सारांश
कक्षा 10 भूगोल एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (समकालीन भारत II) का अध्याय 2, "वन एवं वन्य जीव संसाधन", भारत की समृद्ध जैव विविधता, वनों की श्रेणियाँ, संकटग्रस्त प्रजातियों के संरक्षण हेतु परियोजनाओं और पवित्र वनों तथा संयुक्त वन प्रबंधन सहित समुदाय-नेतृत्व वाली संरक्षण रणनीतियों को समाहित करता है।
- जैव विविधता और उसका महत्त्व — भारत विश्व के सर्वाधिक जैव विविध देशों में से एक है जहाँ वनस्पति और वन्य जीव पारिस्थितिक तंत्रों में इस तरह गुँथे हैं कि मानव जीवन को आधार प्रदान करते हैं। इस विविधता की रक्षा स्वस्थ पारितंत्र और फसलों तथा मत्स्यपालन की निरंतरता के लिए अनिवार्य है।
- कानूनी और परियोजना-आधारित संरक्षण — भारतीय वन्य जीव संरक्षण अधिनियम ने संकटग्रस्त प्रजातियों और उनके आवासों की रक्षा के लिए कानूनी ढाँचा प्रदान किया। प्रोजेक्ट टाइगर जैसे राष्ट्रीय अभियान बाघ, गैंडे और मगरमच्छ जैसे विशेष संकटग्रस्त प्राणियों के अस्तित्व को सुनिश्चित करते हैं।
- वनों का वर्गीकरण और प्रबंधन — वनों को स्वामित्व और प्रबंधन के आधार पर आरक्षित, संरक्षित और अवर्गीकृत श्रेणियों में बाँटा जाता है। यह वर्गीकरण यह निर्धारित करता है कि प्रत्येक श्रेणी का उपयोग, संरक्षण और स्थानीय समुदायों के लिए उपलब्धता कैसे होगी।
- समुदाय-नेतृत्व वाला संरक्षण — स्थानीय लोग पवित्र वनों, चिपको और बीज बचाओ आंदोलनों तथा संयुक्त वन प्रबंधन के माध्यम से प्रकृति की रक्षा करते हैं। ये जमीनी प्रयास सरकारी कार्यों की पूरक हैं और संरक्षण को दीर्घकालिक सामुदायिक आजीविका से जोड़ते हैं।
मुख्य बिंदु और सूत्र
- 01जैव विविधता — वनस्पति और वन्य जीवों की विविधता जो पारिस्थितिक तंत्रों में घनिष्ठ रूप से समाकलित है और मानव अस्तित्व को आधार देती है
- 02भारतीय वन्य जीव संरक्षण अधिनियम (1972) — संकटग्रस्त प्रजातियों और आवासों की रक्षा के लिए कानूनी ढाँचा
- 03प्रोजेक्ट टाइगर (1973) — अनुमानित 1,827 से वर्तमान जनसंख्या तक बाघों को बचाने वाला प्रमुख संरक्षण अभियान
- 04वन वर्गीकरण — आरक्षित वन (सर्वाधिक मूल्यवान, कुल का 50% से अधिक), संरक्षित वन (कुल का लगभग एक-तिहाई), अवर्गीकृत वन
- 05पवित्र वन (देवी-देवताओं के वन) — जनजातीय मान्यताओं के कारण स्थानीय समुदायों द्वारा अछूते रखे गए प्राचीन वन
- 06संयुक्त वन प्रबंधन (JFM) — 1988 से वन पुनरुद्धार में स्थानीय समुदायों को सम्मिलित करने वाला कार्यक्रम
- 07सामुदायिक संरक्षण — चिपको आंदोलन, बीज बचाओ आंदोलन, वन्य जीव परंपराओं की रक्षा करने वाले बिश्नोई गाँव
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
01जैव विविधता क्या है और यह क्यों महत्त्वपूर्ण है?
जैव विविधता वनस्पतियों, जीव-जंतुओं और सूक्ष्म जीवों की अत्यंत समृद्ध विविधता है जो परस्पर निर्भरता के अनेक जालों में घनिष्ठ रूप से समाकलित है। यह इसलिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि पेड़-पौधे, जीव-जंतु और सूक्ष्म जीव उस हवा, पानी और मिट्टी को पुनर्जीवित करते हैं जिन पर हम निर्भर हैं। प्राथमिक उत्पादकों के रूप में वन पारिस्थितिक तंत्रों की नींव हैं।
02भारतीय वन्य जीव संरक्षण अधिनियम क्या था और यह कब लागू हुआ?
भारतीय वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम 1972 में लागू किया गया। इसने आवासों की रक्षा के लिए विभिन्न प्रावधान किए, संरक्षित प्रजातियों की अखिल भारतीय सूची प्रकाशित की, और शिकार पर प्रतिबंध लगाकर, आवासों को कानूनी संरक्षण देकर और वन्य जीव व्यापार को प्रतिबंधित करके संकटग्रस्त प्रजातियों की रक्षा का लक्ष्य रखा।
03प्रोजेक्ट टाइगर क्या है और इसे क्यों प्रारंभ किया गया?
प्रोजेक्ट टाइगर 1973 में विश्व के सबसे चर्चित वन्य जीव संरक्षण अभियानों में से एक के रूप में प्रारंभ किया गया। शताब्दी के प्रारंभ में अनुमानित 55,000 बाघों की संख्या शिकार, सिकुड़ते आवासों, शिकार प्रजातियों की कमी और बाघ की खाल तथा हड्डियों के व्यापार के कारण घटकर 1,827 रह गई थी। बाघ संरक्षण को एक संकटग्रस्त प्रजाति को बचाने और बड़े परिमाण के जैव प्रकारों के संरक्षण दोनों दृष्टि से महत्त्वपूर्ण माना जाता है।
04भारत में विभिन्न प्रकार के वन कौन से हैं?
