Scienceकक्षा 10

विज्ञान

NCERT पाठ्यपुस्तक13 Chapters

Chapter notes

What you'll learn in विज्ञान

A quick revision map of विज्ञान — the core idea and five key takeaways from each chapter. Tap any chapter to read the full NCERT PDF and detailed notes.

01

रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण

कक्षा 10 विज्ञान एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक का अध्याय 1, "रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण", बताता है कि रासायनिक अभिक्रियाएँ क्या होती हैं, रासायनिक समीकरण कैसे लिखते और संतुलित करते हैं, रासायनिक अभिक्रियाओं के प्रमुख प्रकार (संयोजन, अपघटन, विस्थापन, द्विविस्थापन और उपचयन-अपचयन), तथा उपचयन के दैनिक जीवन में प्रभाव जैसे संक्षारण और विकृतगंधिता।

  • 1रासायनिक अभिक्रिया की पहचान अवस्था परिवर्तन, रंग परिवर्तन, ताप परिवर्तन या गैस के उत्सर्जन से की जाती है।
  • 2रासायनिक समीकरणों को द्रव्यमान संरक्षण के नियम को संतुष्ट करने के लिए संतुलित किया जाना चाहिए — दोनों पक्षों पर प्रत्येक तत्व के परमाणुओं की संख्या बराबर होती है।
  • 3संयोजन अभिक्रियाओं में दो या अधिक अभिकारकों से एक उत्पाद बनता है; अपघटन अभिक्रियाएँ इसके विपरीत होती हैं — एक पदार्थ दो या अधिक में टूट जाता है।
  • 4विस्थापन अभिक्रियाएँ तब होती हैं जब अधिक क्रियाशील तत्व किसी यौगिक में से कम क्रियाशील तत्व को विस्थापित करता है; द्विविस्थापन अभिक्रियाओं में दो यौगिकों के बीच आयनों का आदान-प्रदान होता है।
  • 5ऊष्माक्षेपी अभिक्रियाएँ ऊष्मा मुक्त करती हैं (जैसे श्वसन, प्राकृतिक गैस का दहन); ऊष्माशोषी अभिक्रियाएँ ऊर्जा अवशोषित करती हैं (जैसे जल का विद्युत अपघटन, ऊष्मा या प्रकाश द्वारा अपघटन)।
02

अम्ल, क्षारक एवं लवण

कक्षा 10 विज्ञान एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक का अध्याय 2, "अम्ल, क्षारक एवं लवण", उनके रासायनिक गुणों, pH पैमाने (0–14), उदासीनीकरण अभिक्रियाओं तथा सामान्य नमक से प्राप्त होने वाले महत्त्वपूर्ण लवणों — बेकिंग सोडा, धावन सोडा, विरंजक चूर्ण और प्लास्टर ऑफ पेरिस — को कवर करता है।

  • 1अम्ल नीले लिटमस को लाल करते हैं और जल में H⁺(aq) आयन उत्पन्न करते हैं; क्षारक लाल लिटमस को नीला करते हैं और जल में OH⁻(aq) आयन उत्पन्न करते हैं।
  • 2अम्ल + धातु → लवण + हाइड्रोजन गैस; धातु कार्बोनेट + अम्ल → लवण + कार्बन डाइऑक्साइड + जल।
  • 3उदासीनीकरण अभिक्रिया: अम्ल + क्षारक → लवण + जल; उदाहरण — NaOH(aq) + HCl(aq) → NaCl(aq) + H₂O(l)।
  • 4pH पैमाना (0–14) हाइड्रोजन आयन सांद्रता को मापता है: pH 7 उदासीन, 7 से कम अम्लीय, 7 से अधिक क्षारकीय। मानव शरीर pH 7.0–7.8 के बीच कार्य करता है।
  • 5मुँह का pH 5.5 से नीचे गिरने पर दाँतों में सड़न शुरू होती है; टूथपेस्ट क्षारकीय होते हैं ताकि अतिरिक्त अम्ल को उदासीन किया जा सके। अम्ल वर्षा का pH 5.6 से कम होता है।
03

धातु एवं अधातु

कक्षा 10 विज्ञान एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक का अध्याय 3, "धातु एवं अधातु", उनके भौतिक और रासायनिक गुणों, सक्रियता श्रेणी, अयस्कों से निष्कर्षण, आयनिक यौगिक निर्माण, संक्षारण और मिश्रधातुओं की व्याख्या करता है।

