अध्याय 7: तीन प्रतिच्छेदी रेखाओं की एक कथा
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कक्षा 7 गणित एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (गणित प्रकाश) का अध्याय 7, "तीन प्रतिच्छेदी रेखाओं की एक कथा", परकार और मापक से त्रिभुजों की रचना, त्रिभुज असमिका, त्रिभुज के कोणों का योग (सदैव 180°) तथा भुजाओं और कोणों के आधार पर त्रिभुजों का वर्गीकरण सिखाता है।
- त्रिभुज की रचना — अध्याय में तीन भुजाओं (SSS), दो भुजाओं और अंतर्गत कोण (SAS) तथा दो कोणों और अंतर्गत भुजा (ASA) से परकार और मापक द्वारा त्रिभुज बनाने की विधियाँ सिखाई गई हैं। समबाहु त्रिभुज में दो समान त्रिज्याओं के चापों के प्रतिच्छेद बिंदु से तीसरा शीर्ष मिलता है।
- त्रिभुज असमिका — कब त्रिभुज संभव है? — तीन लंबाइयों का समूह तब त्रिभुज असमिका को संतुष्ट करता है जब प्रत्येक लंबाई अन्य दो के योग से कम हो। जैसे 10, 15, 30 — 30 > 10+15 — यह नियम न पूरा करने से त्रिभुज नहीं बनता।
- कोणों का योग — 180° — अध्याय का केंद्रीय प्रमाण: किसी भी त्रिभुज के तीनों कोणों का योग सदैव 180° होता है। इसे शीर्ष A से आधार BC के समांतर रेखा खींचकर सिद्ध किया जाता है — यह विधि यूक्लिड की 'The Elements' में भी है (यूक्लिड लगभग 300 ईसा पूर्व)।
- संबंधित अवधारणाएँ और वर्गीकरण — बाहरी कोण (दो अ-आसन्न आंतरिक कोणों के योग के बराबर), शीर्षलम्ब (प्रत्येक शीर्ष से सम्मुख भुजा पर लंब), और भुजाओं व कोणों के आधार पर त्रिभुजों का वर्गीकरण — समबाहु, समद्विबाहु, विषमबाहु; न्यून कोण, समकोण, अधिक कोण।
मुख्य बिंदु और सूत्र
- 01समबाहु त्रिभुज में तीनों भुजाएँ समान होती हैं; परकार से दोनों सिरों से समान त्रिज्या के चाप खींचकर तीसरा शीर्ष C पाया जाता है।
- 02किन्हीं तीन दी हुई भुजाओं वाले त्रिभुज की रचना: एक भुजा आधार मानें, दोनों सिरों से शेष दो त्रिज्याओं के चाप खींचें — प्रतिच्छेद बिंदु तीसरा शीर्ष है।
- 03त्रिभुज असमिका: प्रत्येक भुजा अन्य दो के योग से कम होनी चाहिए; 10, 15, 30 इस परीक्षण में असफल होते हैं (30 > 10+15)।
- 04दीर्घतम भुजा को आधार मानकर दोनों सिरों से छोटी-छोटी दो त्रिज्याओं के वृत्त खींचने पर — यदि असमिका पूरी होती है — वृत्त आंतरिक रूप से दो बिंदुओं पर मिलते हैं।
- 05SAS (दो भुजाएँ और अंतर्गत कोण): एक भुजा आधार बनाएँ, एक सिरे पर दिया हुआ कोण बनाएँ, उस भुजा पर दूसरी भुजा की लंबाई अंकित करें, दोनों सिरे जोड़ें।
- 06ASA (दो कोण और अंतर्गत भुजा): भुजा आधार बनाएँ, दोनों सिरों पर कोण बनाएँ; यदि दोनों कोणों का योग 180° या अधिक हो तो त्रिभुज नहीं बनेगा।
- 07किसी त्रिभुज के तीनों कोणों का योग सदैव 180° होता है।
- 08उपपत्ति: शीर्ष A से आधार BC के समांतर रेखा खींचने पर एकांतर कोणों द्वारा A पर तीनों कोण सरल रेखा (180°) बनाते हैं — यूक्लिड की 'The Elements' (लगभग 300 ईसा पूर्व)।
- 09बहिष्कोण (बाहरी कोण): त्रिभुज की एक भुजा बढ़ाने पर बनने वाला कोण दोनों अ-आसन्न आंतरिक कोणों के योग के बराबर होता है।
- 10शीर्षलम्ब: प्रत्येक शीर्ष से सम्मुख भुजा पर खींचा गया लंब रेखाखंड; प्रत्येक त्रिभुज में तीन शीर्षलम्ब होते हैं।
- 11भुजा के आधार पर वर्गीकरण: समबाहु (तीनों समान), समद्विबाहु (दो समान), विषमबाहु (सभी भिन्न)। कोण के आधार पर: न्यून कोण (सभी न्यून), समकोण (एक 90°), अधिक कोण (एक अधिक कोण)।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
01अध्याय 7 'तीन प्रतिच्छेदी रेखाओं की एक कथा' किस बारे में है?