भारत में वनों को तीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है: (i) आरक्षित वन — कुल वन भूमि का आधे से अधिक, संरक्षण की दृष्टि से सर्वाधिक मूल्यवान; (ii) संरक्षित वन — कुल वन क्षेत्र का लगभग एक-तिहाई, आगे के क्षरण से सुरक्षित; (iii) अवर्गीकृत वन — सरकार और निजी व्यक्तियों तथा समुदायों के स्वामित्व वाले अन्य वन और बंजर भूमि।
05पवित्र वन क्या हैं और इनका संरक्षण में क्या महत्त्व है?
पवित्र वन (देवी-देवताओं के वन) वन के ऐसे भाग हैं जिन्हें स्थानीय लोग इस आदिम जनजातीय विश्वास के आधार पर अछूता रखते हैं कि प्रकृति की सभी रचनाओं की रक्षा करनी चाहिए। ये अनादि काल से संरक्षित प्राकृतिक वन हैं। कुछ समुदाय महुआ, कदंब, इमली, आम, पीपल और बरगद जैसे पेड़ों को पवित्र मानकर उनकी रक्षा करते हैं।
06चिपको आंदोलन क्या है और इसने संरक्षण में कैसे योगदान दिया?
चिपको आंदोलन हिमालय क्षेत्र का एक प्रसिद्ध संरक्षण प्रयास है जिसने कई क्षेत्रों में वनोन्मूलन का सफलतापूर्वक प्रतिरोध किया है। इसने यह भी सिद्ध किया है कि देशज प्रजातियों से सामुदायिक वनरोपण अत्यंत सफल हो सकता है। यह आंदोलन इसका उदाहरण है कि स्थानीय समुदाय सरकारी हस्तक्षेप के बिना भी वनों की प्रभावी रक्षा कर सकते हैं।
07संयुक्त वन प्रबंधन (JFM) क्या है और यह कैसे कार्य करता है?
संयुक्त वन प्रबंधन एक कार्यक्रम है जिसमें स्थानीय समुदायों को निम्नीकृत वनों के प्रबंधन और पुनरुद्धार में सम्मिलित किया जाता है। 1988 में ओडिशा द्वारा पहला JFM प्रस्ताव पारित किए जाने से यह औपचारिक रूप से स्थापित हुआ। इसमें स्थानीय ग्राम संस्थाएँ निम्नीकृत वन भूमि पर सुरक्षा गतिविधियाँ करती हैं और बदले में समुदाय के सदस्य गैर-इमारती वन उत्पाद और सफल संरक्षण से प्राप्त इमारती लकड़ी में हिस्सेदारी के हकदार होते हैं।
08भारत में समुदाय वनों और वन्य जीवों का संरक्षण कैसे करते हैं?
समुदाय परंपरागत और आधुनिक दोनों तरीकों से संरक्षण करते हैं: ग्रामीणों द्वारा अछूते रखे गए पवित्र वन; सांस्कृतिक परंपराओं के माध्यम से विशेष पेड़ों की रक्षा; भैंरोदेव डाकव 'सोनचुरी' जैसे वन क्षेत्र जहाँ शिकार प्रतिबंधित है; खनन और बाहरी अतिक्रमण के विरुद्ध आवासों की रक्षा; और संयुक्त वन प्रबंधन, चिपको आंदोलन तथा बीज बचाओ आंदोलन जैसे कार्यक्रमों में भागीदारी।
09सरिस्का बाघ अभयारण्य में सामुदायिक संरक्षण के संदर्भ में क्या हुआ?
राजस्थान के सरिस्का बाघ अभयारण्य में ग्रामीणों ने वन्य जीव संरक्षण अधिनियम का हवाला देते हुए खनन के विरुद्ध संघर्ष किया। ग्रामीण स्वयं आवासों की रक्षा कर रहे हैं और स्पष्ट रूप से सरकारी हस्तक्षेप को नकार रहे हैं, यह मानते हुए कि सामुदायिक प्रबंधन ही उनकी दीर्घकालिक आजीविका सुनिश्चित करेगा।
10भारत में संरक्षित कुछ संकटग्रस्त प्रजातियाँ कौन सी हैं?
पाठ के अनुसार सरकारी संरक्षण प्राप्त संकटग्रस्त प्रजातियों में बाघ, एक सींग वाला गैंडा, कश्मीरी हिरण (हांगुल), तीन प्रकार के मगरमच्छ (अलवण जल, लवण जल और घड़ियाल), एशियाई सिंह, भारतीय हाथी, कृष्णमृग (चिंकारा), महान भारतीय सारंग (गोडावन) और हिम तेंदुआ सम्मिलित हैं। पूरे भारत में इनके शिकार और व्यापार के विरुद्ध कानूनी संरक्षण प्रदान किया गया।
11क्या एनसीईआरटी कक्षा 10 भूगोल की पीडीएफ निःशुल्क डाउनलोड की जा सकती है?
हाँ, एनसीईआरटी कक्षा 10 भूगोल की पाठ्यपुस्तकें बिना किसी पंजीकरण के निःशुल्क डाउनलोड की जा सकती हैं। आप 'वन एवं वन्य जीव संसाधन' सहित सभी अध्यायों तक पहुँच सकते हैं।
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