पर्यावरण अध्ययन • कक्षा 4

हमारी अद्भुत दुनिया

NCERT पाठ्यपुस्तक10 अध्याय

अध्याय नोट्स

हमारी अद्भुत दुनिया में आप क्या सीखेंगे

हमारी अद्भुत दुनिया का त्वरित रिवीज़न मैप — हर अध्याय का मूल विचार और पाँच मुख्य बातें। पूरा NCERT PDF और विस्तृत नोट्स पढ़ने के लिए किसी भी अध्याय पर टैप करें।

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मिलकर साथ रहना

कक्षा 4 पर्यावरण अध्ययन एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (हमारी अद्भुत दुनिया) का अध्याय 1, "मिलकर साथ रहना", समुदाय को आपसी सहयोग, संवाद और सम्मान पर आधारित एक परस्पर निर्भर स्थान के रूप में प्रस्तुत करता है — चंदन के गाँव की यात्रा, वन महोत्सव के वृक्षारोपण उत्सव, और विभिन्न प्रदेशों की सामुदायिक परंपराओं के माध्यम से।

  • 1अध्याय 1 'मिलकर साथ रहना' — इकाई 1 'हमारा समुदाय' का भाग; मुख्य पात्र चंदन अपने गाँव की यात्रा कराता है
  • 2सार्वजनिक स्थान — उद्यान, विद्यालय, चिकित्सालय, बाजार, सड़क — पूरे समुदाय की सामूहिक संपत्ति हैं
  • 3वन महोत्सव (वृक्षारोपण महोत्सव) प्रतिवर्ष 1 जुलाई से 7 जुलाई तक मनाया जाता है
  • 42024 में कांकेर, छत्तीसगढ़ के समुदाय ने चिनार नदी पर बाँस-पत्थर का पुल दो दिन में बनाया
  • 5केले के पत्तों को गड्ढे में दबाने से खाद बनती है जो मिट्टी को उपजाऊ बनाती है
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अपने परिवेश को जानना

कक्षा 4 पर्यावरण अध्ययन एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (हमारी अद्भुत दुनिया) का अध्याय 2, "अपने परिवेश को जानना", नव्या और उनके दादाजी की बस-यात्रा के माध्यम से डाकघर, चिकित्सालय, बैंक जैसे सामुदायिक स्थानों से परिचित कराता है, संचार के पुराने और नए साधनों का इतिहास समझाता है, और मानचित्र में चार दिशाएँ पढ़ना सिखाता है।

  • 1नव्या अपने दादाजी के साथ बस से बाजार वाले रास्ते से घर लौटती है और डाकघर, चिकित्सालय, बैंक, मेट्रो और फ्लाईओवर देखती है
  • 2डाकघर पत्रों को क्षेत्र के अनुसार छाँटकर उनके गंतव्य तक भेजता है; दादाजी पहले भाई को पत्र लिखते थे
  • 3प्राचीन काल में संचार के साधन — नगाड़ा, पत्थर पर चित्र, कबूतर, संदेशवाहक; फिर डाक, टेलीफोन, रेडियो, टीवी, अब मोबाइल-इंटरनेट
  • 4मेट्रो बहुत तेज चलती है; फ्लाईओवर भीड़भरे चौराहों के ऊपर से वाहनों को निकलने देते हैं
  • 5बैंक धन सुरक्षित रखता है; एटीएम (स्वचालित कैश मशीन) बिना पंक्ति में खड़े किसी भी समय धन निकलवाने देता है
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प्रकृति की पाठशाला

कक्षा 4 पर्यावरण अध्ययन एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (हमारी अद्भुत दुनिया) का अध्याय 3, "प्रकृति की पाठशाला", विद्यार्थियों को मध्य प्रदेश के पचमढ़ी वन में प्रकृति भ्रमण पर ले जाता है, जहाँ वे थलीय-जलीय जंतुओं, पक्षियों, कीटों और पत्तियों की विशेषताएँ देखते हैं और 'जीवन-तंतु' खेल से प्रकृति की पारस्परिक निर्भरता समझते हैं।

