र सदैव 5 होता है और 1 तथा 9 कोने में नहीं आ सकते। ऐतिहासिक चौतीसा यंत्र (खजुराहो, 10वीं शताब्दी) पहला ज्ञात 4×4 जादुई वर्ग है जिसका जादुई योग 34 है।
- विरहांक अनुक्रम — भारतीय गणित की देन — 1, 2, 3, 5, 8, 13, 21, 34, ... वाला अनुक्रम — जिसे पश्चिम में फिबोनाची अनुक्रम कहा जाता है — भारतीय विद्वान विरहांक ने लगभग 700 ईसवी में प्राकृत छंदशास्त्र में लघु (1 मात्रा) और दीर्घ (2 मात्रा) अक्षरों की लय गिनते हुए खोजा था। इसके पूर्ववर्ती भारतीय विद्वानों में पिंगल (लगभग 300 ईसा पूर्व) और हेमचंद्र (लगभग 1150 ईसवी) शामिल हैं।
- क्रिप्टारिथमेटिक — अंक-खोज की पहेलियाँ — अक्षर-विज्ञान पहेलियों (क्रिप्टारिथम) में प्रत्येक अक्षर एक अद्वितीय अंक 0–9 को दर्शाता है। स्थानीय मान के तर्क से अंक निकाले जाते हैं, जैसे TTT योग देखकर T = 5 ज्ञात करना।
मुख्य बिंदु और सूत्र
- 01सम संख्या को युग्मों में व्यवस्थित किया जा सकता है; विषम संख्या युग्मों के संग्रह से एक अधिक होती है।
- 02किसी भी कितनी भी सम संख्याओं का योग सदैव सम होता है।
- 03दो विषम संख्याओं का योग सदैव सम होता है; विषम गिनती की विषम संख्याओं का योग विषम होता है।
- 04किन्हीं 5 विषम संख्याओं का योग कभी भी 30 (सम संख्या) नहीं हो सकता — यह समानता तर्क का व्यावहारिक उदाहरण है।
- 05nवीं सम संख्या का सूत्र 2n है; nवीं विषम संख्या का सूत्र 2n − 1 है।
- 063×3 जादुई वर्ग (1–9 संख्याओं से): जादुई योग = 15, केंद्र = 5, कोनों में 1 और 9 नहीं आ सकते।
- 07चौतीसा यंत्र — खजुराहो के पार्श्वनाथ जैन मंदिर में 10वीं शताब्दी का पहला ज्ञात 4×4 जादुई वर्ग; प्रत्येक पंक्ति, स्तंभ और विकर्ण का योग 34 है।
- 08लो शू वर्ग — प्राचीन चीन का 2000 से अधिक वर्ष पुराना पहला ज्ञात जादुई वर्ग।
- 09विरहांक अनुक्रम: 1, 2, 3, 5, 8, 13, 21, 34, ... — प्रत्येक पद पिछले दो पदों का योग है; इसे विरहांक ने लगभग 700 ईसवी में छंदशास्त्र के संदर्भ में वर्णित किया।
- 10क्रिप्टारिथम में प्रत्येक अक्षर एक अद्वितीय अंक 0–9 को दर्शाता है; स्थानीय मान के तर्क से हल निकाला जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
01अध्याय 6 'संख्याओं का खेल' किस बारे में है?
यह अध्याय पाँच क्षेत्रों का अन्वेषण करता है: संख्या अनुक्रमों में जानकारी पढ़ना, सम-विषम समानता के नियम, संख्या ग्रिड और जादुई वर्ग, भारतीय छंदशास्त्र से जन्मा विरहांक अनुक्रम, और क्रिप्टारिथमेटिक पहेलियाँ जहाँ अंकों की जगह अक्षर होते हैं।
02समानता (parity) क्या है?
समानता संख्या के सम या विषम होने का गुण है। सम संख्या को युग्मों में बिना शेष व्यवस्थित किया जा सकता है; विषम संख्या युग्मों के संग्रह से एक अधिक होती है। अध्याय इसका उपयोग यह तय करने में करता है कि कोई पहेली हल हो सकती है या नहीं।
03सम और विषम संख्याओं के योग के नियम क्या हैं?
