विज्ञान • कक्षा 6

विज्ञान (जिज्ञासा)

NCERT पाठ्यपुस्तक12 अध्याय

अध्याय नोट्स

विज्ञान (जिज्ञासा) में आप क्या सीखेंगे

विज्ञान (जिज्ञासा) का त्वरित रिवीज़न मैप — हर अध्याय का मूल विचार और पाँच मुख्य बातें। पूरा NCERT PDF और विस्तृत नोट्स पढ़ने के लिए किसी भी अध्याय पर टैप करें।

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विज्ञान का अनूठा संसार

कक्षा 6 विज्ञान एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (जिज्ञासा) का अध्याय 1, "विज्ञान का अनूठा संसार", विज्ञान को देखने, सोचने और कार्य करने के एक सशक्त माध्यम के रूप में प्रस्तुत करता है, तथा वैज्ञानिक विधि को रोजमर्रा के उदाहरणों—जैसे बंद हो गई कलम—के माध्यम से समझाता है।

  • 1विज्ञान देखने, सोचने, समझने और कार्य करने का एक सशक्त माध्यम है जो विश्व के रहस्यों की परतें खोलता है।
  • 2जिज्ञासा विज्ञान सीखने की पहली और सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता है—इसीलिए कक्षा 6 की विज्ञान पाठ्यपुस्तक का नाम 'जिज्ञासा' है।
  • 3वैज्ञानिक विधि के पाँच चरण हैं: रोचक बात का अवलोकन → प्रश्न → अनुमान → प्रयोग/अवलोकन से परीक्षण → परिणामों का विश्लेषण।
  • 4यदि परिणाम अनुमान से मेल न खाएँ तो नया अनुमान लगाया जाता है—यह प्रक्रिया चक्रीय है, रैखिक नहीं।
  • 5विज्ञान एक 'विशाल और अंतहीन जिगसॉ पहेली' की तरह है—प्रत्येक खोज एक टुकड़ा जोड़ती है और नए प्रश्न उत्पन्न करती है।
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सजीव जगत में विविधता

कक्षा 6 विज्ञान एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (जिज्ञासा) का अध्याय 2, "सजीव जगत में विविधता", हमारे आसपास पाए जाने वाले पौधों और जंतुओं की विविधता, उनके वर्गीकरण, विभिन्न आवासों में जीवित रहने में सहायक अनुकूलन, तथा जैव विविधता संरक्षण के महत्व को स्पष्ट करता है।

  • 1जैव विविधता किसी क्षेत्र में पाए जाने वाले पौधों और जंतुओं की विविधता है; प्रत्येक सदस्य की पारितंत्र में अलग भूमिका होती है।
  • 2पौधों को तीन मुख्य समूहों में बाँटा जाता है: शाक (कोमल हरा तना), झाड़ी (भूमि के पास से शाखाएँ निकलती हैं) और वृक्ष (कठोर मोटा तना, ऊँचाई पर शाखाएँ)।
  • 3आरोही (लिपटकर ऊपर चढ़ते हैं) और विसर्पी (भूमि पर फैलते हैं) पौधों की अलग श्रेणियाँ हैं।
  • 4शिरा-विन्यास दो प्रकार का होता है: जालिकारूपी (जैसे—गुड़हल) और समानांतर (जैसे—केला, घास)।
  • 5मूसला जड़ प्रणाली में एक मुख्य जड़ होती है (जैसे—सरसों, चना); रेशेदार जड़ें तने के आधार से निकलती हैं (जैसे—घास, गेहूँ)।
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उचित आहार— स्वस्थ शरीर का आधार

कक्षा 6 विज्ञान एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (जिज्ञासा) का अध्याय 3, "उचित आहार— स्वस्थ शरीर का आधार", भोजन के घटकों (कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, विटामिन, खनिज, रुक्षांश और जल), न्यूनता-जनित रोगों, संतुलित आहार, पोषक-अनाज मिलेट्स तथा खाद्य-मील की अवधारणा को सरल प्रयोगों सहित प्रस्तुत करता है।