यह अध्याय परकार और मापक से त्रिभुजों की रचना, त्रिभुज असमिका (कब त्रिभुज बन सकता है), कोणों का योग 180° की उपपत्ति, बाहरी कोण, शीर्षलम्ब, और भुजाओं व कोणों के आधार पर त्रिभुजों के वर्गीकरण के बारे में है।
02परकार से समबाहु त्रिभुज कैसे बनाते हैं?
आधार AB = 4 से.मी. खींचें। A केंद्र से 4 से.मी. त्रिज्या का चाप खींचें, फिर B केंद्र से भी 4 से.मी. त्रिज्या का चाप खींचें। दोनों चापों का प्रतिच्छेद बिंदु C है। AC और BC जोड़ने पर समबाहु त्रिभुज ABC प्राप्त होता है।
03त्रिभुज असमिका क्या है?
त्रिभुज असमिका कहती है कि तीन दी हुई लंबाइयों में प्रत्येक लंबाई अन्य दो के योग से कम होनी चाहिए। उदाहरण: 3, 4, 5 — असमिका पूरी होती है। 10, 15, 30 — 30 > 10+15 — असमिका पूरी नहीं होती, त्रिभुज नहीं बनेगा।
04बिना रचना किए कैसे जानें कि त्रिभुज बन सकता है या नहीं?
केवल यह जाँचें कि दीर्घतम भुजा अन्य दो के योग से कम है या नहीं। यदि है तो त्रिभुज बनेगा; यदि बराबर या अधिक है तो नहीं बनेगा।
05SAS विधि से त्रिभुज कैसे बनाते हैं?
दी हुई एक भुजा को आधार बनाएँ। एक सिरे पर दिया हुआ अंतर्गत कोण बनाएँ। उस भुजा पर दूसरी दी हुई भुजा की लंबाई अंकित करें — यही तीसरा शीर्ष है। तीसरे शीर्ष को दूसरे सिरे से जोड़ें।
06ASA विधि से त्रिभुज कैसे बनाते हैं?
अंतर्गत भुजा को आधार बनाएँ। दोनों सिरों पर दिए हुए दोनों कोण बनाएँ। दोनों नई भुजाएँ जहाँ मिलती हैं वह तीसरा शीर्ष है। यदि दोनों कोणों का योग 180° या अधिक हो तो त्रिभुज संभव नहीं।
07त्रिभुज के कोणों के योग की उपपत्ति क्या है?
शीर्ष A से आधार BC के समांतर रेखा खींचें। एकांतर कोण गुण से — तिर्यक रेखाओं AB और AC के साथ — A पर बने दो नए कोण क्रमशः ∠B और ∠C के बराबर होते हैं। A पर तीनों कोण मिलकर सरल रेखा (180°) बनाते हैं, इसलिए ∠A + ∠B + ∠C = 180°। यह विधि यूक्लिड की 'The Elements' (लगभग 300 ईसा पूर्व) में है।
08बाहरी कोण क्या होता है?
त्रिभुज की एक भुजा को बढ़ाने पर आसन्न भुजा के साथ बनने वाला कोण बाहरी कोण है। कोणों के योग गुण से, बाहरी कोण दोनों अ-आसन्न आंतरिक कोणों के योग के बराबर होता है।
09शीर्षलम्ब क्या होता है?
शीर्षलम्ब किसी शीर्ष से सम्मुख भुजा (या उसके विस्तार) पर खींचा गया लंब रेखाखंड है। प्रत्येक त्रिभुज में तीन शीर्षलम्ब होते हैं। समकोण त्रिभुज में एक भुजा स्वयं शीर्षलम्ब होती है।
10त्रिभुजों का वर्गीकरण कैसे होता है?
भुजाओं के आधार पर: समबाहु (तीनों समान), समद्विबाहु (दो समान), विषमबाहु (सभी भिन्न)। कोणों के आधार पर: न्यून कोण त्रिभुज (सभी कोण न्यून), समकोण त्रिभुज (एक कोण 90°), अधिक कोण त्रिभुज (एक कोण अधिक कोण)।
11क्या गणित प्रकाश कक्षा 7 अध्याय 7 की पीडीएफ निःशुल्क डाउनलोड के लिए उपलब्ध है?
हाँ, यह पीडीएफ ncerthindi.com पर निःशुल्क उपलब्ध है। कोई पंजीकरण आवश्यक नहीं है।
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