सारांश
कक्षा 12 जीव विज्ञान एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक का अध्याय 12, "पारितंत्र", पारितंत्र को प्रकृति की एक क्रियात्मक इकाई के रूप में समझाता है जहाँ जीव एक-दूसरे और अपने भौतिक पर्यावरण से अन्योन्यक्रिया करते हैं — इसका अध्ययन चार प्रमुख प्रक्रियाओं के माध्यम से किया जाता है: उत्पादकता, अपघटन, ऊर्जा प्रवाह और पोषक-चक्रण।
- पारितंत्र की संरचना और कार्य — पारितंत्र अजैविक घटकों — वायु, जल, मृदा — को जैविक उत्पादकों, उपभोक्ताओं और अपघटकों के साथ जोड़ता है, और उत्पादकता, अपघटन, ऊर्जा प्रवाह तथा पोषक-चक्रण की परस्पर-संबद्ध प्रक्रियाओं के माध्यम से कार्य करता है।
- उत्पादकता और अपघटन — उत्पादक सकल प्राथमिक उत्पादकता (GPP) और नेट प्राथमिक उत्पादकता (NPP) के रूप में ऊर्जा स्थिर करते हैं जो उपभोक्ताओं के लिए उपलब्ध भोजन निर्धारित करती है, जबकि अपघटक खंडन, निक्षालन, उपचयन, ह्यूमीकरण और खनिजीकरण के माध्यम से अपरद को अकार्बनिक पोषकों में पुनर्चक्रित करते हैं।
- पोषी स्तरों के माध्यम से ऊर्जा प्रवाह — ऊर्जा खाद्य श्रृंखलाओं और खाद्य जालों के साथ एकदिशीय रूप से प्रवाहित होती है, और अगले पोषी स्तर तक केवल लगभग दस प्रतिशत ऊर्जा पहुँचती है — यही कारण है कि खाद्य श्रृंखलाएँ छोटी होती हैं और उच्च स्तर कम जीवों का भरण-पोषण कर पाते हैं।
- पारिस्थितिक पिरामिड — संख्या, जैवभार और ऊर्जा के पिरामिड पोषी स्तरों के बीच भोजन-संबंधों को दर्शाते हैं; कुछ उलटे हो सकते हैं, किंतु ऊर्जा का पिरामिड सदा सीधा (अनुलोम) होता है क्योंकि प्रत्येक स्थानांतरण पर ऊर्जा क्रमशः हानि होती रहती है।
मुख्य बिंदु और सूत्र
- 01पारितंत्र चार प्रक्रियाओं के माध्यम से कार्य करता है: उत्पादकता, अपघटन, ऊर्जा प्रवाह और पोषक-चक्रण।
- 02सकल प्राथमिक उत्पादकता (GPP) में से श्वसन हानि घटाने पर नेट प्राथमिक उत्पादकता (NPP) प्राप्त होती है, जो विषमपोषियों के लिए उपलब्ध जैवभार है।
- 03अपघटन जटिल कार्बनिक अपरद को खंडन, निक्षालन, उपचयन, ह्यूमीकरण और खनिजीकरण के माध्यम से अकार्बनिक पदार्थों में परिवर्तित करता है।
- 04पारितंत्रों में ऊर्जा प्रवाह एकदिशीय होता है; एक पोषी स्तर से अगले तक केवल 10 प्रतिशत ऊर्जा स्थानांतरित होती है।
- 05पारिस्थितिक पिरामिड (संख्या, जैवभार, ऊर्जा) भोजन-संबंधों को प्रदर्शित करते हैं; ऊर्जा का पिरामिड सदा सीधा होता है और कभी उलटा नहीं हो सकता।
- 06पादप प्रकाश-सक्रिय विकिरण (PAR) का केवल 2–10 प्रतिशत ग्रहण करते हैं, जो कुल आपतित सौर विकिरण के 50 प्रतिशत से कम है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
01सकल प्राथमिक उत्पादकता (GPP) और नेट प्राथमिक उत्पादकता (NPP) में क्या अंतर है?
सकल प्राथमिक उत्पादकता (GPP) प्रकाश-संश्लेषण के दौरान कार्बनिक पदार्थ उत्पादन की कुल दर है। नेट प्राथमिक उत्पादकता (NPP) = GPP − पादप श्वसन में खर्च ऊर्जा (GPP – R = NPP)। NPP वह जैवभार है जो शाकाहारियों और अपघटकों जैसे विषमपोषियों के लिए उपभोग हेतु उपलब्ध होता है।
02अपरद के अपघटन में कौन-से चरण सम्मिलित हैं?
अपघटन में पाँच चरण होते हैं: खंडन (अपरदाहारी अपरद को छोटे कणों में तोड़ते हैं), निक्षालन (जल में घुलनशील पोषक मृदा में पहुँचते हैं), उपचयन (जीवाणु और कवक एंजाइम अपरद को सरल अकार्बनिक पदार्थों में अपघटित करते हैं), ह्यूमीकरण (सूक्ष्मजैविक क्रिया के प्रति प्रतिरोधी गहरे कोलॉइडी ह्यूमस का निर्माण), और खनिजीकरण (ह्यूमस का आगे सूक्ष्मजैविक अपघटन जिससे अकार्बनिक पोषक मुक्त होते हैं)।
03ऊर्जा का पिरामिड सदा सीधा क्यों होता है और कभी उलटा क्यों नहीं होता?
ऊर्जा का पिरामिड सदा सीधा होता है क्योंकि जब ऊर्जा एक पोषी स्तर से अगले में प्रवाहित होती है, तो प्रत्येक चरण पर कुछ ऊर्जा सदा ऊष्मा के रूप में नष्ट होती है। प्रत्येक क्रमिक पोषी स्तर तक केवल लगभग 10 प्रतिशत ऊर्जा स्थानांतरित होती है, इसलिए निचले पोषी स्तर की ऊर्जा सदा ऊपरी स्तर से अधिक होती है — जिससे उलटाव असंभव है।
04क्या कक्षा 12 जीव विज्ञान अध्याय 12 की एनसीईआरटी पीडीएफ मुफ्त में डाउनलोड होती है?
हाँ, कक्षा 12 जीव विज्ञान अध्याय 12 (पारितंत्र) की एनसीईआरटी पीडीएफ ncerthindi.com पर निःशुल्क डाउनलोड की जा सकती है।
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