सारांश
कक्षा 3 पर्यावरण अध्ययन एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (हमारी अद्भुत दुनिया) का अध्याय 11, "कैसे बनीं ये वस्तुएँ?", बच्चों को मिट्टी के बर्तन और ईंटें बनाने की प्रक्रिया, प्रकृति और मिट्टी के बर्तनों में प्रतिरूप (पैटर्न), तथा भारत में विभिन्न सामग्रियों से बने घरों के बारे में सिखाता है।
- मिट्टी के बर्तन बनाना — मिनी के अप्पुप्पन (दादाजी) मिट्टी में पानी मिलाकर गूँधते हैं, फिर उसे पत्थर के चाक पर रखकर घुमाते हुए बर्तन का आकार देते हैं। सूखने के बाद बर्तनों को भट्टी में पकाया जाता है जिससे वे कठोर और उपयोग के लिए तैयार हो जाते हैं। मिनी की माँ अम्मू भट्टी में बर्तन पकाती हैं।
- ईंटें और निर्माण — ईंटें भी मिट्टी से ही बनती हैं — गीली मिट्टी को साँचों में दबाकर आकार दिया जाता है और फिर भट्टी में पकाया जाता है। ईंटों से घर, विद्यालय और अस्पताल बनाए जाते हैं। रोहन के पिता निर्माण स्थल पर हेलमेट, सुरक्षा जैकेट और उपयुक्त जूते पहनते हैं।
- प्रकृति और मिट्टी के बर्तनों में प्रतिरूप — प्रकृति में चारों ओर प्रतिरूप मिलते हैं — तेंदुए के धब्बे, गिलहरी की धारियाँ, नीम की पत्तियों का विशेष क्रम, मोर, जेबरा, चीता और तितली के शरीर पर प्रतिरूप। कलाकार इन्हीं प्रतिरूपों से प्रेरणा लेकर मिट्टी के बर्तनों को सजाते हैं।
- विभिन्न प्रकार के घर — सभी घर ईंटों से नहीं बनते। देश के कुछ गर्म स्थानों में परंपरागत तरीकों से मिट्टी, घास और लकड़ी जैसी प्राकृतिक सामग्रियों से घर बनाए जाते हैं। दीवारों और फर्श पर गोबर का लेप करने से घर में ठंडक रहती है और कीड़े नहीं पनपते।
मुख्य बिंदु और सूत्र
- 01मिट्टी में पानी मिलाकर, गूँधकर और चाक पर आकार देकर बर्तन बनाए जाते हैं।
- 02बर्तन और ईंटों को पकाने की भट्टी को किल्न (भट्टी) कहते हैं — इसमें बहुत तेज आग से मिट्टी कठोर हो जाती है।
- 03ईंटें साँचों में बनाई जाती हैं और भट्टी में पकाई जाती हैं; इनसे घर, विद्यालय और अस्पताल बनते हैं।
- 04तेंदुए के धब्बे, गिलहरी की धारियाँ और नीम की पत्तियों का प्रतिरूप — ये सब कलाकारों को मिट्टी के बर्तनों पर डिज़ाइन बनाने की प्रेरणा देते हैं।
- 05गर्म स्थानों पर मिट्टी, घास और लकड़ी से बने परंपरागत घर भीतर से ठंडे रहते हैं और कीड़ों को दूर रखते हैं।
- 06निर्माण स्थल पर काम करने वाले हमेशा हेलमेट, सुरक्षा जैकेट और उपयुक्त जूते पहनते हैं।
- 07बच्चे चिकनी मिट्टी इकट्ठा करके, छलनी से साफ करके, पानी में भिगोकर और गूँधकर स्वयं मिट्टी की वस्तुएँ बना सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
01कक्षा 3 हमारी अद्भुत दुनिया का अध्याय 11 किस विषय पर है?
अध्याय 11 'कैसे बनीं ये वस्तुएँ?' मिट्टी के बर्तन और ईंटें बनाने की प्रक्रिया, प्रकृति से प्रेरित प्रतिरूप और भारत में विभिन्न प्रकार के घरों के बारे में है।
02भट्टी क्या होती है और इसका उपयोग क्यों किया जाता है?
भट्टी एक बहुत गर्म आँच वाला बड़ा चूल्हा है। मिट्टी के बर्तन और ईंटें भट्टी में पकाई जाती हैं जिससे वे कठोर और मजबूत हो जाती हैं।
03कुम्हार बर्तन कैसे बनाता है?
पहले मिट्टी में पानी मिलाकर गूँधी जाती है जब तक वह न बहुत गीली हो और न बहुत सूखी। फिर उसे पत्थर के चाक पर रखकर घुमाते हुए आकार दिया जाता है, सुखाया जाता है और अंत में भट्टी में पकाया जाता है।
04कुम्हार का चाक क्या होता है?
कुम्हार का चाक एक घूमने वाला पत्थर का पहिया है जिस पर गीली मिट्टी रखकर घुमाते हुए बर्तन, कुल्हड़ और अन्य वस्तुओं को आकार दिया जाता है।
05ईंटें किससे और कैसे बनती हैं?
ईंटें मिट्टी से बनती हैं। गीली मिट्टी को साँचों में दबाकर आयताकार आकार दिया जाता है और फिर भट्टी में पकाकर कठोर बनाया जाता है।
06भारत के कुछ गर्म स्थानों में मिट्टी के घर क्यों बनाए जाते हैं?
मिट्टी, घास और लकड़ी जैसी प्राकृतिक सामग्रियों से बने घर भीतर से ठंडे रहते हैं और कीड़े नहीं पनपते — इसीलिए गर्म इलाकों में ये परंपरागत घर बनाए जाते हैं।
07कलाकार बर्तनों पर प्रतिरूप (पैटर्न) की प्रेरणा कहाँ से लेते हैं?
कलाकार प्रकृति से प्रेरणा लेते हैं — तेंदुए के धब्बे, गिलहरी की धारियाँ, नीम की पत्तियों का क्रम, मोर, जेबरा, चीता और तितली के शरीर पर बने प्रतिरूप।
08बच्चे घर पर मिट्टी कैसे तैयार कर सकते हैं?
किसी जगह से चिकनी मिट्टी इकट्ठी करें, छलनी से कंकर और पत्तियाँ हटाएँ, पानी में भिगोएँ, ऊपर आए अतिरिक्त पानी को फेंक दें, और फिर मिट्टी को गूँधकर इच्छित वस्तु बनाएँ। धूप में सुखाएँ।
09निर्माण स्थल पर काम करने वाले कौन-से सुरक्षा नियम अपनाते हैं?
अध्याय के अनुसार रोहन के पिता जैसे निर्माण कर्मी हमेशा हेलमेट, सुरक्षा जैकेट और उपयुक्त जूते पहनकर काम करते हैं।
10अध्याय में मिनी की कहानी क्या है?
मिनी एक छोटी लड़की है जिसके अप्पुप्पन (दादाजी) कुम्हार हैं। वह उन्हें मिट्टी गूँधते और चाक पर बर्तन बनाते देखती है। उसकी माँ अम्मू भट्टी में बर्तन पकाती हैं। मिनी बर्तनों पर प्रतिरूप बनाने और रंग करने में दादाजी की सहायता करती है। उसकी सबसे प्रिय वस्तु मिट्टी की गुल्लक है।
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