  • 1संस्कृत सूक्ति 'अन्नेन जातानि जीवन्ति' का अर्थ है—आहार जीवित प्राणियों को जीवन देता है।
  • 2किसी राज्य का परंपरागत आहार वहाँ उगाई जाने वाली स्थानीय फसलों, मृदा, जलवायु और संस्कृति पर आधारित होता है।
  • 3कार्बोहाइड्रेट (गेहूँ, चावल, आलू, केला) और वसा (घी, मेवे, बीज) ऊर्जा-प्रदायी खाद्य पदार्थ हैं; वसा ऊर्जा संग्रहीत भी करती है।
  • 4प्रोटीन (दालें, पनीर, अंडा, मछली) शरीर-निर्माण करने वाले खाद्य पदार्थ हैं—वृद्धि और मरम्मत में सहायक।
  • 5विटामिन और खनिज सुरक्षात्मक पोषक तत्व हैं जो थोड़ी मात्रा में आवश्यक होते हैं; कमी से विशेष रोग होते हैं।
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चुंबकों को जानें

कक्षा 6 विज्ञान एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (जिज्ञासा) का अध्याय 4, "चुंबकों को जानें", चुंबकों के गुणों, चुंबकीय और अचुंबकीय पदार्थों, चुंबक के दो ध्रुवों (उत्तरी और दक्षिणी), ध्रुवों के बीच आकर्षण-विकर्षण के नियम, तथा चुंबकीय दिक्सूचक के सिद्धांत को प्रयोगों द्वारा समझाता है।

  • 1प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले चुंबकों को 'चुंबक पत्थर' या लॉडस्टोन कहते हैं; विद्यालयों, खिलौनों और पेंसिल बॉक्स में प्रयुक्त चुंबक कृत्रिम चुंबक हैं।
  • 2चुंबकीय पदार्थ (लोहा, निकेल, कोबाल्ट) चुंबक की ओर आकर्षित होते हैं; अचुंबकीय पदार्थ (लकड़ी, प्लास्टिक, काँच, रबड़) आकर्षित नहीं होते।
  • 3प्रत्येक चुंबक के दो ध्रुव होते हैं—उत्तरी ध्रुव और दक्षिणी ध्रुव—जो उसके सिरों पर स्थित होते हैं, जहाँ चुंबकीय बल सबसे अधिक होता है।
  • 4चुंबकीय ध्रुव सदा जोड़े में होते हैं। चुंबक को छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ने पर भी प्रत्येक टुकड़े में दोनों ध्रुव रहते हैं—एकल ध्रुव का अस्तित्व नहीं होता।
  • 5स्वतंत्र रूप से लटका हुआ चुंबक सदा उत्तर-दक्षिण दिशा में ठहरता है, क्योंकि पृथ्वी स्वयं एक विशाल चुंबक की तरह व्यवहार करती है।
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लंबाई एवं गति का मापन

कक्षा 6 विज्ञान एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (जिज्ञासा) का अध्याय 5, "लंबाई एवं गति का मापन", SI मानक मात्रकों (मीटर, सेंटीमीटर, मिलीमीटर, किलोमीटर) का उपयोग करके लंबाई मापने की विधि और संदर्भ बिंदु की अवधारणा के साथ तीन प्रकार की गतियों — रैखिक, वृत्तीय और दोलनी — का परिचय देता है।