सम + सम = सम। विषम + विषम = सम। सम + विषम = विषम। किसी भी कितनी भी सम संख्याओं का योग सदैव सम होता है। विषम गिनती की विषम संख्याओं का योग विषम होता है; सम गिनती की विषम संख्याओं का योग सम होता है।
045 विषम संख्याओं का योग 30 क्यों नहीं हो सकता?
पाँच (विषम गिनती) विषम संख्याओं का योग सदैव विषम होता है। 30 सम संख्या है, इसलिए कोई भी पाँच विषम संख्याएँ चुनने पर उनका योग 30 कभी नहीं बनेगा।
053×3 जादुई वर्ग का जादुई योग क्या है और केंद्र में कौन-सी संख्या होती है?
1–9 संख्याओं वाले 3×3 जादुई वर्ग का जादुई योग 15 होता है (क्योंकि 1+2+...+9=45, 3 पंक्तियों में बराबर)। केंद्र में सदैव 5 होता है; 1 और 9 कोने में नहीं रखे जा सकते।
06चौतीसा यंत्र क्या है?
चौतीसा यंत्र पहला ज्ञात 4×4 जादुई वर्ग है। यह खजुराहो के पार्श्वनाथ जैन मंदिर में 10वीं शताब्दी के अभिलेख पर अंकित है। इसकी प्रत्येक पंक्ति, स्तंभ और विकर्ण का योग 34 होता है — 'चौतीसा' का अर्थ ही 34 है।
07विरहांक अनुक्रम क्या है और इसकी खोज कैसे हुई?
विरहांक अनुक्रम है: 1, 2, 3, 5, 8, 13, 21, 34, ... — प्रत्येक पद पिछले दो पदों का योग है। भारतीय विद्वान विरहांक ने इसे लगभग 700 ईसवी में प्राकृत छंदों में लघु (1 मात्रा) और दीर्घ (2 मात्रा) अक्षरों से बनने वाली लयों की गिनती करते हुए खोजा था।
08इसे फिबोनाची संख्याओं की जगह विरहांक संख्याएँ क्यों कहा जाता है?
इतालवी गणितज्ञ फिबोनाची ने 1202 ईसवी में इन संख्याओं के बारे में लिखा, किंतु विरहांक ने इन्हें उनसे लगभग 500 वर्ष पहले — लगभग 700 ईसवी में — वर्णित किया था। पूर्ववर्ती भारतीय योगदान में पिंगल (लगभग 300 ईसा पूर्व), गोपाल (लगभग 1135 ईसवी) और हेमचंद्र (लगभग 1150 ईसवी) शामिल हैं।
09क्रिप्टारिथम क्या है और इसे कैसे हल करते हैं?
क्रिप्टारिथम (अक्षर-विज्ञान पहेली) में प्रत्येक अंक को एक अक्षर से बदला जाता है; प्रत्येक अक्षर एक अद्वितीय अंक 0–9 को दर्शाता है। स्थानीय मान के तर्क से अंक निकाले जाते हैं — जैसे T + T + T का इकाई अंक भी T हो तो T = 5।
10ग्रिड पहेली में हल न होने की पहचान कैसे करें?
3×3 ग्रिड में 1–9 संख्याओं से भरने पर पंक्ति और स्तंभ योग 6 (=1+2+3) से 24 (=9+8+7) के बीच होना चाहिए। यदि किसी घेरे का अपेक्षित योग इस सीमा से बाहर हो तो पहेली हल नहीं हो सकती।
11क्या गणित प्रकाश कक्षा 7 अध्याय 6 की पीडीएफ निःशुल्क डाउनलोड के लिए उपलब्ध है?
हाँ, यह पीडीएफ ncerthindi.com पर बिल्कुल निःशुल्क उपलब्ध है। कोई पंजीकरण या भुगतान आवश्यक नहीं है।
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