  • 1प्रकृति भ्रमण मध्य प्रदेश के पचमढ़ी संरक्षित वन में होता है; विद्यार्थियों को भारत के मानचित्र पर इसे ढूँढने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है
  • 2आभा दीदी प्रकृति वैज्ञानिक हैं जो पेड़-पौधों और जंतुओं का अध्ययन करती हैं; वे पूरे भ्रमण में मार्गदर्शन करती हैं
  • 3वन या चिड़ियाघर में सुरक्षा नियम — जंतुओं को न छेड़ें, न खिलाएँ; पेड़-फूल न तोड़ें; पॉलिथीन न लाएँ; कूड़ा न फेंकें
  • 4भारतीय विशाल गिलहरी — बड़ी, लाल रंग की, पचमढ़ी में पाई जाती है
  • 5पत्तियों का रंग, आकार, बनावट और शिरा-विन्यास अलग-अलग होते हैं; 'पत्ता हस्ताक्षर' (लीफ ऑटोग्राफ) गतिविधि में क्रेयॉन से पत्ते की नसें उभारी जाती हैं
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प्रकृति की गोद में

कक्षा 4 पर्यावरण अध्ययन एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (हमारी अद्भुत दुनिया) का अध्याय 4, "प्रकृति की गोद में", रीना और अमित की जंगल के निकट के गाँव की यात्रा के माध्यम से दिखाता है कि पलाश वृक्ष, मिट्टी के घर, प्राकृतिक रंग, पारंपरिक अनाज-संरक्षण और नीम-तुलसी जैसे औषधीय पौधे हमारे दैनिक जीवन को प्रकृति से कैसे जोड़ते हैं।

  • 1पलाश के वृक्ष पर नारंगी-लाल फूल खिलने पर पूरा जंगल दूर से लाल-नारंगी दिखता है, इसलिए पलाश को 'अग्निपुष्प या जंगल की ज्वाला' भी कहते हैं; गुजरात में इसे 'केसुदा' कहा जाता है
  • 2गाँव के घर मिट्टी, घास, गोबर और अन्य प्राकृतिक सामग्री से बनते हैं; दीवारें चावल के आटे-पानी के रंग से सजाई जाती हैं
  • 3प्राकृतिक रंग बनाना — गेंदे के फूल, गुड़हल या चुकंदर को पानी में 30 मिनट से 1 घंटे उबालकर छानें
  • 4अनाज को मिट्टी के बर्तन में नीम की पत्तियाँ बिछाकर और बाँस की टोकरी के बाहर गोबर की परत लगाकर कीटों से बचाते हैं
  • 5कर्नाटक की जेनू कुरुबा जनजाति शहद निकालने से पहले मधुमक्खियों से क्षमा माँगने के गीत गाती है — प्रकृति के प्रति गहरे सम्मान का उदाहरण
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स्वास्थ्य के लिए भोजन

कक्षा 4 पर्यावरण अध्ययन एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (हमारी अद्भुत दुनिया) का अध्याय 5, "स्वास्थ्य के लिए भोजन", विद्यालय में आयोजित एक 'आहार मेले' की कथा के माध्यम से तीन खाद्य समूहों, आयुर्वेद के षड्-रस, श्री अन्न (मोटे अनाज), प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों से बचने तथा संतुलित भोजन की आवश्यकता से परिचित कराता है।