  • 1लंबाई का SI मात्रक मीटर (m) है; अन्य मात्रक: किलोमीटर (1 km = 1000 m), सेंटीमीटर (1 m = 100 cm), मिलीमीटर (1 cm = 10 mm)।
  • 2बालिश्त जैसे शारीरिक मात्रक अमानक हैं क्योंकि ये अलग-अलग व्यक्तियों में भिन्न होते हैं — इसीलिए SI मात्रक प्रणाली अपनाई गई।
  • 3प्राचीन भारतीय मापन मात्रकों में अँगुल (अँगुली की चौड़ाई), धनुष और योजन सम्मिलित हैं; अँगुल का प्रयोग परंपरागत शिल्पकार आज भी करते हैं।
  • 4पैमाने से मापते समय: पैमाने को वस्तु के संपर्क में अनुदिश रखें; लंबन त्रुटि से बचने के लिए आँख मापन-बिंदु के ठीक ऊपर रखें।
  • 5यदि पैमाने का शून्य-सिरा टूटा हो तो किसी स्पष्ट अंक (जैसे 1.0 cm) से मापन शुरू करें और दूसरे सिरे के पाठ्यांक में से उसे घटाएँ।
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हमारे आस-पास की सामग्री

कक्षा 6 विज्ञान एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (जिज्ञासा) का अध्याय 6, "हमारे आस-पास की सामग्री", सामग्री की अवधारणा — वस्तुएँ बनाने में प्रयुक्त पदार्थ — से परिचित कराता है और उनके गुणों जैसे द्युति, कठोरता, पारदर्शिता, जल में विलेयता, द्रव्यमान और आयतन का अन्वेषण करते हुए द्रव्य की परिभाषा तक पहुँचता है।

  • 1सामग्री वह पदार्थ या पदार्थों का मिश्रण है जिससे कोई वस्तु बनाई जाती है — उदाहरण: कागज, लकड़ी, काँच, धातु, प्लास्टिक, मिट्टी।
  • 2वर्गीकरण: वस्तुओं या सामग्रियों को समान गुणों के आधार पर समूहों में व्यवस्थित करने की विधि।
  • 3द्युतिमय सामग्रियाँ (जैसे लोहा, ताँबा, सोना) चमकदार होती हैं; द्युतिहीन सामग्रियाँ (जैसे कागज, लकड़ी, रबर) चमकदार नहीं होतीं।
  • 4कठोर सामग्रियाँ दबाने या खरोंचने पर प्रतिरोध करती हैं (जैसे पत्थर, लोहा); नरम सामग्रियाँ आसानी से दब या खुरच जाती हैं (जैसे रबर, स्पंज)।
  • 5पारदर्शी सामग्रियाँ प्रकाश को पूरी तरह पार जाने देती हैं (काँच, जल); पारभासी सामग्रियाँ आंशिक रूप से (फ्रॉस्टेड काँच); अपारदर्शी सामग्रियाँ बिल्कुल नहीं जाने देतीं (लकड़ी, धातु)।
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ताप एवं उसका मापन

कक्षा 6 विज्ञान एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (जिज्ञासा) का अध्याय 7, "ताप एवं उसका मापन", विद्यार्थियों को बताता है कि ताप क्या है, इसे डॉक्टरी और प्रयोगशाला तापमापियों से कैसे मापते हैं, और तीन मापक्रम — सेल्सियस, फारेनहाइट और केल्विन — से इसे कैसे व्यक्त करते हैं।

  • 1ताप किसी पिंड की गरमाहट या ठंडक का विश्वसनीय माप है; स्पर्श-इंद्रिय भ्रामक हो सकती है।
  • 2ताप मापने वाले उपकरण को तापमापी कहते हैं।
  • 3दो सामान्य तापमापी: ज्वरमापी (शरीर के ताप के लिए) और प्रयोगशाला तापमापी (अन्य प्रयोजनों के लिए)।
  • 4स्वस्थ मानव शरीर का सामान्य ताप 37.0 °C (98.6 °F) माना जाता है; सामान्यतः 35 °C से नीचे या 42 °C से ऊपर नहीं जाता।
  • 5पारा विषैला होने के कारण पारे के तापमापियों का स्थान अंकीय तापमापियों ने ले लिया है।
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जल की विविध अवस्थाओं की यात्रा

कक्षा 6 विज्ञान एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (जिज्ञासा) का अध्याय 8, "जल की विविध अवस्थाओं की यात्रा", जल की तीन अवस्थाओं — ठोस (बर्फ), द्रव (जल) और गैस (जलवाष्प) — तथा वाष्पीकरण, संघनन, पिघलना, जमना और जल-चक्र की प्रक्रियाओं का अन्वेषण करता है।