  • 1धातुएँ चमकदार, आघातवर्ध्य, तन्य और ऊष्मा-विद्युत की सुचालक होती हैं; अधिकांश सामान्य तापमान पर ठोस होती हैं, पारा एकमात्र तरल धातु है।
  • 2अधातुएँ सामान्यतः कुचालक और अनाघातवर्ध्य होती हैं; अपवादों में ग्रेफाइट (विद्युत सुचालक) और आयोडीन (चमकदार) शामिल हैं।
  • 3धातुएँ ऑक्सीजन से अभिक्रिया करके क्षारकीय ऑक्साइड बनाती हैं; उभयधर्मी ऑक्साइड जैसे एलुमिनियम ऑक्साइड (Al₂O₃) और जिंक ऑक्साइड अम्ल और क्षारक दोनों से अभिक्रिया करते हैं।
  • 4सक्रियता श्रेणी धातुओं को सर्वाधिक सक्रिय (K, Na, Ca) से न्यूनतम सक्रिय (Cu, Hg, Ag, Au) के क्रम में व्यवस्थित करती है; अधिक सक्रिय धातु कम सक्रिय धातु को उसके लवण विलयन से विस्थापित कर देती है।
  • 5सक्रियता श्रेणी में ऊपर स्थित धातुएँ (Na, Mg, Al) वैद्युत-अपघटनी अपचयन द्वारा निष्कर्षित की जाती हैं; मध्यम सक्रिय धातुएँ (Zn, Fe) भर्जन/निस्तापन के बाद कार्बन के साथ अपचयन द्वारा प्राप्त की जाती हैं।
04

कार्बन एवं उसके यौगिक

कक्षा 10 विज्ञान एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक का अध्याय 4, "कार्बन एवं उसके यौगिक", यह स्पष्ट करता है कि कार्बन की चतुःसंयोजकता और शृंखलन के कारण सहसंयोजी आबंध द्वारा लाखों यौगिक बनते हैं, और इसमें हाइड्रोकार्बन, एथेनॉल, एथेनोइक अम्ल, साबुन तथा अपमार्जकों जैसे प्रमुख कार्बन यौगिकों को शामिल किया गया है।

  • 1कार्बन की संयोजकता चार (चतुःसंयोजी) होती है और यह कार्बन या अन्य तत्वों — हाइड्रोजन, ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, सल्फर और क्लोरीन — के साथ इलेक्ट्रॉन साझा करके सहसंयोजी आबंध बनाता है।
  • 2शृंखलन — अन्य कार्बन परमाणुओं से आबंध बनाने की कार्बन की क्षमता — से लंबी श्रृंखलाएँ, शाखित श्रृंखलाएँ और वलय संरचनाएँ बनती हैं, जिसके परिणामस्वरूप लाखों स्थायी कार्बन यौगिक अस्तित्व में आते हैं।
  • 3संतृप्त हाइड्रोकार्बन (ऐल्केन) में केवल एकल आबंध होते हैं और ये अपेक्षाकृत कम क्रियाशील होते हैं; असंतृप्त हाइड्रोकार्बन (ऐल्कीन, ऐल्काइन) में द्विआबंध या त्रिआबंध होते हैं और ये अधिक क्रियाशील होते हैं।
  • 4समजातीय श्रेणी एक ही क्रियात्मक समूह और –CH₂– की एक इकाई के अंतर से भिन्न यौगिकों का परिवार है; क्रमिक सदस्यों के आणविक द्रव्यमान में 14 u का अंतर होता है।
  • 5एथेनॉल सोडियम के साथ अभिक्रिया करके हाइड्रोजन गैस देता है और गर्म सांद्र H₂SO₄ द्वारा निर्जलीकरण पर एथीन बनाता है; एथेनोइक अम्ल (एसिटिक अम्ल) एथेनॉल के साथ एस्टरीकरण अभिक्रिया करके मधुर गंध वाले एस्टर बनाता है।
05

जैव प्रक्रम

कक्षा 10 विज्ञान एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक का अध्याय 5, "जैव प्रक्रम", उन आवश्यक संधारण कार्यों — पोषण, श्वसन, वहन और उत्सर्जन — को कवर करता है जो सभी सजीवों को जीवित रहने और अपनी व्यवस्थित आंतरिक संरचनाओं की मरम्मत के लिए निरंतर करने होते हैं।

