Social Scienceकक्षा 10

समकालीन भारत

NCERT पाठ्यपुस्तक7 Chapters

Chapter notes

What you'll learn in समकालीन भारत

A quick revision map of समकालीन भारत — the core idea and five key takeaways from each chapter. Tap any chapter to read the full NCERT PDF and detailed notes.

01

संसाधन एवं विकास

कक्षा 10 भूगोल एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (समकालीन भारत II) का अध्याय 1, "संसाधन एवं विकास", यह बताता है कि हमारे पर्यावरण में उपलब्ध वह सब कुछ जो तकनीकी रूप से सुलभ, आर्थिक रूप से व्यवहार्य और सांस्कृतिक रूप से स्वीकार्य हो, मानव के प्रौद्योगिकी और संस्थाओं के साथ अंतर्क्रिया के माध्यम से संसाधन बन जाता है।

  • 1संसाधनों का वर्गीकरण — उत्पत्ति (जैविक/अजैविक), समाप्यता (नवीकरणीय/अनवीकरणीय), स्वामित्व (व्यक्तिगत/सामुदायिक/राष्ट्रीय/अंतरराष्ट्रीय) और विकास की अवस्था के आधार पर
  • 2संसाधन नियोजन में संसाधनों की पहचान, सूचीकरण और उनका प्रौद्योगिकी, कौशल तथा संस्थागत क्षमता से मिलान किया जाता है
  • 3जलोढ़ मिट्टी उत्तरी मैदानों में प्रमुख है; काली मिट्टी दक्कन के पठार पर कपास के लिए उपयुक्त है; लेटेराइट मिट्टी उष्णकटिबंधीय जलवायु में तीव्र निक्षालन से बनती है
  • 4भारत में भूमि उपयोग — शुद्ध बोया क्षेत्र 45.64%, वन 23.41%, स्थायी चारागाह 5.40%, शेष गैर-कृषि उपयोग
  • 5मिट्टी का कटाव मानवीय गतिविधियों (वनोन्मूलन, अतिचारण, खनन, दोषपूर्ण कृषि) और प्राकृतिक शक्तियों (जल, वायु, हिमनद) से होता है
02

वन एवं वन्य जीव संसाधन

कक्षा 10 भूगोल एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (समकालीन भारत II) का अध्याय 2, "वन एवं वन्य जीव संसाधन", भारत की समृद्ध जैव विविधता, वनों की श्रेणियाँ, संकटग्रस्त प्रजातियों के संरक्षण हेतु परियोजनाओं और पवित्र वनों तथा संयुक्त वन प्रबंधन सहित समुदाय-नेतृत्व वाली संरक्षण रणनीतियों को समाहित करता है।

  • 1जैव विविधता — वनस्पति और वन्य जीवों की विविधता जो पारिस्थितिक तंत्रों में घनिष्ठ रूप से समाकलित है और मानव अस्तित्व को आधार देती है
  • 2भारतीय वन्य जीव संरक्षण अधिनियम (1972) — संकटग्रस्त प्रजातियों और आवासों की रक्षा के लिए कानूनी ढाँचा
  • 3प्रोजेक्ट टाइगर (1973) — अनुमानित 1,827 से वर्तमान जनसंख्या तक बाघों को बचाने वाला प्रमुख संरक्षण अभियान
  • 4वन वर्गीकरण — आरक्षित वन (सर्वाधिक मूल्यवान, कुल का 50% से अधिक), संरक्षित वन (कुल का लगभग एक-तिहाई), अवर्गीकृत वन
  • 5पवित्र वन (देवी-देवताओं के वन) — जनजातीय मान्यताओं के कारण स्थानीय समुदायों द्वारा अछूते रखे गए प्राचीन वन
03

जल संसाधन

कक्षा 10 भूगोल एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (समकालीन भारत II) का अध्याय 3, "जल संसाधन", जल की कमी के कारणों, बहुउद्देशीय नदी परियोजनाओं और वर्षाजल संचयन को जल संरक्षण की दीर्घकालिक विधियों के रूप में प्रस्तुत करता है।

  • 1जल-अभाव का कारण अतिदोहन, अत्यधिक उपयोग और असमान वितरण है — केवल कम वर्षा नहीं
  • 2बहुउद्देशीय नदी परियोजनाएँ — सिंचाई, जलविद्युत शक्ति, बाढ़ नियंत्रण और जल आपूर्ति के लिए बाँध
  • 3बाँधों के पर्यावरणीय परिणाम — अवसाद प्रवाह में बाधा, जलीय आवासों का विखंडन, जलाशयों का गाद भरना
  • 4वर्षाजल संचयन विधियाँ — छत से जल संग्रह, भूमिगत टाँके, खड़ीन और जोहड़, बाँस की टपकन सिंचाई
  • 5अंतरराज्यीय जल विवाद — महाराष्ट्र के कोयना मोड़ पर कृष्णा-गोदावरी मामला
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कृषि

कक्षा 10 भूगोल एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (समकालीन भारत II) का अध्याय 4, "कृषि", भारत की कृषि पद्धतियों, कृषि के प्रकारों, तीन मौसमों में फसल प्रतिरूपों और विभिन्न जलवायु तथा मृदा दशाओं में उगाई जाने वाली प्रमुख फसलों के साथ-साथ उन सुधारों को भी प्रस्तुत करता है जिन्होंने भारतीय कृषि को रूपांतरित किया।

