जल — जीवन का आधार
कक्षा 5 पर्यावरण अध्ययन एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (हमारी अद्भुत दुनिया) का अध्याय 1, "जल — जीवन का आधार", जल के विभिन्न रूपों और स्रोतों, जल-चक्र, भूमिगत जल और मीठे पानी के पर्यावासों का परिचय देता है — PDF डाउनलोड करें और जानें कि जल किस प्रकार भूमि को आकार देता है और पृथ्वी पर सभी सजीवों का आधार बनता है।
- 1पृथ्वी का अधिकांश जल खारा है; यदि पृथ्वी का समस्त जल 200 मिलीलीटर के गिलास में हो, तो मीठा जल केवल 5 मिलीलीटर (एक चम्मच) के बराबर होगा।
- 2जल तीन रूपों में होता है — द्रव (वर्षा, नदी), ठोस (बर्फ, हिमनद) और वाष्प (भाप, बादल)।
- 3जल-चक्र प्रकृति में जल की सतत गति है — वाष्पीकरण, बादल निर्माण और वर्षा/बर्फ के रूप में पुनः पृथ्वी पर लौटना।
- 4वर्षा का जल जो मृदा और चट्टानों से रिसकर नीचे एकत्र होता है, भूमिगत जल कहलाता है; इसे कुएँ, बोरवेल और हैंडपंप द्वारा निकाला जाता है।
- 5नदियाँ ऊँचाई से नीचे की ओर बहती हैं, भूमि के आकार के अनुसार अपनी दिशा तय करती हैं; भारतीय नदियाँ बंगाल की खाड़ी या अरब सागर में जाकर मिलती हैं।
