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कक्षा 9 गणित

अध्याय 1: स्वयं को प्रवृत्त करना— निर्देशांकों का उपयोग — समाधान

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समाधान

अवलोकन

स्वयं को प्रवृत्त करना— निर्देशांकों का उपयोग के NCERT समाधान (अध्याय 1, NCERT कक्षा 9 गणित) — हर प्रश्न और उत्तर सिर्फ़ अंतिम उत्तर नहीं, बल्कि पूरी तरह चरण-दर-चरण हल किया गया। आप स्वयं को प्रवृत्त करना— निर्देशांकों का उपयोग की पाठ्यपुस्तक का अध्याय भी पढ़ सकते हैं।

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इन समाधानों में क्या है

  • निर्देशांकों का इतिहास — सिंधु-सरस्वती सभ्यता और बौधायन से लेकर ब्रह्मगुप्त तथा देकार्त और फ़र्मा तक ग्रिड-आधारित चिंतन का क्रमिक विकास बताया गया है, जो यह दर्शाता है कि संख्याओं द्वारा बिंदुओं को निर्धारित करने का विचार कैसे सहस्राब्दियों में विकसित हुआ।
  • कार्तीय तल — दो लंबवत अक्ष — x-अक्ष और y-अक्ष — मूलबिंदु O (0, 0) पर मिलते हैं और तल को चार चतुर्थांशों में विभाजित करते हैं, जिससे तल के किसी भी बिंदु को क्रमित युग्म (x, y) से नामांकित किया जा सकता है।
  • बिंदुओं को आलेखित करना और पहचानना — किसी बिंदु के चिह्न-प्रतिरूप से यह निर्धारित होता है कि वह किस चतुर्थांश में स्थित है, जिससे छात्र निर्देशांकों से बिंदु आलेखित करने और ग्राफ से बिंदु के निर्देशांक पढ़ने दोनों कार्य कर सकते हैं।
  • दो बिंदुओं के बीच दूरी — बौधायन-पाइथागोरस प्रमेय किन्हीं दो आलेखित बिंदुओं के बीच की सीधी-रेखा दूरी देती है, जो निर्देशांक प्रणाली को मापन से जोड़ती है।
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