  • 1स्वपोषियों में प्रकाश संश्लेषण सूर्य प्रकाश और क्लोरोफिल की सहायता से CO₂ और जल को कार्बोहाइड्रेट में परिवर्तित करता है; रंध्र गैस विनिमय नियंत्रित करते हैं और द्वार कोशिकाएँ रंध्र का खुलना-बंद होना नियंत्रित करती हैं।
  • 2मानव पाचन में लार-एमाइलेज मुँह में स्टार्च पर क्रिया करता है, आमाशय में जठर ग्रंथियाँ HCl और पेप्सिन स्रावित करती हैं, और छोटी आंत पित्त तथा अग्नाशयी रस द्वारा पाचन पूरा करती है; रसांकुर पचे हुए भोजन का अवशोषण करते हैं।
  • 3वायवीय श्वसन (माइटोकॉन्ड्रिया में) अवायवीय श्वसन की तुलना में कहीं अधिक ऊर्जा मुक्त करता है; ग्लूकोज पहले कोशिकाद्रव्य में पायरुवेट में टूटता है और ATP सार्वत्रिक ऊर्जा मुद्रा है।
  • 4मानव हृदय में चार कक्ष होते हैं जो द्वि-परिसंचरण सक्षम करते हैं; ऑक्सीजनयुक्त और विऑक्सीजनयुक्त रक्त अलग रहते हैं; लाल रक्त कणिकाओं में हीमोग्लोबिन ऑक्सीजन का वाहन करता है।
  • 5पादपों में जाइलम जल और खनिजों का ऊपर की ओर परिवहन करता है (वाष्पोत्सर्जन खिंचाव और मूल दाब द्वारा); फ्लोएम ATP-चालित परासरण दाब द्वारा प्रकाश-संश्लेषण उत्पादों का स्थानान्तरण करता है।
06

नियंत्रण एवं समन्वय

कक्षा 10 विज्ञान एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक का अध्याय 6, "नियंत्रण एवं समन्वय", उन तंत्रों को समझाता है जिनके द्वारा तंत्रिका तंत्र और हार्मोन जंतुओं तथा पादपों को पर्यावरणीय उद्दीपनों का पता लगाने और विद्युत आवेगों, प्रतिवर्ती चाप, मस्तिष्क के क्षेत्रों तथा रासायनिक संकेतों के माध्यम से उचित प्रतिक्रिया करने में सक्षम बनाते हैं।

  • 1न्यूरॉन सूचनाओं को विद्युत आवेगों के रूप में डेंड्राइट से कोशिका काय और एक्सॉन के माध्यम से वहन करते हैं; सिनेप्स पर मुक्त रसायन अगले न्यूरॉन या प्रभावकारी कोशिका तक की दूरी को पाटते हैं।
  • 2प्रतिवर्ती चाप तीव्र, अनैच्छिक मार्ग होते हैं जो रीढ़ रज्जु में संसाधित होते हैं (मस्तिष्क में नहीं), जिससे आग से हाथ हटाने जैसी त्वरित प्रतिक्रियाएँ संभव होती हैं।
  • 3मानव मस्तिष्क के तीन क्षेत्र हैं: अग्र-मस्तिष्क (चिंतन, संवेदी क्षेत्र), मध्य-मस्तिष्क/पश्च-मस्तिष्क (अनैच्छिक क्रियाएँ, रक्तदाब, लार स्राव) और अनुमस्तिष्क (मुद्रा और संतुलन)।
  • 4पादपों में दो प्रकार की गतियाँ होती हैं: वृद्धि-स्वतंत्र (जैसे, छुईमुई का जल दाब परिवर्तन से पत्तियाँ मोड़ना) और वृद्धि-आश्रित अनुवर्तन (प्रकाशानुवर्तन, गुरुत्वानुवर्तन, जलानुवर्तन, रसायनानुवर्तन)।
  • 5प्ररोह शीर्ष पर संश्लेषित ऑक्सिन असमान कोशिका दीर्घीकरण करता है, जिससे पादप प्रकाश की ओर झुकता है; जिबरेलिन और साइटोकाइनिन वृद्धि को बढ़ावा देते हैं, जबकि एब्सिसिक अम्ल इसे रोकता है और पत्ती को मुरझाने का कारण बनता है।
07

जीव जनन कैसे करते हैं

कक्षा 10 विज्ञान एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक का अध्याय 7, "जीव जनन कैसे करते हैं", यह समझाता है कि जीव अलैंगिक विधियों (विखंडन, मुकुलन, खंडन, पुनर्जनन, कायिक प्रवर्धन, बीजाणु निर्माण) और लैंगिक जनन के माध्यम से कैसे जनन करते हैं, जिसमें पुष्पी पादपों और मानव जनन तंत्र — यौवनारंभ, निषेचन और गर्भनिरोध — को शामिल किया गया है।