  • 1तीन खाद्य समूह: ऊर्जावर्धक (चावल, गेहूँ, बाजरा), देहवर्धक (दालें, दूध, अंडे, मछली) और सुरक्षात्मक (फल व साग-सब्जियाँ)
  • 2षड्-रस: मीठा, खट्टा, नमकीन, तीखा, कड़वा और कसैला — उगादि पचड़ी में सभी छह स्वाद एकसाथ होते हैं
  • 3श्री अन्न (मोटे अनाज) — ज्वार, बाजरा, रागी, जौ — पोषण के समृद्ध स्रोत
  • 4प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ (सॉफ्ट ड्रिंक्स, चिप्स, बर्गर, पिज्जा) में तेल-नमक-चीनी अधिक होती है — सीमित मात्रा में लें
  • 5संतुलित थाली में सबसे अधिक भाग सुरक्षात्मक खाद्य पदार्थों का होना चाहिए
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स्वस्थ रहो, प्रसन्न रहो

कक्षा 4 पर्यावरण अध्ययन एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (हमारी अद्भुत दुनिया) का अध्याय 6, "स्वस्थ रहो, प्रसन्न रहो", अनाज की खेत से थाली तक की यात्रा, ध्यानपूर्वक भोजन करने की कला, नियमित शारीरिक गतिविधि व पर्याप्त नींद की आवश्यकता तथा सुरक्षित और असुरक्षित स्पर्श की पहचान सिखाता है।

  • 1चावल और गेहूँ जैसे अनाज खेत से थाली तक पहुँचने में लंबी यात्रा करते हैं; किसान, दुकानदार, पशु, मिट्टी, पानी और धूप सभी सहयोग करते हैं
  • 2भारत में मकर संक्रांति, अक्षय तृतीया, राजा उत्सव, ओणम और लोहड़ी जैसे पर्वों में 'प्रकृति माँ' को भोजन के लिए धन्यवाद दिया जाता है
  • 3ध्यानपूर्वक भोजन (मूँगफली गतिविधि): आँखें बंद करके भोजन को स्पर्श, स्वाद और सुगंध से महसूस करना
  • 4भोजन व्यर्थ करना उन सभी के परिश्रम का अनादर है जो हमें भोजन उपलब्ध कराते हैं
  • 5दौड़ना, कूदना, साइकिल चलाना, रस्सी कूदना और योग — नियमित शारीरिक गतिविधियाँ आवश्यक हैं
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वस्तुएँ कैसे कार्य करती हैं?

कक्षा 4 पर्यावरण अध्ययन एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (हमारी अद्भुत दुनिया) का अध्याय 7, "वस्तुएँ कैसे कार्य करती हैं?", सिक्के, चूड़ी, लट्टू और चकरी जैसी वस्तुओं के घूर्णन, एल्यूमिनियम फॉइल और विभिन्न सामग्रियों के तैरने व डूबने तथा हस्तनिर्मित नौकाओं की रचना के माध्यम से बच्चों की वैज्ञानिक जिज्ञासा को जागृत करता है।

  • 1सिक्के, चूड़ियाँ, पेंसिल, लकड़ी का लट्टू और पत्थर के टुकड़े घुमाकर अवलोकन किया जाता है — सभी वस्तुएँ समान रूप से नहीं घूमतीं
  • 2टूथपिक को केंद्र में रखने पर चकरी सीधी और अधिक देर तक घूमती है; ऑफ-सेंटर रखने पर संतुलन बिगड़ता है
  • 3तेज घूमती चौकोर चकरी गोल दिखने लगती है
  • 4महात्मा गाँधी चरखे से सूत कातते थे; लट्टू भारत में हजारों वर्षों से खेला जाता रहा है
  • 5तैरना-डूबना केवल वजन नहीं, आकार पर भी निर्भर है — एल्यूमिनियम फॉइल इसका स्पष्ट उदाहरण है
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वस्तुओं का निर्माण

कक्षा 4 पर्यावरण अध्ययन एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (हमारी अद्भुत दुनिया) का अध्याय 8, "वस्तुओं का निर्माण", पीहू की कहानी के माध्यम से पुराने समाचार पत्रों और मेथी के बीजों से हस्तनिर्मित कागज बनाना, प्राकृतिक रंगों का उपयोग, कागज के विभिन्न प्रकार, ब्रेल प्रणाली और अपशिष्ट प्रबंधन के पाँच करणीय कार्य (5R) सिखाता है।

