सारांश
कक्षा 9 हिंदी एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (गंगा) का अध्याय 6, "रीढ़ की हड्डी", जगदीशचंद्र माथुर की यह एकांकी स्त्री-शिक्षा की उपेक्षा और विवाह की रूढ़िगत सोच पर व्यंग्य करते हुए उमा के आत्म-सम्मान और साहसी विद्रोह को केंद्र में रखती है।
- उमा का साहसी विद्रोह — बी.ए. पास उमा को जब वर-पक्ष वस्तु की तरह परखता है, तो वह विद्रोह कर उठती है — अपनी उच्च शिक्षा घोषित करती है और शंकर की लड़कियों के छात्रावास के पास मंडराने की कायरता उजागर कर देती है। वह स्वाभिमान की प्रतीक है।
- सामाजिक पाखंड पर व्यंग्य — गोपालप्रसाद स्वयं पढ़े-लिखे वकील हैं और सभा-सोसाइटियों में जाते हैं, फिर भी 'कम पढ़ी-लिखी' बहू चाहते हैं। रामस्वरूप बेटी की शिक्षा छिपाते हैं — इसी विरोधाभास से एकांकी रूढ़िवादी समाज के पाखंड पर तीखा प्रहार करती है।
- शीर्षक का दोहरा अर्थ — 'रीढ़ की हड्डी' शारीरिक रीढ़ के साथ-साथ नैतिक दृढ़ता (बैकबोन) की ओर संकेत करती है — जो कायर व नैतिक रीढ़विहीन शंकर में नहीं है, पर साहसी उमा में भरपूर है। यही शीर्षक की व्यंग्यात्मक गहराई है।
मुख्य बिंदु और सूत्र
- 01लेखक: जगदीशचंद्र माथुर — जन्म 1917, शाहजहाँपुर (उत्तर प्रदेश); निधन 1978; प्रमुख कृतियाँ: कोणार्क, भोर का तारा, दस तस्वीरें।
- 02विधा: एकांकी (एकल अंक का नाटक); रचना काल 1939।
- 03केंद्रीय भाव: परंपरागत विवाह-व्यवस्था में स्त्री को वस्तु की तरह परखने की प्रवृत्ति और स्त्री-शिक्षा विरोधी रूढ़िगत सोच पर व्यंग्य।
- 04मुख्य पात्र: उमा (शिक्षित, साहसी लड़की — स्वाभिमान की प्रतीक), रामस्वरूप (पिता — बाहर से उदार, भीतर से रूढ़िवादी), गोपालप्रसाद (वर-पक्ष — पुरातनपंथी सोच के वकील), शंकर (कायर और नैतिक रीढ़ विहीन लड़का)।
- 05शीर्षक का दोहरा अर्थ: 'रीढ़ की हड्डी' शारीरिक रीढ़ के साथ-साथ नैतिक दृढ़ता (बैकबोन) की ओर संकेत करती है — जो शंकर में नहीं है।
- 06कठिन शब्दार्थ: दकियानूसी = पुराने विचार का; तालीम = शिक्षा; फितरती = चालबाज; जंजाल = झंझट, झमेला; ठठोली = हँसी, परिहास।
- 07व्यंग्य का बिंदु: गोपालप्रसाद स्वयं पढ़े-लिखे वकील हैं और सभा-सोसाइटियों में जाते हैं, फिर भी बहू 'कम पढ़ी-लिखी' चाहते हैं — यही सामाजिक पाखंड उजागर होता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
01Reedh Ki Haddi का सारांश क्या है?
रामस्वरूप अपनी बी.ए. पास बेटी उमा की शादी के लिए गोपालप्रसाद और उनके बेटे शंकर को बुलाते हैं, पर उमा की उच्च शिक्षा छिपाते हैं। गोपालप्रसाद कम पढ़ी-लिखी बहू चाहते हैं। जब उमा को वस्तु की तरह परखा जाता है, वह विद्रोह करते हुए अपनी शिक्षा घोषित करती है और शंकर की नैतिक कायरता उजागर कर देती है।
02Reedh Ki Haddi के लेखक कौन हैं?
इस एकांकी के लेखक जगदीशचंद्र माथुर हैं। उनका जन्म 1917 में शाहजहाँपुर, उत्तर प्रदेश में हुआ था। वे इंडियन सिविल सर्विस में रहे और आजीवन साहित्य-सृजन करते रहे। उनकी प्रमुख कृतियों में कोणार्क, भोर का तारा, दस तस्वीरें आदि हैं। सन् 1978 में उनका निधन हुआ।
03Reedh Ki Haddi का केंद्रीय भाव क्या है?