  • 1बर्फ और जल एक ही पदार्थ हैं — जल — जो क्रमशः ठोस और द्रव अवस्था में विद्यमान हैं।
  • 2जल की तीन अवस्थाएँ: ठोस (बर्फ), द्रव (जल) और गैसीय (जलवाष्प)।
  • 3वाष्पीकरण जल का जलवाष्प में परिवर्तन है; यह सामान्य कमरे के ताप पर भी निरंतर होता रहता है।
  • 4संघनन जलवाष्प का द्रव जल में परिवर्तन है; यब जलवाष्प ठंडी सतह के संपर्क में आती है।
  • 5पिघलना (ठोस → द्रव) और जमना (द्रव → ठोस) गर्म या ठंडा करने से होने वाली विपरीत प्रक्रियाएँ हैं।
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दैनिक जीवन में पृथक्करण विधियाँ

कक्षा 6 विज्ञान एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (जिज्ञासा) का अध्याय 9, "दैनिक जीवन में पृथक्करण विधियाँ", मिश्रणों को अलग करने की विभिन्न विधियों — हस्त चयन, थ्रेशिंग, ओसाई, चालन, अवसादन, निस्तारण, निस्यंदन, वाष्पीकरण, मंथन और चुंबकीय पृथक्करण — का परिचय देता है तथा यह समझाता है कि प्रत्येक विधि किस अंतर के आधार पर काम करती है।

  • 1हस्त चयन — आकार, रंग या आकृति के अंतर के आधार पर; उपयोगी जब हटाया जाने वाला अवयव कम मात्रा में हो।
  • 2थ्रेशिंग — कटी फसल की पूलों को लकड़ी के लट्ठे पर पीटकर दाने अलग किए जाते हैं; आधुनिक थ्रेशर ओसाई भी एक साथ करते हैं।
  • 3ओसाई (विनोइंग) — वायु की दिशा में सूप हिलाने से हल्की भूसी उड़ जाती है और भारे दाने नीचे गिरते हैं; बाँस का सूप पारंपरिक उपकरण है।
  • 4चालन — भिन्न आकार के ठोस कणों को चालनी से अलग किया जाता है; बारीक आटा छिद्रों से निकल जाता है और चोकर ऊपर रह जाता है।
  • 5अवसादन — भारे अघुलनशील कण द्रव की तली में जमा होते हैं; निस्तारण में बर्तन झुकाकर ऊपर का स्वच्छ द्रव उँडेला जाता है।
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सजीव— विशेषताओं का अन्वेषण

कक्षा 6 विज्ञान एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (जिज्ञासा) का अध्याय 10, "सजीव— विशेषताओं का अन्वेषण", सजीवों और निर्जीव वस्तुओं के बीच अंतर करने वाली आठ प्रमुख विशेषताओं — गति, पोषण, वृद्धि, श्वसन, उत्सर्जन, उत्तेजनशीलता, जनन और मृत्यु — की पड़ताल करता है तथा पौधों और जंतुओं के जीवन-चक्र का अन्वेषण करता है।

  • 1सजीवों की आठ विशेषताएँ — गति, पोषण, वृद्धि, श्वसन, उत्सर्जन, उत्तेजनशीलता, जनन और मृत्यु। इनमें से किसी एक का अभाव निर्जीव का संकेत है।
  • 2श्वसन का एक भाग है साँस लेना। पौधे पत्तियों की सतह पर उपस्थित सूक्ष्म छिद्रों — रंध्र (स्टोमेटा) — से श्वसन करते हैं।
  • 3उत्सर्जन का अर्थ है अपशिष्ट उत्पादों को शरीर से बाहर निकालना। जंतुओं में पसीना (जल + लवण) और मूत्र उत्सर्जित होते हैं; पौधे अतिरिक्त जल और खनिज पत्तियों पर बूँदों के रूप में उत्सर्जित करते हैं।
  • 4उत्तेजना वह कारक है जो सजीव को अनुक्रिया के लिए प्रेरित करती है — छुईमुई छूने पर पत्तियाँ मोड़ लेती है; आँवले के पत्ते सूर्यास्त के बाद बंद हो जाते हैं।
  • 5बीज के अंकुरण के लिए जल और वायु अनिवार्य हैं; अधिकांश बीजों को प्रकाश की आवश्यकता नहीं होती — प्रकाश अंकुरण के बाद पौध-वृद्धि के लिए चाहिए।
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प्रकृति की अमूल्य संपदा