  • 1DNA की प्रतिलिपि जनन की मूल घटना है; प्रतिलिपियाँ समान होती हैं किंतु एकसमान नहीं, जो विभिन्नताएँ उत्पन्न करती हैं और विकास को प्रेरित करती हैं।
  • 2अलैंगिक जनन के प्रकार: द्विखंडन (अमीबा, जीवाणु), बहुखंडन (प्लाज्मोडियम), मुकुलन (हाइड्रा, यीस्ट), खंडन (स्पाइरोगायरा), पुनर्जनन (प्लेनेरिया), कायिक प्रवर्धन (आलू, ब्रायोफिलम) और बीजाणु निर्माण (राइजोपस)।
  • 3पुष्पी पादपों में पराग पुंकेसर से वर्तिकाग्र पर स्थानांतरित होता है (परागण), इसके बाद अंडाशय में निषेचन होता है और युग्मनज फल के भीतर बीज के रूप में विकसित होता है।
  • 4शुक्राणु वृषण में बनते हैं (कम तापमान के लिए अंडकोश में स्थित); अंडे अंडाशय में परिपक्व होते हैं और मासिक रूप से फैलोपियन नलिका से गर्भाशय तक पहुँचते हैं।
  • 5अपरा — गर्भाशय की दीवार में एम्बेडेड एक चकती — माँ के रक्त से विकासशील भ्रूण को ग्लूकोज और ऑक्सीजन प्रदान करती है और अपशिष्ट उत्पादों को हटाती है।
08

आनुवंशिकता

कक्षा 10 विज्ञान एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक का अध्याय 8, "आनुवंशिकता", जीन के माध्यम से जनकों से संतानों में लक्षणों की विश्वसनीय वंशागति को समझाता है। ग्रेगर जोहान मेंडल के मटर के पौधों पर किए गए प्रयोगों ने वंशागति के मूलभूत नियम स्थापित किए, जिनमें प्रभावी और अप्रभावी लक्षण तथा स्वतंत्र अपव्यूहन शामिल हैं।

  • 1जनन के दौरान उत्पन्न विभिन्नताएँ वंशानुगत हो सकती हैं, और प्राकृतिक चयन उन विभिन्नताओं को प्राथमिकता देता है जो पर्यावरण के लिए अधिक उपयुक्त हों।
  • 2मेंडल ने विपरीत लक्षणों (लंबे/बौने, गोल/झुर्रीदार बीज) वाले मटर के पौधों का उपयोग करके F1 और F2 पीढ़ियों में वंशागति के नियम स्थापित किए।
  • 3F1 संकरण में केवल एक जनक लक्षण (प्रभावी) प्रकट होता है; F2 में प्रभावी से अप्रभावी का अनुपात लगभग 3:1 होता है।
  • 4दो लक्षण (जैसे, बीज का आकार और बीज का रंग) एक-दूसरे से स्वतंत्र रूप से वंशानुगत होते हैं, जिससे संतानों में नई संयोजनाएँ उत्पन्न होती हैं।
  • 5जीन गुणसूत्रों पर होते हैं; प्रत्येक कोशिका में प्रत्येक गुणसूत्र की दो प्रतियाँ होती हैं — एक-एक जनक से — जबकि जनन कोशिकाएँ केवल एक प्रति रखती हैं।
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प्रकाश – परावर्तन तथा अपवर्तन

कक्षा 10 विज्ञान एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक का अध्याय 9, "प्रकाश – परावर्तन तथा अपवर्तन", परावर्तन के नियमों, गोलीय दर्पणों और लेंसों द्वारा प्रतिबिंब निर्माण, अपवर्तन, अपवर्तनांक और लेंसों की क्षमता को समझाता है।