  • 1पीहू और उनकी माँ पुराने समाचार पत्र, पानी और मेथी के बीजों से हस्तनिर्मित कागज बनाते हैं
  • 2कागज बनाने की विधि: फाड़ना → भिगोना → पीसना → बेलकर पतले पत्रक बनाना → सुखाना
  • 3प्राकृतिक रंग: हल्दी (पीला), पालक, चुकंदर और मेंहदी — पौधों के विभिन्न भागों से बनते हैं
  • 4कागज के प्रकार: लेखन पत्र, समाचार पत्र, कला पत्र, गत्ता, टिश्यू पेपर — प्रत्येक का उपयोग अलग
  • 5ब्रेल प्रणाली: विशेष कागज पर उभारों के पैटर्न से दृष्टिबाधित व्यक्ति पढ़ और लिख सकते हैं
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जैसा देश, वैसा भेष

कक्षा 4 पर्यावरण अध्ययन एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (हमारी अद्भुत दुनिया) का अध्याय 9, "जैसा देश, वैसा भेष", मैदान, रेगिस्तान, तटीय क्षेत्र और पर्वत — चार भू-रूपों में रहने वाले लोगों के भोजन, वस्त्र, आवास और उत्सवों को चार बच्चों की अवकाश-यात्राओं के माध्यम से प्रस्तुत करता है।

  • 1मैदानों की मिट्टी उपजाऊ होती है; पंजाब का प्रिय भोजन मक्के की रोटी, सरसों का साग और लस्सी है।
  • 2स्वर्ण मंदिर (श्री हरमंदिर साहिब) में लंगर सेवा के माध्यम से सभी को निःशुल्क भोजन परोसा जाता है — यह विश्व के सबसे बड़े सामुदायिक सेवा कार्यों में से एक है।
  • 3रेगिस्तान में बहुत कम वर्षा होती है; कैक्टस (थोर), खेजड़ी और बबूल जैसे पौधे अपने तनों में पानी जमाकर जीवित रहते हैं।
  • 4ऊँट को रेगिस्तान का जहाज कहते हैं क्योंकि वह रेतीले क्षेत्र में यात्रा का मुख्य साधन है।
  • 5रेगिस्तानी घरों में टंकियाँ (जल भंडारण) बनाई जाती हैं क्योंकि वर्षा बहुत कम होती है।
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हमारा आकाश

कक्षा 4 पर्यावरण अध्ययन एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (हमारी अद्भुत दुनिया) का अध्याय 10, "हमारा आकाश", बदलते आकाश — सूर्य, छाया, चंद्रमा की कलाओं और तारों — का परिचय देता है तथा सूर्यघड़ी, जंतर-मंतर और भारतीय पर्वों का आकाश से संबंध समझाता है।

  • 1सुबह का आकाश नारंगी रंग का, दोपहर का तेज रोशनी वाला और रात का तारों से भरा काला दिखता है।
  • 2सूर्य आकाश की सबसे चमकीली वस्तु है और हमें प्रकाश व ऊष्मा देता है; इसकी चमक के कारण दिन में अन्य तारे दिखाई नहीं देते।
  • 3सूर्य प्रतिदिन पूर्व से उगता प्रतीत होता है, दोपहर तक सिर के ऊपर आता है और फिर पश्चिम की ओर बढ़ता है।
  • 4प्रात:काल और सायंकाल की छाया लंबी होती है; मध्याह्न की छाया सबसे छोटी होती है। सायंकाल की छाया सुबह की छाया के विपरीत दिशा में बनती है।
  • 5टॉर्च और छड़ी की गतिविधि से पता चलता है कि वस्तु प्रकाश स्रोत के समीप होने पर छाया बड़ी होती है और प्रकाश की दिशा बदलने से छाया की दिशा भी बदलती है।