कक्षा 6 विज्ञान एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (जिज्ञासा) का अध्याय 11, "प्रकृति की अमूल्य संपदा", वायु, जल, सौर ऊर्जा, वन, मृदा, शैल, खनिज और जीवाश्म ईंधन जैसी प्रमुख प्राकृतिक संपदाओं का परिचय देता है और समझाता है कि इन्हें नवीकरणीय और अनवीकरणीय में कैसे वर्गीकृत किया जाए तथा इनका संरक्षण क्यों आवश्यक है।

  • 1वायु का संघटन — नाइट्रोजन 78%, ऑक्सीजन 21%, आर्गन, कार्बन डाइऑक्साइड व अन्य गैसें 1%।
  • 2हम भोजन अथवा जल के बिना कुछ दिन जीवित रह सकते हैं, किंतु ऑक्सीजन के बिना कुछ क्षण भी नहीं।
  • 3चलती हुई वायु पवन कहलाती है; पवनचक्कियाँ पवन ऊर्जा से आटा पीसने, जल उठाने और विद्युत उत्पादन में उपयोगी हैं।
  • 4पृथ्वी की लगभग दो-तिहाई सतह जल से ढकी है — अधिकांश समुद्री खारा जल उपयोग के अयोग्य है; मीठा जल सीमित और बहुमूल्य है।
  • 5वर्षा जल संग्रहण के परंपरागत भारतीय उदाहरण — राजस्थान में बावड़ी और गुजरात में वाव (सीढ़ीदार कुएँ)।
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पृथ्वी से परे

कक्षा 6 विज्ञान एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (जिज्ञासा) का अध्याय 12, "पृथ्वी से परे", तारों, तारा-मंडलों, सौर परिवार, चंद्रमा, क्षुद्रग्रहों, धूमकेतुओं, आकाशगंगा और विश्व-ब्रह्मांड का परिचय देता है तथा यह भी बताता है कि प्राचीन काल में तारों ने दिशा-निर्धारण में कैसे सहायता की।

  • 1तारा-मंडल आकाश के परिभाषित क्षेत्र हैं जिनमें प्रायः पहचाने जाने योग्य तारों के पैटर्न होते हैं; आई.ए.यू. ने आधिकारिक रूप से 88 तारा-मंडल सूचीबद्ध किए हैं।
  • 2ध्रुव तारा (पोलारिस) जो लिटिल डिपर (अर्सा माईनर) का भाग है, उत्तर दिशा में लगभग अचल दिखता है — दिशा-निर्धारण में उपयोगी।
  • 3कैनिस मेजर तारा-मंडल का तारा लुब्धक (सिरियस) रात्रि-आकाश का सबसे चमकीला तारा है; ओरायन तारा-मंडल भारत में दिसंबर से अप्रैल तक सर्वोत्तम देखा जाता है।
  • 4सूर्य एक तारा है — गर्म गैसों का विशाल गोला जो पृथ्वी से लगभग 15 करोड़ किमी दूर है और व्यास में पृथ्वी से लगभग 100 गुना बड़ा है।
  • 5सूर्य से बढ़ती दूरी के क्रम में आठ ग्रह — बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल, बृहस्पति, शनि, यूरेनस, वरुण। आंतरिक चार छोटे और चट्टानी; बाहरी चार विशाल गैस एवं बर्फ के ग्रह।