  • 1आपतन कोण परावर्तन कोण के बराबर होता है; आपतित किरण, अभिलंब और परावर्तित किरण सभी एक ही तल में होती हैं।
  • 2गोलीय दर्पणों के लिए, R = 2f — वक्रता त्रिज्या फोकस दूरी की दोगुनी होती है; दर्पण सूत्र है 1/v + 1/u = 1/f।
  • 3अवतल दर्पण F से परे वस्तुओं के लिए वास्तविक और उलटे प्रतिबिंब बनाता है, लेकिन जब वस्तु ध्रुव और फोकस के बीच हो तो आभासी, सीधा और आवर्धित प्रतिबिंब बनाता है; उत्तल दर्पण सदैव आभासी, सीधा और छोटा प्रतिबिंब बनाता है।
  • 4अपवर्तन प्रकाश की दिशा में परिवर्तन है जब वह एक पारदर्शी माध्यम से दूसरे में तिरछे जाता है; स्नेल का नियम कहता है sin i / sin r = नियतांक (अपवर्तनांक)।
  • 5किसी माध्यम का अपवर्तनांक निर्वात में प्रकाश की गति (3×10⁸ m/s) और उस माध्यम में प्रकाश की गति के अनुपात के बराबर होता है; हीरे का अपवर्तनांक (2.42) सामान्य पदार्थों में सर्वाधिक होता है।
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मानव नेत्र तथा रंग-बिरंगा संसार

कक्षा 10 विज्ञान एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक का अध्याय 10, "मानव नेत्र तथा रंग-बिरंगा संसार", मानव नेत्र की संरचना और दृष्टि दोषों, प्रिज्म द्वारा श्वेत प्रकाश के वर्ण विक्षेपण, तारों के टिमटिमाने जैसी वायुमंडलीय अपवर्तन की घटनाओं, तथा प्रकाश के प्रकीर्णन के कारण आकाश के नीले दिखने को समझाता है।

  • 1मानव नेत्र क्रिस्टलीय लेंस और पक्ष्माभी पेशियों का उपयोग करके फोकस दूरी को समायोजित करता है, जिससे 25 cm (निकट बिंदु) से अनंत (दूर बिंदु) तक की वस्तुओं के लिए समंजन संभव होता है।
  • 2निकट दृष्टि दोष (निकट दृष्टि) को अवतल लेंस से; दूर दृष्टि दोष (दूर दृष्टि) को उत्तल लेंस से; तथा जरा दृष्टि दोष (आयु संबंधी) को प्रायः द्विफोकसी लेंसों से ठीक किया जाता है।
  • 3काँच का प्रिज्म श्वेत प्रकाश को सात रंगों — बैंगनी, जामुनी, नीला, हरा, पीला, नारंगी, लाल (VIBGYOR) — में विभक्त करता है क्योंकि विभिन्न रंग अलग-अलग कोणों पर मुड़ते हैं।
  • 4वायुमंडल में जल की बूँदें सूर्य के प्रकाश को अपवर्तित, आंतरिक रूप से परावर्तित और विक्षेपित करके इंद्रधनुष बनाती हैं, जो सदा सूर्य के विपरीत दिशा में दिखता है।
  • 5तारे वायुमंडलीय अपवर्तन की निरंतरता के कारण टिमटिमाते हैं, जबकि ग्रह नहीं टिमटिमाते क्योंकि वे विस्तृत स्रोत के रूप में दिखते हैं और उनके भिन्न-भिन्न बिंदुओं से आने वाले प्रकाश में विचरण एक-दूसरे को निष्प्रभावी कर देते हैं।
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विद्युत

कक्षा 10 विज्ञान एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक का अध्याय 11, "विद्युत", चालकों में विद्युत आवेश के प्रवाह, ओम के नियम (V = IR), प्रतिरोध, श्रेणीक्रम और पार्श्वक्रम परिपथों, जूल के तापीय प्रभाव (H = I²Rt) तथा विद्युत शक्ति (P = VI) को समझाता है।

  • 1विद्युत धारा I = Q/t को ऐम्पियर (A) में मापा जाता है; 1 कूलॉम आवेश लगभग 6 × 10¹⁸ इलेक्ट्रॉनों के आवेश के बराबर होता है।
  • 2ओम का नियम: किसी चालक के सिरों के बीच विभवांतर V स्थिर ताप पर विद्युत धारा I के सीधे अनुपाती होता है, जिसे V = IR के रूप में व्यक्त किया जाता है।
  • 3प्रतिरोध R = ρl/A; प्रतिरोधकता ρ (Ω m में) पदार्थ पर निर्भर करती है — धातुओं की प्रतिरोधकता 10⁻⁸ से 10⁻⁶ Ω m तथा कुचालकों की 10¹² से 10¹⁷ Ω m होती है।
  • 4श्रेणीक्रम परिपथ में तुल्य प्रतिरोध Rs = R1 + R2 + R3 होता है और सभी प्रतिरोधों में समान धारा बहती है; पार्श्वक्रम में 1/Rp = 1/R1 + 1/R2 + 1/R3 होता है और प्रत्येक प्रतिरोध के सिरों पर समान विभवांतर होता है।
  • 5जूल का तापीय नियम: H = I²Rt — उत्पन्न ऊष्मा धारा के वर्ग, प्रतिरोध और समय के अनुपाती होती है; इस सिद्धांत पर विद्युत हीटर, इस्त्री और फ्यूज कार्य करते हैं।
12

विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव

कक्षा 10 विज्ञान एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक का अध्याय 12, "विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव", यह बताता है कि विद्युत धारा चालक के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करती है और चुंबकीय क्षेत्र में रखे धारावाही चालक पर बल लगता है। ये प्रभाव विद्युतचुंबक, विद्युत मोटर और घरेलू विद्युत सुरक्षा प्रणालियों का आधार हैं।

  • 1धारावाही चालक चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करता है; सीधे तार के चारों ओर क्षेत्र रेखाएँ संकेंद्रित वृत्त बनाती हैं जिनकी दिशा दाहिने हाथ के अँगूठे के नियम से मिलती है।
  • 2चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता धारा के साथ बढ़ती है और चालक से दूरी के साथ घटती है।
  • 3धारावाही परिनालिका दंड चुंबक की तरह व्यवहार करती है, जिसके अंदर समांतर क्षेत्र रेखाएँ होती हैं; मृदु लोहे की क्रोड रखने पर विद्युतचुंबक बनता है।
  • 4फ्लेमिंग का वाम-हस्त नियम चुंबकीय क्षेत्र में धारावाही चालक पर लगने वाले बल की दिशा बताता है — परस्पर लंबवत अँगूठा, तर्जनी और मध्यमा क्रमशः गति, क्षेत्र और धारा की दिशा दर्शाते हैं।
  • 5भारत में घरेलू आपूर्ति 50 Hz पर 220 V AC है; परिपथों में लाल (विद्युन्मय), काली (उदासीन) और हरी (भू) तारें होती हैं, तथा उच्च और निम्न शक्ति उपकरणों के लिए अलग 15 A और 5 A परिपथ होते हैं।
13

हमारा पर्यावरण

कक्षा 10 विज्ञान एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक का अध्याय 13, "हमारा पर्यावरण", यह बताता है कि पारितंत्र आहार श्रृंखलाओं, ऊर्जा प्रवाह, कीटनाशकों के जैव आवर्धन, CFC द्वारा ओजोन परत के क्षय और जैव निम्नीकरणीय बनाम अजैव निम्नीकरणीय कचरे के पर्यावरणीय प्रभाव के माध्यम से कैसे कार्य करता है।

  • 1पारितंत्र में जैविक घटक (जीवित जीव) और अजैविक घटक (ताप, वर्षा, वायु, मृदा, खनिज) होते हैं; उदाहरण हैं — वन, तालाब, बगीचे और फसल के खेत।
  • 2जीवों को उत्पादक (प्रकाश संश्लेषण करने वाले हरे पौधे और कुछ जीवाणु), उपभोक्ता (शाकाहारी, माँसाहारी, सर्वाहारी, परजीवी) और अपघटक (मृत पदार्थ को अपघटित करने वाले जीवाणु और कवक) के रूप में वर्गीकृत किया जाता है।
  • 3एक पोषी स्तर की केवल लगभग 10% ऊर्जा अगले स्तर को प्राप्त होती है; हरे पौधे सूर्य के प्रकाश की केवल लगभग 1% ऊर्जा ग्रहण करते हैं, जो आहार श्रृंखलाओं को तीन या चार पोषी स्तरों तक सीमित करता है।
  • 4जैव आवर्धन तब होता है जब अविघटनीय कीटनाशक रसायन प्रत्येक पोषी स्तर पर क्रमशः संचित होते जाते हैं, और आहार श्रृंखला के शीर्ष पर मनुष्यों में उनकी सान्द्रता अधिकतम हो जाती है।
  • 5ओजोन परत (O₃) पृथ्वी को हानिकारक पराबैंगनी विकिरण से बचाती है; CFC (प्रशीतकों और अग्निशामकों में प्रयुक्त कृत्रिम रसायन) ने 1980 के दशक से ओजोन स्तर में तीव्र गिरावट ला दी, जिसके फलस्वरूप 1987 में UNEP का CFC उत्पादन को स्थिर करने का समझौता हुआ।