इस एकांकी का केंद्रीय भाव है — स्त्री-शिक्षा की उपेक्षा और विवाह की परंपरागत व्यवस्था में स्त्री को वस्तु समझने की रूढ़िगत सोच पर व्यंग्य। उमा के माध्यम से यह संदेश दिया गया है कि शिक्षित स्त्री आत्म-सम्मान और स्वतंत्र विचार की अधिकारी है।
04Reedh Ki Haddi summary in hindi
'रीढ़ की हड्डी' एकांकी में रामस्वरूप अपनी शिक्षित बेटी उमा की शादी के लिए वर-पक्ष को बुलाते हैं और उसकी बी.ए. की पढ़ाई छिपाते हैं। गोपालप्रसाद कम पढ़ी लड़की चाहते हैं। उमा जब खुद को वस्तु की तरह परखते देखती है तो विद्रोह करती है, अपनी शिक्षा घोषित करती है और शंकर की चारित्रिक कायरता उजागर कर देती है। यह एकांकी स्त्री-शिक्षा और आत्म-सम्मान की पक्षधर है।
05'रीढ़ की हड्डी' शीर्षक का क्या अर्थ है?
शीर्षक का दोहरा अर्थ है। एक ओर यह शारीरिक रीढ़ की हड्डी (backbone) का संकेत करता है, जो शंकर की झुकी कमर से जुड़ा है। दूसरी ओर यह नैतिक दृढ़ता (moral backbone) की कमी को दर्शाता है। उमा अंत में कहती है — 'आपके लाडले बेटे के रीढ़ की हड्डी भी है या नहीं — यानी बैकबोन, बैकबोन!'
06उमा कौन है और उसकी विशेषता क्या है?
उमा इस एकांकी की मुख्य पात्र है — रामस्वरूप और प्रेमा की बेटी। वह बी.ए. पास, शिक्षित और साहसी स्त्री है। वह सितार बजाती है, चित्रकारी करती है और घर का सिलाई-कार्य भी करती है। जब उसे वस्तु की तरह परखा जाता है, तो वह निडरता से अपने अधिकार और सम्मान की बात करती है।
07गोपालप्रसाद कम पढ़ी-लिखी लड़की क्यों चाहते थे?
गोपालप्रसाद का मानना था कि उच्च शिक्षित स्त्री घर नहीं सँभाल सकती, उसके 'नखरे' झेलने होंगे। उनके अनुसार 'ऊँची तालीम' सिर्फ मर्दों के लिए है। वे चाहते थे कि बहू अधिकतम मैट्रिक तक पढ़ी हो। यह सोच एकांकी में रूढ़िगत पितृसत्तात्मक दृष्टिकोण का प्रतिनिधित्व करती है।
08रामस्वरूप ने उमा की शिक्षा क्यों छिपाई?
रामस्वरूप को पता था कि गोपालप्रसाद ज्यादा पढ़ी-लिखी लड़की नहीं चाहते। इसलिए उन्होंने उमा की बी.ए. की डिग्री छिपाई और कहा कि वह सिर्फ मैट्रिक तक पढ़ी है। उनका यह व्यवहार उनके अंतर्द्वंद्व को दर्शाता है — बाहर से वे आधुनिक दिखते हैं, लेकिन भीतर से रूढ़िवादी हैं।
09उमा ने शंकर के बारे में क्या खुलासा किया?
उमा ने बताया कि शंकर पिछली फरवरी में लड़कियों के छात्रावास के इर्द-गिर्द मंडरा रहे थे और वहाँ से भगाए गए थे। इससे शंकर की नैतिक कायरता उजागर हो गई। उमा ने व्यंग्य करते हुए कहा कि ऐसे व्यक्ति की 'रीढ़ की हड्डी' यानी नैतिक दृढ़ता पर प्रश्न उठता है।
10'रीढ़ की हड्डी' एकांकी कब लिखी गई थी?
यह एकांकी 1939 में लिखी गई थी। उस समय भारतीय समाज में स्त्री-शिक्षा को लेकर रूढ़िगत सोच प्रबल थी और स्त्रियों को शिक्षा व अन्य क्षेत्रों में समान अवसर नहीं मिलते थे।
11दकियानूसी और तालीम का अर्थ क्या है?
दकियानूसी का अर्थ है — पुराने विचार का, पुरातनपंथी। तालीम का अर्थ है — शिक्षा। एकांकी में रामस्वरूप गोपालप्रसाद के 'दकियानूसी खयालों' की बात करते हैं और गोपालप्रसाद 'तालीम' शब्द का प्रयोग शिक्षा के अर्थ में करते हैं।
12एकांकी के अंत में रतन 'मक्खन' क्यों लाता है?
एकांकी का अंत व्यंग्यपूर्ण है — जब घर में बड़ी भावनात्मक उथल-पुथल हो चुकी है, रामस्वरूप निराश बैठे हैं और उमा सिसक रही है, तब रतन मक्खन लेकर आता है। यह हास्य-व्यंग्य से भरा दृश्य जीवन की सामान्य दिनचर्या और बड़े नाटकीय क्षण के बीच के अंतर को उजागर करता है।
13क्या Reedh Ki Haddi अध्याय की PDF मुफ़्त है?
हाँ, बिना साइन-अप के मुफ़्त डाउनलोड करें।
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