  • 1आदिम जीविका कृषि — उत्तर-पूर्व भारत में प्रचलित झूम (slash-and-burn) कृषि
  • 2गहन जीविका कृषि — श्रम-गहन, अधिक रासायनिक निविष्टि, उच्च जनसंख्या दबाव वाले क्षेत्रों में
  • 3वाणिज्यिक कृषि — उच्च उपज वाले बीज, उर्वरक, कीटनाशक का उपयोग; क्षेत्र के अनुसार भिन्नता
  • 4तीन फसल ऋतुएँ — रबी (शीत, अक्टूबर-जून), खरीफ (मानसून, जून-सितंबर), जायद (ग्रीष्म)
  • 5प्रमुख फसलें — चावल (मुख्य फसल, खरीफ), गेहूँ (रबी), मोटे अनाज, दलहन, गन्ना, तिलहन, चाय, कॉफी, कपास, जूट
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खनिज तथा ऊर्जा संसाधन

कक्षा 10 भूगोल एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (समकालीन भारत II) का अध्याय 5, "खनिज तथा ऊर्जा संसाधन", खनिजों के प्रकार एवं उनके पाए जाने के तरीकों के वर्गीकरण, भारत में प्रमुख खनिज भंडारों के वितरण, परंपरागत एवं गैर-परंपरागत ऊर्जा स्रोतों, तथा टिकाऊ संसाधन प्रबंधन में संरक्षण के महत्व को समझाता है।

  • 1लौह एवं अलौह खनिज: धातु-सामग्री के आधार पर वर्गीकरण
  • 2खनिजों की उत्पत्ति के पाँच तरीके: शिराएँ/परतें, अवसादी स्तर, अवशिष्ट निक्षेप, प्लेसर निक्षेप, समुद्री जल
  • 3प्रमुख लौह खनिज: लौह अयस्क (मैग्नेटाइट, हेमेटाइट), मैंगनीज
  • 4प्रमुख अलौह खनिज: तांबा, बॉक्साइट, सीसा, जस्ता, सोना
  • 5अधात्विक खनिज: अभ्रक, चूना-पत्थर
06

विनिर्माण उद्योग

कक्षा 10 भूगोल एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (समकालीन भारत II) का अध्याय 6, "विनिर्माण उद्योग", यह समझाता है कि किस प्रकार उत्पादन कच्चे माल को तैयार माल में बदलता है, उद्योगों को कच्चे माल और स्वामित्व के आधार पर वर्गीकृत करता है, प्रमुख भारतीय उद्योगों की जाँच करता है, और औद्योगिक प्रदूषण नियंत्रण के उपायों पर चर्चा करता है।

  • 1विनिर्माण का अर्थ है कच्चे माल को मूल्यवान तैयार उत्पादों में परिवर्तित करना
  • 2उद्योगों का वर्गीकरण कच्चे माल, स्वामित्व संरचना और पूँजी निवेश के आधार पर
  • 3कृषि-आधारित उद्योग: कृषि कच्चे माल से वस्त्र, चीनी, खाद्य तेल
  • 4खनिज-आधारित उद्योग: खनिज स्रोतों से लोहा-इस्पात, सीमेंट, एल्युमिनियम
  • 5औद्योगिक प्रदूषण में वायु, जल, भूमि और ध्वनि प्रदूषण शामिल हैं जिनके लिए नियंत्रण उपाय आवश्यक हैं
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राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की जीवन रेखाएँ

कक्षा 10 भूगोल एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (समकालीन भारत II) का अध्याय 7, "राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की जीवन रेखाएँ", यह बताता है कि किस प्रकार परिवहन, संचार और व्यापार भारत की अर्थव्यवस्था को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण नेटवर्क हैं, जो वस्तुओं और सेवाओं की आवाजाही को संभव बनाते हैं और भारत को वैश्विक बाजारों से जोड़ते हैं।

  • 1सड़क मार्ग: भारत का दूसरा सबसे बड़ा सड़क नेटवर्क (62.16 लाख किमी); दिल्ली-कोलकाता-चेन्नई-मुंबई को जोड़ने वाले स्वर्णिम चतुर्भुज सुपर राजमार्ग सहित
  • 2रेल मार्ग: परिवहन का प्रमुख साधन; 17 क्षेत्रों में 67,956 किमी नेटवर्क; 150+ वर्षों से प्रमुख एकीकरण शक्ति
  • 3जल मार्ग: 111 राष्ट्रीय जलमार्ग; 14,500 किमी आंतरिक नौ-परिवहन; 12 प्रमुख बंदरगाहों से समुद्र द्वारा विदेशी व्यापार का 95%
  • 4वायु मार्ग: सबसे तेज साधन जो कठिन भूभाग और दूरस्थ क्षेत्रों को जोड़ता है; उड़ान योजना क्षेत्रीय संपर्क को बढ़ावा देती है
  • 5पाइपलाइन: कच्चे तेल, पेट्रोलियम उत्पादों और प्राकृतिक गैस का परिवहन; नेटवर्क 1,700 किमी से 18,500 किमी तक विस्तारित

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