Do Bailon Ki Katha
कक्षा 9 हिंदी एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (गंगा) का अध्याय 1, "दो बैलों की कथा", प्रेमचंद की यह गद्य कहानी हीरा और मोती नामक दो बैलों के माध्यम से मित्रता, स्वाभिमान और स्वतंत्रता के लिए अदम्य संघर्ष का मार्मिक चित्रण करती है।
- 1लेखक: प्रेमचंद (मूल नाम धनपत राय; जन्म 1880, लमही, वाराणसी; प्रमुख उपन्यास — गोदान, गबन, निर्मला, कर्मभूमि; निधन 1936)
- 2विधा: गद्य कहानी — गंगा पाठ्यपुस्तक, कक्षा 9 हिंदी, गद्य खंड
- 3केंद्रीय भाव: स्वतंत्रता सहज नहीं मिलती, उसके लिए बार-बार संघर्ष करना पड़ता है; हीरा-मोती का संघर्ष स्वतंत्रता आंदोलन का प्रतीक है
- 4मुख्य पात्र: हीरा (सहनशील, नैतिक, धैर्यवान), मोती (साहसी, आवेगी), झूरी (किसान-मालिक), गया (झूरी का साला, अत्याचारी), भैरो की बेटी (दयालु लड़की जिसने रोटियाँ खिलाईं)
- 5मित्रता का महत्त्व: हीरा और मोती की अटूट मित्रता — संकट में साथ रहना, एक के बंधन में दोनों का रुकना, एकता से साँड़ को परास्त करना
